भारत में कपास की कमी बढ़ने की आशंका, FTA से निर्यात मांग में तेजी के संकेत
पुणे: भारत में कपास की कमी और गंभीर होने की आशंका है। नए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के जरिए कपड़ा और परिधान निर्यात बढ़ने से घरेलू बाजार में कपास की मांग बढ़ सकती है। वहीं, अल नीनो और सूखे के संभावित प्रभाव से उत्पादन घटने की आशंका है, जिससे आगामी सीजन में मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर बढ़ सकता है।
उद्योग जगत के अनुमानों के अनुसार, सितंबर 2027 में समाप्त होने वाले 2026-27 कपास वर्ष में भारत का कपास उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में 3.4% घट सकता है। प्रतिकूल मौसम के कारण उत्पादन 28 मिलियन गांठों से नीचे रहने की आशंका भी जताई गई है।
2025-26 में भारत का कपास आयात अनुमानित 7.1 मिलियन गांठों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष यह 5.74 मिलियन गांठें था। एक गांठ का वजन 170 किलोग्राम मानने पर यह आयात लगभग 12.07 लाख टन के बराबर होता है। इस बीच, पिछले एक महीने में घरेलू कपास की कीमतों में 7% से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज किए जाने की बात कही गई है।
कपास पर 11% आयात शुल्क से मिली छूट 31 अक्टूबर 2026 को समाप्त होने वाली है। सरकार ने 1 जून से 31 अक्टूबर 2026 तक कच्चे कपास के आयात पर यह राहत दी थी। इससे पहले, 19 अगस्त से 31 दिसंबर 2025 के बीच भी इसी तरह की छूट दी गई थी। छूट की अवधि बढ़ाए जाने को लेकर अनिश्चितता के बीच घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
स्पॉट बाजार के आंकड़ों के अनुसार, 1 अक्टूबर 2026 से शुरू हुए नए कपास वर्ष में गुजरात के 29-मिलीमीटर कपास का भाव ₹4,500 प्रति कैंडी बढ़कर ₹68,500 प्रति कैंडी हो गया।
द सदर्न इंडिया मिल्स एसोसिएशन (SIMA) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लिखे पत्र में कहा कि 2025-26 में देश में लगभग 34 मिलियन गांठों की कपास खपत हुई और करीब 7 मिलियन गांठों का आयात किया गया। संगठन के अनुसार, कच्चे माल की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता के कारण कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है।
SIMA के महासचिव के. सेल्वाराजू के अनुसार, ब्रिटेन (UK) सहित नए बाजारों से निर्यात मांग बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। आगामी सीजन में कपास की मांग 36 मिलियन गांठों से अधिक हो सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि अल नीनो और सूखे के कारण उत्पादन 28 मिलियन गांठों से नीचे रह सकता है। यदि 2027 में यूरोपीय संघ (EU) के साथ मुक्त व्यापार समझौता लागू होता है, तो भारतीय कपड़ा और परिधान निर्यात को अतिरिक्त अवसर मिल सकते हैं।
खानदेश गिनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप जैन के अनुसार, कपास की कीमतों में हुई वृद्धि के अनुपात में धागे की कीमतें नहीं बढ़ी हैं, जिससे जिनिंग उद्योग की लाभप्रदता प्रभावित हो रही है। वहीं, अधिक कीमतों की उम्मीद में कुछ किसान अपनी फसल रोककर रख रहे हैं।
इसके अलावा, नमी की कमी के कारण कई किसानों ने इस वर्ष कपास की केवल एक बार तुड़ाई की और बाद में खेतों को दूसरी फसलों के लिए खाली कर दिया। इससे कपास की पैदावार और अच्छी गुणवत्ता वाले कच्चे माल की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका है। यदि उत्पादन में गिरावट और निर्यात मांग में वृद्धि एक साथ होती है, तो आगामी सीजन में भारतीय कपड़ा उद्योग के लिए पर्याप्त कपास उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
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