बारिश की कमी से गुजरात और तेलंगाना में किसानों पर संकट
गुजरात के अमरेली से लेकर तेलंगाना के कई इलाकों तक बारिश की कमी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कमजोर मानसून के कारण खरीफ फसलों पर संकट गहरा गया है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
अमरेली जिले के सावरकुंडला पंथक में करीब डेढ़ महीने से बारिश नहीं हुई है। इससे किसानों की कपास की फसल सूखने लगी है। महंगे बीज, खाद और मेहनत से तैयार की गई फसल में उत्पादन की उम्मीद खत्म होने के बाद कई किसानों ने मजबूरी में अपने मवेशियों को खेतों में चरने के लिए छोड़ दिया है। एक किसान ने बताया कि 15 बीघा में कपास की खेती पर एक लाख रुपये से अधिक खर्च करने के बावजूद बारिश न होने से पूरी फसल खराब हो गई। सौराष्ट्र और कच्छ के अन्य हिस्सों में भी कम बारिश के कारण खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचा है।
तेलंगाना में भी स्थिति चिंताजनक है। 1 जून से 1 सितंबर के बीच जोगुलम्बा गडवाल जिले के वड्डेपल्ले मंडल में सामान्य से 73%, जबकि नलगोंडा जिले के केथेपल्ले मंडल में 71% बारिश की कमी दर्ज की गई। कई अन्य मंडलों में भी 60% या उससे अधिक बारिश कम हुई है। केथेपल्ले में सामान्य 431.5 मिमी के मुकाबले केवल 124.9 मिमी बारिश हुई।
वड्डेपल्ले में बारिश न होने के कारण बीज सूख गए हैं और किसानों को कपास और मिर्च की दोबारा बुआई करनी पड़ रही है। बार-बार बुआई, बीज और ड्रिप इरिगेशन पर उनका खर्च ₹30,000 से ₹50,000 प्रति एकड़ तक बढ़ गया है। किराए पर खेती करने वाले किसानों पर आर्थिक बोझ और भी अधिक है।
अब किसानों की उम्मीद सितंबर की बारिश पर टिकी है। विशेषज्ञों के मुताबिक एल नीनो, स्थानीय मौसम प्रणालियां और बारिश के असमान वितरण ने हालात बिगाड़े हैं। यदि जल्द पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो किसानों की फसल और आय पर संकट और गहरा सकता है।
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