STAY UPDATED WITH COTTON UPDATES ON WHATSAPP AT AS LOW AS 6/- PER DAY

Start Your 7 Days Free Trial Today

News Details

कपास खरीद संकट: किसानों को बिक्री और भुगतान में परेशानी

2026-03-17 12:08:49
First slide



कपास खरीद में संकट गहराया: किसानों को बिक्री, पंजीकरण और कीमतों में झेलनी पड़ रही परेशानी


इस वर्ष कपास उत्पादक किसानों की स्थिति बेहद जटिल बनी हुई है। जहां एक ओर सरकार कृषि क्षेत्र को लेकर सकारात्मक दावे कर रही है, वहीं जमीनी स्तर पर हालात चिंताजनक हैं। विशेष रूप से विदर्भ क्षेत्र के किसान इस दुविधा में हैं कि वे अपनी उपज कहां और कैसे बेचें।


कपास खरीद में अहम भूमिका निभाने वाली Cotton Corporation of India (CCI) द्वारा कई खरीद केंद्र समय से पहले बंद किए जाने से हजारों किसान प्रभावित हुए हैं। केवल यवतमाल जिले में ही 40,000 से अधिक पंजीकृत किसान अब तक अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, जबकि राज्य स्तर पर यह संख्या और अधिक हो सकती है।


इस वर्ष खरीफ सीजन में भारी बारिश और लंबे मानसून के कारण फसल को व्यापक नुकसान हुआ। शुरुआती फसल खराब हो गई और कटाई में भी देरी हुई। इसके साथ ही मजदूरों की कमी के चलते तुड़ाई लागत बढ़ गई, जिससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा।

सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 8,110 रुपये प्रति क्विंटल है, लेकिन खुले बाजार में कीमतें 6,000 से 7,000 रुपये के बीच रहने से किसान CCI केंद्रों पर निर्भर हो गए। हालांकि, इस वर्ष खरीद प्रक्रिया अनिश्चितताओं से घिरी रही।

पहली बार “कॉटन किसान ऐप” के जरिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया, जो ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी सीमाओं के कारण कई किसानों के लिए चुनौती बना। जिन किसानों ने पंजीकरण किया, उन्हें भी स्लॉट बुकिंग की नई व्यवस्था के कारण परेशानी हुई, क्योंकि अधिकांश केंद्रों पर स्लॉट उपलब्ध नहीं थे।

हालांकि सरकार और CCI ने सभी पंजीकृत किसानों से खरीद का आश्वासन दिया था, लेकिन व्यवहार में यह वादा अधूरा नजर आया। खरीद की समयसीमा भी एक बड़ी समस्या बनी—जहां उम्मीद थी कि प्रक्रिया मार्च के अंत तक चलेगी, वहीं इसे 15 मार्च तक सीमित कर दिया गया। छुट्टियों और सीमित कार्यदिवसों के कारण वास्तविक खरीद अवधि और भी कम रही।

इन परिस्थितियों को देखते हुए किसान मांग कर रहे हैं कि खरीद केंद्रों को अप्रैल के अंत तक खुला रखा जाए और सभी पंजीकृत किसानों से कपास खरीदी जाए, चाहे वे स्लॉट बुक कर पाए हों या नहीं।

इसके अलावा, मूल्य नीति भी किसानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। शुरुआती कम कीमतों के कारण कई किसानों ने बेहतर दाम की उम्मीद में कपास को रोककर रखा था, लेकिन बाद में कीमतों में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, जिससे उनकी आय प्रभावित हुई।

कुल मिलाकर, बीज से लेकर बाजार तक की पूरी प्रक्रिया में नीतिगत खामियां सामने आई हैं। यदि समय रहते सुधार नहीं किए गए, तो कपास किसानों की आर्थिक स्थिति और कमजोर हो सकती है।


और पढ़ें:- रुपया 03 पैसे बढ़कर 92.39 पर खुला

Regards
Team Sis
Any query plz call 9111677775

https://wa.me/919111677775

Videos