भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में, टैरिफ रियायतों पर टिकी उम्मीदें
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता अंतिम चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। हालांकि, इसकी सफलता काफी हद तक अमेरिका की Section 301 जांच और उससे जुड़े संभावित टैरिफ उपायों में भारत को मिलने वाली राहत पर निर्भर करेगी। यह जानकारी भारत सरकार के एक सूत्र ने सोमवार को दी।
दक्षिण एवं मध्य एशिया मामलों के लिए अमेरिकी सहायक व्यापार प्रतिनिधि ब्रेंडन लिंच के नेतृत्व में एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल मंगलवार से नई दिल्ली में भारतीय अधिकारियों के साथ तीन दिवसीय वार्ता करेगा। इस दौरान दोनों पक्ष व्यापार समझौते के लंबित मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
भारत और अमेरिका फरवरी में एक प्रारंभिक व्यापार समझौते पर सहमत हुए थे, लेकिन बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ उपायों और उनसे जुड़े कानूनी घटनाक्रमों के कारण बातचीत की गति धीमी पड़ गई। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने Trade Act, 1974 की Section 301 के तहत भारत सहित कई देशों की व्यापारिक नीतियों की जांच शुरू की और 10 प्रतिशत का समान टैरिफ लागू किया।
भारतीय सूत्र के अनुसार, नई दिल्ली इस जांच से उत्पन्न संभावित टैरिफ प्रभावों पर चर्चा करेगी और राहत की मांग करेगी। भारत का उद्देश्य ऐसी प्रतिस्पर्धी टैरिफ दर हासिल करना है, जिससे उसे अन्य एशियाई विनिर्माण केंद्रों के मुकाबले बढ़त मिल सके।
सूत्र ने कहा कि यदि प्रस्तावित शर्तें निष्पक्ष, संतुलित और दोनों पक्षों के हितों के अनुरूप होती हैं, तो समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है। भारत को उम्मीद है कि उसे बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अधिक अनुकूल टैरिफ व्यवस्था मिलेगी।
सूत्रों के मुताबिक, समझौते की रूपरेखा तय होने के बाद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर भारत का दौरा कर सकते हैं। इसे दोनों देशों के बीच बढ़ती प्रगति का संकेत माना जा रहा है।
पिछले सप्ताह भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा था कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता आने वाले कुछ सप्ताहों या महीनों में संपन्न होने की संभावना है।
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