भारत को टेक्सटाइल कचरे का ‘डंपिंग ग्राउंड’ बताना भ्रामक: केंद्र सरकार
2026-05-21 16:58:36
भारत को टेक्सटाइल कचरे का डंपिंग ग्राउंड बताना भ्रामक: केंद्र सरकार
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने भारत के टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम का बचाव करते हुए कहा है कि देश को टेक्सटाइल कचरे का “डंपिंग ग्राउंड” बताना भ्रामक और तथ्यों से परे है। टेक्सटाइल मंत्रालय ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े टेक्सटाइल रिकवरी और रीसाइक्लिंग नेटवर्क में शामिल है, जिसे लंबे समय से चले आ रहे पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण तंत्र का समर्थन प्राप्त है।
मंत्रालय ने कहा कि हाल ही में कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में पानीपत जैसे टेक्सटाइल क्लस्टरों को केंद्र में रखकर पर्यावरण और श्रमिक सुरक्षा संबंधी चिंताओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया, जबकि सेक्टर में सस्टेनेबिलिटी, नियामकीय सुधार और नई तकनीकों के उपयोग की दिशा में हुई प्रगति को नजरअंदाज किया गया।
सरकार ने स्पष्ट कहा कि भारतीय टेक्सटाइल उद्योग को पर्यावरण के प्रति लापरवाह या संरचनात्मक रूप से शोषणकारी बताना गलत है और इससे इस क्षेत्र में जारी सुधारात्मक प्रयासों और सस्टेनेबिलिटी आधारित पहलों की अनदेखी होती है।
मंत्रालय के अनुसार, भारत में हर वर्ष लगभग 7,073 किलो टन टेक्सटाइल कचरा उत्पन्न होता है। “मैपिंग ऑफ टेक्सटाइल वेस्ट वैल्यू चेन इन इंडिया 2026” अध्ययन का हवाला देते हुए सरकार ने बताया कि विनिर्माण प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न होने वाले प्री-कंज्यूमर टेक्सटाइल वेस्ट का करीब 97 प्रतिशत हिस्सा पुनर्चक्रित किया जाता है।
सरकार ने उन दावों को भी खारिज किया कि भारत पश्चिमी देशों के फास्ट फैशन कचरे का प्रमुख ठिकाना बन रहा है। मंत्रालय के अनुसार, देश में प्रबंधित किए जाने वाले लगभग 7.8 मिलियन टन टेक्सटाइल कचरे में 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा घरेलू स्तर पर उत्पन्न होता है, जबकि आयातित कचरे की हिस्सेदारी केवल लगभग 7 प्रतिशत है।
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए मंत्रालय ने कहा कि टेक्सटाइल वेस्ट इकोसिस्टम से देश में प्रतिवर्ष लगभग 22,000 करोड़ रुपये की आर्थिक गतिविधि उत्पन्न होती है।
सरकार ने आईआईटी दिल्ली के शोधकर्ताओं के अध्ययन का भी उल्लेख किया, जिसमें पानीपत क्लस्टर के आंकड़ों के आधार पर पाया गया कि टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग से वर्जिन फाइबर उत्पादन की तुलना में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और जीवाश्म ईंधन उपयोग जैसे पर्यावरणीय प्रभावों में लगभग 40 प्रतिशत तक कमी आती है।
हालांकि सरकार ने यह स्वीकार किया कि पोस्ट-कंज्यूमर वेस्ट मैनेजमेंट, असंगठित इकाइयों और श्रमिक सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं, लेकिन उद्योग लगातार अधिक औपचारिक व्यवस्था, स्वच्छ तकनीक और बेहतर पर्यावरणीय अनुपालन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
मंत्रालय ने कहा कि टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग इकाइयां मौजूदा पर्यावरण और श्रम कानूनों के तहत संचालित होती हैं तथा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) सहित विभिन्न नियामक एजेंसियां नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं।