कपास की बुवाई में देरी: MSP ₹8,600, बारिश नहीं हुई तो उत्पादन 20% तक घटने की आशंका
जलगांव: केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹8,600 प्रति क्विंटल तय किया है। हालांकि, कई क्षेत्रों में अब तक पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण वर्षा आधारित (रेनफेड) क्षेत्रों में कपास की बुवाई शुरू नहीं हो सकी है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 5 जुलाई तक बुवाई पूरी हो जाती है, तो फसल अक्टूबर में कटाई के लिए तैयार हो जाएगी और किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ MSP का लाभ मिलने की संभावना रहेगी। लेकिन यदि बारिश में और देरी होती है, तो कपास उत्पादन में 10% से 20% तक गिरावट आ सकती है।
सिंचित क्षेत्रों में किसानों ने मई के अंतिम सप्ताह में ही कपास की बुवाई कर दी थी और फसल का अंकुरण भी हो चुका है। इन क्षेत्रों की फसल विजयादशमी के आसपास तैयार होने की उम्मीद है। वहीं, वर्षा पर निर्भर किसान अभी भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। क्षेत्र में अब तक सामान्य से केवल करीब 12% बारिश दर्ज होने के कारण अधिकांश किसानों ने बुवाई टाल रखी है।
पिछले सीजन में उत्पादन और कारोबार दोनों प्रभावित
पिछले खरीफ सीजन (2025-26) में अत्यधिक बारिश के कारण कपास उत्पादन प्रभावित हुआ था। इसके साथ ही निजी व्यापारियों द्वारा कम कीमत की पेशकश के चलते बाजार में कपास की आवक भी अपेक्षा से कम रही। कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) और निजी व्यापारियों द्वारा खरीदी गई कपास से अनुमानित 20 लाख गांठों के मुकाबले केवल 8.5 लाख गांठें ही उपलब्ध हो सकीं।
कपास की कमी का असर जिनिंग और प्रेसिंग उद्योग पर भी पड़ा। आमतौर पर ₹375 करोड़ का वार्षिक कारोबार करने वाला यह उद्योग पिछले सीजन में घटकर ₹200 से ₹225 करोड़ के बीच सिमट गया।
सीजन के अंत में ₹9,000 के पार पहुंचे भाव
पिछले वर्ष केंद्र सरकार ने कपास का MSP ₹8,100 प्रति क्विंटल तय किया था। शुरुआती दौर में अधिक नमी के कारण निजी व्यापारियों ने गुणवत्ता के आधार पर ₹7,600 से ₹7,700 प्रति क्विंटल तक ही कीमत दी। लेकिन बाद में बाजार में कपास की कमी और आयात सीमित रहने से भारतीय कपास की मांग बढ़ गई, जिससे सीजन के अंत में कीमतें ₹9,000 से ₹9,500 प्रति क्विंटल तक पहुंच गईं।
हालांकि, मई तक अधिकांश किसानों के पास बिक्री के लिए कपास बची ही नहीं थी। इसलिए ऊंचे बाजार भाव का लाभ किसानों को नहीं मिल सका।
बारिश पर टिकी किसानों की उम्मीदें
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस साल कपास की पैदावार और किसानों की आय काफी हद तक आगामी दिनों की बारिश पर निर्भर करेगी। यदि अगले एक सप्ताह में अच्छी वर्षा होती है और समय पर बुवाई पूरी हो जाती है, तो उत्पादन और बाजार दोनों में संतुलन बना रह सकता है। वहीं, बारिश में अधिक देरी होने पर उत्पादन, गुणवत्ता और कृषि आधारित उद्योगों पर भी इसका सीधा असर पड़ने की आशंका है।