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अगेती बुवाई से कपास की पैदावार बढ़ेगी: विशेषज्ञ सलाह

2026-04-27 15:29:15
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अगेती बिजाई से कपास में बढ़ेगी पैदावार, किसानों को विशेषज्ञ की सलाह


चरखी दादरी। जिले में कपास की खेती करने वाले किसानों के लिए इस बार समय पर बुवाई बेहद अहम मानी जा रही है। कृषि विभाग के वरिष्ठ विषय विशेषज्ञ डॉ. चंद्रभान श्योराण ने किसानों को सलाह दी है कि कपास की अगेती बिजाई से अधिक और बेहतर गुणवत्ता वाली पैदावार हासिल की जा सकती है।


उन्होंने बताया कि किसी भी फसल की सफलता में समय पर बुवाई की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, विशेष रूप से कपास जैसी नगदी फसल में। पिछले कुछ वर्षों में कपास, चरखी दादरी जिले में खरीफ सीजन की प्रमुख फसल बनकर उभरी है, जो किसानों की आय बढ़ाने के साथ रबी फसलों के लिए आर्थिक आधार भी तैयार करती है।


डॉ. श्योराण के अनुसार जिले की अधिकांश भूमि रेतीली और अर्ध-रेतीली है, जो कपास की खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है। दक्षिण हरियाणा के अन्य क्षेत्रों में भी ऐसी ही परिस्थितियां हैं, जहां अगेती बिजाई किसानों के लिए अधिक लाभदायक साबित होती है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अप्रैल माह में ही कपास की बुवाई शुरू करें। यदि किसी कारण देरी हो जाए, तो 10 मई तक हर हाल में बिजाई पूरी कर लें, ताकि फसल को अनुकूल मौसम का पूरा लाभ मिल सके।


उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में बीटी कपास की खेती व्यापक रूप से की जा रही है और सरकार द्वारा अनुमोदित कई किस्में इस क्षेत्र के लिए उपयुक्त हैं। इनमें अजीत 133-2, अजीत 33-2, अंकुर 3244, अंकुर 3228, नुजिविडु 9002, नुजिविडु 9024, रासी 773, रासी 776, रासी 791, रासी 605 और रासी 650 प्रमुख हैं।

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