गुलाबी सुंडी के डर से हनुमानगढ़ में Bt कपास का रकबा 15 हजार हेक्टेयर घटा
2026-07-06 14:34:19
हनुमानगढ़ में बीटी कपास का रकबा 15 हजार हेक्टेयर घटा, गुलाबी सुंडी का डर बना प्रमुख कारण
हनुमानगढ़ जिले में इस खरीफ सीजन बीटी कपास की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में करीब 15 हजार हेक्टेयर कम हुई है। कृषि विभाग के अनुसार 29 जून तक जिले में 1,32,582 हेक्टेयर क्षेत्र में बीटी कपास की बुवाई हुई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 1,47,585 हेक्टेयर था।
लगातार तीन वर्षों से गुलाबी सुंडी (पिंक बॉलवर्म) के बढ़ते प्रकोप और पिछले वर्ष हुए नुकसान के चलते इस बार किसानों ने कपास का रकबा घटाया है। इसके विपरीत मूंग, धान, ग्वार तथा अन्य खरीफ फसलों का क्षेत्र बढ़ने की संभावना है। इन फसलों की बुवाई अभी जारी है और अंतिम आंकड़े जल्द जारी होंगे।
हनुमानगढ़ में सामान्यतः हर वर्ष करीब 1.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बीटी कपास की खेती होती है। इस बार रकबा कम होने के बावजूद कृषि विभाग किसानों को बेहतर फसल प्रबंधन और गुलाबी सुंडी से बचाव के लिए लगातार जागरूक कर रहा है। विभाग ने कार्यशालाओं और एडवाइजरी के माध्यम से किसानों को अगेती बुवाई नहीं करने की सलाह दी थी। किसानों से कहा गया था कि मई माह से बुवाई शुरू करें ताकि अधिकांश खेतों में फसल की फ्लावरिंग एक साथ हो और जुलाई तक गुलाबी सुंडी का जीवन चक्र प्रभावित हो सके। हालांकि कुछ किसानों ने ट्यूबवेल से सिंचाई कर मई से पहले ही बुवाई कर दी, जिससे इन खेतों में सुंडी के प्रकोप की आशंका बनी हुई है।
कृषि विभाग की सलाह खेतों का नियमित निरीक्षण करें और गुलाबी सुंडी के शुरुआती लक्षणों पर नजर रखें। पौधों की अत्यधिक बढ़वार रोकने के लिए सिंचाई के साथ यूरिया (नाइट्रोजन) का सीमित उपयोग करें। प्रति हेक्टेयर पांच फेरोमोन ट्रैप लगाकर कीट की निगरानी करें। फूलों और गुड्डियों का नियमित निरीक्षण करें तथा रोसेट फूल दिखाई देने पर उन्हें तुरंत नष्ट कर दें। टिंडे बनने की अवस्था में प्रति एकड़ 20 हरे टिंडों की जांच करें। यदि 20 में से दो या अधिक टिंडों में सफेद या गुलाबी लार्वा मिले अथवा 10 प्रतिशत रोसेट फूल दिखाई दें, तो तुरंत नियंत्रण उपाय अपनाएं।
सहायक निदेशक कृषि (विस्तार) डॉ. संजीव भादू ने बताया कि इस वर्ष बीटी कपास का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में कम है, जबकि अन्य खरीफ फसलों का क्षेत्र बढ़ने की संभावना है। उन्होंने किसानों से नियमित निगरानी, फेरोमोन ट्रैप का उपयोग तथा विभाग की वैज्ञानिक सलाह का पालन करने की अपील की, ताकि गुलाबी सुंडी से होने वाले नुकसान को कम कर बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके।