मानसून तेज होने से कपास की बुवाई ने पकड़ी रफ्तार, रकबा 100 लाख हेक्टेयर के पार
2026-07-29 11:59:10
मानसून के रफ्तार पकड़ते ही कपास की बुआई तेज, रकबा 100 लाख हेक्टेयर के पार
देश के प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में मानसून के सक्रिय होने के साथ कपास की बुआई में तेजी आई है। इस सीजन में अब तक कपास का रकबा 100 लाख हेक्टेयर से अधिक हो चुका है। तेलंगाना, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में पिछले वर्ष की तुलना में बुआई क्षेत्र में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो कुल रकबा पिछले वर्ष के स्तर को भी पार कर सकता है।
कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) की फसल समिति के चेयरमैन अतुल गनात्रा के अनुसार, मानसून में 20–30 दिन की देरी के बावजूद कपास की बुआई ने तेज रफ्तार पकड़ी है। हाल के दिनों में हुई अच्छी बारिश से कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी किसानों को बुआई का अवसर मिला है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष बुआई की अवधि 25 अगस्त तक बढ़ा दी गई है और 20 अगस्त तक 120 लाख हेक्टेयर के सरकारी लक्ष्य को हासिल करना संभव है। वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 50,000 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुआई हो रही है।
राज्यों की बात करें तो आंध्र प्रदेश में कपास का रकबा 31 प्रतिशत और तेलंगाना में 4 प्रतिशत बढ़ा है। मध्य प्रदेश में भी बुआई क्षेत्र 5.79 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। गुजरात में हाल की बारिश और राज्य सरकार द्वारा घोषित 14,000 रुपये प्रति एकड़ की सब्सिडी से इस वर्ष कपास का रकबा 7 से 10 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना है। हालांकि, महाराष्ट्र में कपास का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में कुछ कम रहा है।
CAI के अनुसार, फिलहाल देशभर में कपास की फसल की स्थिति संतोषजनक है। उत्तर भारत और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में जल्दी बोई गई फसल की आवक सितंबर के पहले सप्ताह से शुरू होने की उम्मीद है। कर्नाटक के रायचूर और आंध्र प्रदेश के अडोनी सहित कई क्षेत्रों में हाल की बारिश से फसल को लाभ मिला है। वहीं, महाराष्ट्र के खानदेश क्षेत्र में भी सिंचित इलाकों में फसल अच्छी स्थिति में है, हालांकि कुछ किसानों के मक्का की ओर रुख करने से वहां कपास का रकबा 5 से 10 प्रतिशत तक घट सकता है।