सूखे से करीमनगर में कपास की फसल प्रभावित, 50% तक उत्पादन घटने की आशंका
करीमनगर: बारिश की कमी और लगातार सूखे के कारण करीमनगर जिले में कपास की फसल की बढ़त प्रभावित हो रही है। किसानों को आशंका है कि यदि अगले दस दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो पैदावार में 50 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है।
अल नीनो के प्रभाव के चलते कम बारिश की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार और कृषि विभाग ने किसानों से इस सीजन में धान की खेती से बचने और सिंचित सूखी (ID) फसलों की खेती करने की अपील की थी। हालांकि, इन अपीलों के बावजूद बड़े पैमाने पर धान की खेती की गई। जिन किसानों के पास जल स्रोत थे, उन्होंने धान की खेती की, जबकि अन्य किसानों ने कपास और दूसरी ID फसलें उगाईं। इस वर्ष जिले में करीब 46,000 एकड़ में कपास की बुवाई हुई है।
किसानों के अनुसार, बारिश नहीं होने के कारण कपास के बीजों के अंकुरण में देरी हुई और बाद में भी पौधों की बढ़त प्रभावित होती रही। रामाडुगु मंडल के वेदिरा गांव के किसान मीसाला लचैया ने बताया कि उन्होंने जून के दूसरे सप्ताह में कपास बोई थी, लेकिन अंकुरण जुलाई के अंत में हुआ। उन्होंने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में इस समय तक पौधों की शाखाएं अधिक लंबी हो जानी चाहिए थीं। कम बढ़त के कारण फूलों की संख्या और अंततः पैदावार प्रभावित होने की आशंका है।
लचैया की दो एकड़ फसल में लीफ़हॉपर का प्रकोप भी देखा गया है।
गोलिरामायाहपल्ली के किसान नुगोंडा मल्लेशम ने कहा कि अगले दस दिन फसल के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र, जम्मीकुंटा के प्रमुख एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एन. वेंकटेश्वर राव ने कहा कि सूखे में पौधे पोषक तत्वों को पर्याप्त मात्रा में ग्रहण नहीं कर पाते। लंबे समय तक नमी की कमी रहने पर पैदावार घट सकती है। कमजोर पौधों पर कीटों के हमले का खतरा भी बढ़ जाता है।
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