भारत के टेक्सटाइल सेक्टर में लंबे ग्रोथ साइकल की उम्मीद: जेफ़रीज़
भारत का टेक्सटाइल सेक्टर आने वाले कई वर्षों तक चलने वाले ग्रोथ साइकल में प्रवेश कर सकता है। ग्लोबल ब्रांड्स की चीन से बाहर सोर्सिंग बढ़ाने की रणनीति और सप्लाई चेन में विविधता से भारत के लिए एक्सपोर्ट और मार्केट शेयर बढ़ाने के बड़े अवसर बन रहे हैं। हालांकि, जेफ़रीज़ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मैन-मेड फाइबर (MMF) की ओर बदलाव अब भी सेक्टर के लिए एक प्रमुख संरचनात्मक चुनौती बना हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल टेक्सटाइल और अपैरल मार्केट का आकार 900 अरब डॉलर से अधिक है, जिसमें अपैरल की हिस्सेदारी करीब 60% है। भारत को फाइबर-टू-फैशन इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम, करीब 37 अरब डॉलर के एक्सपोर्ट बेस, कच्चे माल की उपलब्धता, कुशल श्रमबल और सरकार की सहायक नीतियों से फायदा मिल सकता है।
जेफ़रीज़ के अनुसार, प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार और ग्लोबल सप्लाई चेन के पुनर्गठन से भारत के लिए एक्सपोर्ट बढ़ाने और मार्केट शेयर हासिल करने का कई वर्षों तक चलने वाला अवसर मौजूद है। हालांकि, भारत का एक्सपोर्ट मिक्स अभी भी कॉटन-आधारित उत्पादों पर अधिक निर्भर है, जबकि वैश्विक मांग तेजी से MMF अपैरल, स्पोर्ट्सवियर और एथलीज़र की ओर बढ़ रही है।
होम टेक्सटाइल को भी एक आकर्षक ग्रोथ सेगमेंट माना जा रहा है। यह ग्लोबल टेक्सटाइल और अपैरल ट्रेड का करीब 7-10% हिस्सा है। भारत की अमेरिका में बेड लिनन और तौलिया जैसी प्रमुख होम टेक्सटाइल कैटेगरी में करीब 45-60% हिस्सेदारी है, जबकि यूके और यूरोपीय संघ में इसकी हिस्सेदारी करीब 5-25% है। इससे इन बाजारों में आगे बढ़ने की पर्याप्त गुंजाइश है।
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) भी एक्सपोर्ट ग्रोथ को गति दे सकते हैं। जुलाई 2026 से लागू भारत-यूके FTA और 2027 से संभावित भारत-EU FTA करीब 220 अरब डॉलर के टेक्सटाइल और अपैरल इंपोर्ट मार्केट में भारत की टैरिफ पहुंच बेहतर कर सकते हैं।
हालांकि, सीमित FTA कवरेज, अपेक्षाकृत अधिक लॉजिस्टिक्स और कंप्लायंस लागत, कम मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और MMF सेगमेंट में कमजोर मौजूदगी भारत की प्रमुख चुनौतियां बनी हुई हैं।
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