कमजोर मानसून से खरीफ फसलों पर संकट, महाराष्ट्र में बुआई धीमी
2026-07-21 12:04:56
बारिश की कमी से कई राज्यों में खरीफ फसल पर संकट, महाराष्ट्र में बुआई घटी, गुजरात-तेलंगाना के किसान चिंतित
देश के कई राज्यों में मानसून की सुस्त रफ्तार और लंबे ड्राई स्पेल ने खरीफ फसलों पर संकट खड़ा कर दिया है। तेलंगाना, महाराष्ट्र और गुजरात के किसानों को कपास, सोयाबीन, मूंगफली और अन्य खरीफ फसलों के नुकसान की चिंता सताने लगी है। लगातार बारिश नहीं होने से खेतों में नमी तेजी से घट रही है, जिससे फसलों की बढ़वार प्रभावित हो रही है और किसानों की लागत बढ़ने का खतरा भी बढ़ गया है।
तेलंगाना के आदिलाबाद जिले में किसानों का कहना है कि मानसून देर से पहुंचने और जुलाई में लंबे समय तक बारिश नहीं होने से कपास, सोयाबीन और लाल चने की फसलों की ग्रोथ रुक गई है। हल्की बूंदाबांदी होने के बावजूद खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन पाई है। जैनद मंडल के अडा गांव के किसान मोरा किष्टू ने बताया कि जून के आखिर में शुरुआती बारिश के बाद उन्होंने 20 एकड़ में कपास की बुआई की थी, लेकिन अब अच्छी पैदावार के लिए समय पर बारिश बेहद जरूरी है। जिले में इस खरीफ सीजन में करीब 4.25 लाख एकड़ में कपास की खेती हुई है, लेकिन सूखे जैसे हालात से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
महाराष्ट्र में भी अल नीनो के असर और कमजोर मानसून के कारण खरीफ बुआई की रफ्तार धीमी पड़ गई है। कृषि विभाग के अनुसार 15 जुलाई 2026 तक राज्य के 144.36 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में केवल 86.92 लाख हेक्टेयर यानी 60 प्रतिशत क्षेत्र में ही बुआई हो सकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 84 प्रतिशत था। कई इलाकों में बारिश की कमी से किसानों को दोबारा बुआई करनी पड़ रही है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ रही है। राज्य में सबसे अधिक बुआई सोयाबीन और कपास की हुई है, जबकि मराठवाड़ा, विदर्भ और कोंकण सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं।
गुजरात के भावनगर जिले के जेसर और आसपास के गांवों में भी पिछले 15 से 20 दिनों से पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। शुरुआती अच्छी बारिश के बाद किसानों ने कपास और मूंगफली की बुआई पूरी कर ली थी, लेकिन अब खेतों में नमी की कमी से पौधे सूखने लगे हैं। जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा नहीं है, वे सबसे अधिक प्रभावित हैं। किसानों का कहना है कि यदि अगले चार-पांच दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो कपास और मूंगफली की फसलों को भारी नुकसान हो सकता है। तीनों राज्यों के किसान अब समय पर अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि आने वाले दिनों की वर्षा ही खरीफ फसलों की स्थिति तय करेगी।