अल नीनो का असर: देश के 53% हिस्से में सूखे जैसे हालात, खरीफ और रबी की बुआई पर चिंता
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के अंतिम चरण में बारिश की कमी से देश के बड़े हिस्से में सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। इंडिया ड्राउट मॉनिटर के अनुसार, देश के कुल क्षेत्रफल का करीब 53.2% हिस्सा किसी न किसी स्तर के सूखे से प्रभावित है। एक सप्ताह पहले यह आंकड़ा करीब 46% था। बारिश की कमी से खेतों में खड़ी खरीफ फसलों पर दबाव बढ़ा है, जबकि आगामी रबी सीजन की बुआई के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
IIT गांधीनगर की वॉटर एंड क्लाइमेट लैब के 9 सितंबर तक के आकलन के मुताबिक, देश के 33.4% हिस्से में मध्यम या उससे अधिक गंभीर सूखा, 15.4% में गंभीर या उससे अधिक गंभीर सूखा और 3.8% क्षेत्र में अत्यधिक सूखे की स्थिति है। करीब 0.1% क्षेत्र असाधारण सूखे की चपेट में है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार तक निगरानी किए गए 734 जिलों में से 41% में बारिश सामान्य से कम रही, जबकि 6% जिलों में बारिश में बहुत ज्यादा कमी दर्ज की गई। इस मॉनसून सीजन में देशभर में बारिश सामान्य से करीब 15% कम रही है।
खेती के लिहाज से महाराष्ट्र सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में शामिल है, जहां 85.2% क्षेत्र किसी न किसी स्तर के सूखे से प्रभावित बताया गया है। राज्य के 25.93% हिस्से में बहुत ज्यादा और 17.20% हिस्से में असाधारण सूखे की स्थिति दर्ज की गई है। छत्तीसगढ़ में 11.91%, मध्य प्रदेश में 5.22% और उत्तर प्रदेश में 4.92% क्षेत्र बहुत ज्यादा या असाधारण सूखे की श्रेणी में है।
बारिश की कमी से अरहर, उड़द और सोयाबीन जैसी खरीफ फसलों की पैदावार को लेकर चिंता बढ़ी है। महाराष्ट्र, तेलंगाना और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में सूखे जैसे हालात किसानों के लिए चुनौती बने हुए हैं। मिट्टी में नमी की कमी रहने पर रबी फसलों की बुआई और शुरुआती विकास प्रभावित हो सकता है।
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