DGTR की चीनी विस्कोस यार्न पर एंटी-डंपिंग शुल्क सिफारिश
2026-03-24 12:50:07
DGTR की चीनी विस्कोस यार्न पर एंटी-डंपिंग शुल्क की सिफारिश, घरेलू उद्योग को राहत की उम्मीद
नई दिल्ली: वाणिज्य मंत्रालय के तहत काम करने वाले व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR) ने चीन से आयातित विस्कोस रेयान फिलामेंट यार्न (75 डेनियर से ऊपर) पर एंटी-डंपिंग शुल्क लगाने की सिफारिश की है। यह कदम घरेलू उद्योग को सस्ते आयात से होने वाले नुकसान से बचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
DGTR की अधिसूचना के अनुसार, विभिन्न चीनी कंपनियों पर अलग-अलग दरों से शुल्क प्रस्तावित किया गया है। इनमें शिनजियांग केमिकल फाइबर पर $386 प्रति मीट्रिक टन, जिलिन केमिकल फाइबर पर $667, यिबिन हाईएस्ट फाइबर पर $518, जबकि अन्य उत्पादकों पर यह शुल्क $1,071 प्रति मीट्रिक टन तक हो सकता है।
लगातार जांच और नई कार्रवाई
यह सिफारिश ऐसे समय आई है जब DGTR ने हाल ही में चीन से आयातित एथिल क्लोरोफॉर्मेट पर भी एंटी-डंपिंग जांच शुरू की है। यह जांच गुजरात की कंपनी Paushak Limited की शिकायत के बाद शुरू की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि यह रसायन भारत में अत्यंत कम कीमत पर बेचा जा रहा है, जिससे घरेलू उद्योग प्रभावित हो रहा है।
DGTR के प्रारंभिक निष्कर्ष
प्रारंभिक जांच में पाया गया है कि चीन से सस्ते आयात में वृद्धि के कारण घरेलू कीमतों पर दबाव पड़ा है और भारतीय उत्पादकों को वास्तविक नुकसान हुआ है। यदि वित्त मंत्रालय इस सिफारिश को मंजूरी देता है, तो यह शुल्क अगले पांच वर्षों तक लागू रह सकता है।
एकमात्र घरेलू उत्पादक का दावा
Paushak Limited ने दावा किया है कि वह देश में एथिल क्लोरोफॉर्मेट का एकमात्र उत्पादक है और घरेलू उत्पादन की पूरी आपूर्ति वही करता है। DGTR अब यह जांच कर रहा है कि क्या डंपिंग के कारण हुए नुकसान की भरपाई के लिए शुल्क आवश्यक है।
उद्योग पर असर की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह एंटी-डंपिंग शुल्क लागू होता है तो घरेलू उद्योग को सुरक्षा मिलेगी, लेकिन दवा और कृषि रसायन क्षेत्र में कच्चे माल की लागत बढ़ सकती है। DGTR के अनुसार, जांच अवधि अक्टूबर 2024 से सितंबर 2025 तक की है और डंपिंग मार्जिन निर्धारित सीमा से अधिक पाया गया है।