हरियाणा के कपास क्षेत्र में जलभराव से भारी नुकसान, किसानों की बढ़ी चिंता
हरियाणा के हिसार, सिरसा, फतेहाबाद और भिवानी जिलों को राज्य का प्रमुख ‘कपास बेल्ट’ माना जाता है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में सफेद मक्खी और गुलाबी सुंडी जैसे कीटों के हमलों से फसल को नुकसान पहुंचता रहा है, जिससे कपास के रकबे में धीरे-धीरे कमी आई है।
इस सीजन में कीटों का असर कम रहा, लेकिन इसके बावजूद किसानों की मुश्किलें कम नहीं हुईं। कई इलाकों में लंबे समय तक जलभराव रहने से कपास की फसल को भारी नुकसान हुआ है। खेतों में पानी भरने से पौधे मुरझा गए और फसल खराब हो गई।
कृषि विभाग के अनुसार, हिसार जिले में 2 अगस्त तक आई बारिश और बाढ़ के कारण करीब 40,000 एकड़ कपास की फसल नष्ट हो चुकी है। अग्रोहा, आदमपुर, हिसार-1 और बास ब्लॉकों में सबसे ज्यादा नुकसान दर्ज किया गया है। लगातार बारिश और नालों के उफान से स्थिति और गंभीर हो गई है।
भिवानी जिले में भी हालात चिंताजनक हैं, जहां करीब 38,000 एकड़ कपास की फसल जलभराव की चपेट में है। कुल 1,13,265 एकड़ क्षेत्र में से 5,400 एकड़ में 75 से 100 प्रतिशत तक नुकसान हो चुका है, जबकि बाकी जलमग्न क्षेत्र भी प्रभावित है। विशेषज्ञों का कहना है कि कपास की फसल दो दिन से ज्यादा पानी में टिक नहीं पाती, इसलिए नुकसान की भरपाई मुश्किल है।
हिसार के उप निदेशक (कृषि) डॉ. राजबीर सिंह ने बताया कि सिंचाई विभाग खेतों से पानी निकालने के प्रयास कर रहा है। उन्होंने प्रभावित किसानों को सलाह दी है कि वे वैकल्पिक रूप से धान की देर से बुवाई कर सकते हैं।
सिरसा जिले में नुकसान अपेक्षाकृत कम रहा है, हालांकि नाथूसरी चोपटा क्षेत्र में करीब 2,600 एकड़ फसल बर्बाद हुई है। जिले में कुल 1,47,000 हेक्टेयर में कपास की खेती होती है। फतेहाबाद में 80,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में कपास बोई जाती है, जिसमें से लगभग 2,500 एकड़ जलभराव के कारण प्रभावित हुआ है।
सिरसा के शक्कर मंदोरी गांव के किसान विनोद कुमार की कहानी इस संकट की गंभीरता को दर्शाती है। उन्होंने 10 एकड़ में से 8 एकड़ में कपास की खेती की थी, लेकिन भारी बारिश और जलभराव के कारण पूरी फसल नष्ट हो गई। उन्होंने प्रति एकड़ 10,000 से 15,000 रुपये तक खर्च किए थे।
अब उन्होंने 4 एकड़ में धान बोने की कोशिश की, लेकिन खेतों में पानी भरे होने से हालात बेहद खराब हैं। कीचड़ में उनका ट्रैक्टर और रोटावेटर तक फंस गया। ट्रैक्टर तो बाहर निकाल लिया गया, लेकिन रोटावेटर अब भी खेत में फंसा हुआ है।
किसान ने सरकार से मुआवजे की मांग करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी सारी जमा-पूंजी इस फसल में लगा दी थी और अब उनके सामने भविष्य को लेकर बड़ी अनिश्चितता खड़ी हो गई है।
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