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प्रोत्साहन संशोधन नोटिफिकेशन लंबित, किसानों में असमंजस

2026-04-10 12:34:48
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देसी कपास प्रोत्साहन राशि पर संशोधन का नोटिफिकेशन लंबित, किसानों में असमंजस


हरियाणा में देसी कपास की बुवाई पर प्रोत्साहन राशि बढ़ोतरी को लेकर अभी तक सरकार की ओर से आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है। इससे किसानों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। मौजूदा स्थिति में देसी कपास पर 3,000 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि लागू है, जबकि बजट सत्र में इसे बढ़ाकर 4,000 रुपये प्रति एकड़ करने की घोषणा की गई थी।


किसानों का कहना है कि बुवाई का समय नजदीक होने के बावजूद नोटिफिकेशन न आने से योजना का लाभ इस खरीफ सीजन में मिल पाएगा या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। यदि प्रोत्साहन राशि में बढ़ोतरी लागू नहीं होती, तो देसी कपास का रकबा बढ़ने की संभावना कमजोर हो सकती है और किसान धान जैसी वैकल्पिक फसलों की ओर रुख कर सकते हैं।

यह मुद्दा सिरसा, हिसार, फतेहाबाद, जींद और भिवानी जैसे कपास उत्पादक जिलों में अधिक प्रभाव डाल सकता है। सिरसा क्षेत्र राज्य में कपास उत्पादन का प्रमुख केंद्र माना जाता है, जहां केंद्रीय कपास अनुसंधान केंद्र भी स्थित है।

कृषि विभाग के अनुसार, फिलहाल सरकार की ओर से न तो प्रोत्साहन राशि बढ़ोतरी का नोटिफिकेशन जारी हुआ है और न ही देसी कपास के बुवाई रकबे की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है, जो योजना लागू करने की एक आवश्यक प्रक्रिया है।

उप निदेशक कृषि विभाग, सुखबीर सिंह के अनुसार, नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ही बढ़ी हुई राशि का लाभ किसानों को मिल पाएगा।

वर्तमान में लगभग 7,000 किसान करीब 17,000 एकड़ क्षेत्र में देसी कपास की खेती करते हैं और उन्हें योजना के तहत सहायता मिलती है। किसान लंबे समय से उत्पादन लागत, गुलाबी सुंडी और रोगों की समस्या के चलते कपास से दूरी बना रहे हैं, जिससे इसका रकबा लगातार घट रहा है।

इस बीच, विधानसभा सत्र में भी यह मुद्दा उठाया गया था। सिरसा से कांग्रेस विधायक गोकुल सेतिया ने देसी कपास के घटते रकबे और प्रोत्साहन योजना के विस्तार की मांग की थी।


सरकार की ओर से बजट सत्र में जिन कृषि प्रोत्साहन योजनाओं की घोषणा की गई थी, उनमें शामिल हैं— देसी कपास पर 4,000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन, धान छोड़कर वैकल्पिक फसलों पर 2,000 रुपये अतिरिक्त बोनस, बागवानी बीमा योजना का विस्तार, गन्ना और मधुमक्खी पालन को बढ़ावा तथा नए पशु चिकित्सा ढांचे का विस्तार।

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