कपास की ऊंची कीमतों ने बढ़ाया आयात का दबाव

2025-04-19 20:02:37
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भारत में महंगे कपास के चलते आयात में तेज़ बढ़ोतरी


वैश्विक बाजार की तुलना में भारतीय कपास के ऊंचे दामों के कारण देश में कपास आयात में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल रही है। घरेलू उत्पादन में कमी और बढ़ती खपत के चलते भारत को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ रहा है।


मुख्य कारण

ऊंची घरेलू कीमतें
भारतीय कपास की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार से अधिक होने के कारण आयात सस्ता विकल्प बनता जा रहा है, जिससे आयात में तेजी आई है।


आयात में तेज़ उछाल
हाल के महीनों में कपास आयात में बड़ा उछाल देखा गया है। जनवरी 2025 में आयात बढ़कर 184.64 मिलियन डॉलर हो गया, जबकि जनवरी 2024 में यह केवल 19.62 मिलियन डॉलर था। अगस्त 2024 में यह आंकड़ा 104 मिलियन डॉलर था।

उत्पादन में गिरावट
देश में कपास उत्पादन में कमी की आशंका है, जिससे घरेलू आपूर्ति दबाव में है और आयात की जरूरत बढ़ रही है।


घरेलू मांग का दबाव
टेक्सटाइल उद्योग की उच्च मांग के कारण उपलब्ध उत्पादन पर्याप्त नहीं है, जिससे आयात पर निर्भरता बढ़ी है।


वैश्विक परिप्रेक्ष्य

वैश्विक कपास बाजार का आकार 2024 में लगभग 41.78 बिलियन डॉलर था, जो 2025 में बढ़कर 42.92 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इस बढ़ती मांग का भी भारत के आयात पर प्रभाव पड़ रहा है।


आयात का अनुमान

विपणन वर्ष 2024-25 में भारत का कपास आयात लगभग 2.5 मिलियन गांठ तक पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष 1.75 मिलियन गांठ था।


निष्कर्ष

ऊंची घरेलू कीमतें, घटता उत्पादन और मजबूत मांग—इन तीनों कारकों ने मिलकर भारत को कपास आयात बढ़ाने के लिए मजबूर किया है। आने वाले समय में भी यदि उत्पादन में सुधार नहीं होता, तो आयात का रुझान जारी रह सकता है।


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