साप्ताहिक मॉनसून ट्रैकर: बारिश की कमी से खरीफ बुआई 22.7% घटी, कपास-तिलहन सबसे अधिक प्रभावित
देशभर में मॉनसून की धीमी और असमान प्रगति का असर खरीफ फसलों की बुआई पर साफ दिखाई देने लगा है। बारिश की कमी और जलाशयों में घटते जलस्तर के कारण धान, कपास, तिलहन और दलहन जैसी प्रमुख फसलों की बुआई पिछले वर्ष की तुलना में काफी पीछे चल रही है। यदि जुलाई में भी पर्याप्त बारिश नहीं होती है, तो कृषि उत्पादन और खाद्य महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 25 जून 2026 तक खरीफ फसलों की बुआई 182.71 लाख हेक्टेयर में हुई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 236.47 लाख हेक्टेयर थी। यानी कुल बुआई क्षेत्र में 53.76 लाख हेक्टेयर या 22.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। दूसरी ओर, 29 जून तक देश में वर्षा की कमी 43 प्रतिशत तक पहुंच गई। देश के 48 प्रतिशत हिस्से में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि 26 प्रतिशत क्षेत्र 'अत्यधिक वर्षा कमी' की श्रेणी में है।
सबसे अधिक असर तिलहन फसलों पर पड़ा है। तिलहन का रकबा पिछले वर्ष के 36.40 लाख हेक्टेयर से घटकर 16.98 लाख हेक्टेयर रह गया, यानी 19.42 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई। इसमें सोयाबीन की बुआई 19.97 लाख हेक्टेयर से घटकर 6.92 लाख हेक्टेयर रह गई, जबकि मूंगफली का रकबा 15.29 लाख हेक्टेयर से घटकर 8.87 लाख हेक्टेयर पर आ गया।
कपास की बुआई भी प्रभावित हुई है। इसका रकबा 45.36 लाख हेक्टेयर से घटकर 29.66 लाख हेक्टेयर रह गया, यानी 15.70 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई। धान का रकबा 34.41 लाख हेक्टेयर से घटकर 25.75 लाख हेक्टेयर हो गया, जबकि दलहन की बुआई 21.46 लाख हेक्टेयर से घटकर 14.92 लाख हेक्टेयर रह गई। वहीं, मोटे अनाज (श्री अन्न) का रकबा भी 36.07 लाख हेक्टेयर से घटकर 31.84 लाख हेक्टेयर रह गया।
बारिश की कमी के साथ जलाशयों का घटता जलस्तर भी चिंता बढ़ा रहा है। देश के 166 प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण उनकी कुल क्षमता का केवल 26.4 प्रतिशत है, जबकि पिछले वर्ष इसी समय यह 36 प्रतिशत था। दक्षिण भारत में जलाशयों का जलस्तर क्षमता के केवल 20.8 प्रतिशत पर है। कर्नाटक में यह 48.6 प्रतिशत से घटकर 14.7 प्रतिशत और तमिलनाडु में 81 प्रतिशत से घटकर 34.3 प्रतिशत रह गया है। ओडिशा के जलाशयों में भी जलस्तर केवल 15.3 प्रतिशत है।
हालांकि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और विदर्भ में अगले कुछ दिनों के दौरान भारी बारिश की संभावना जताई है, लेकिन यदि जुलाई में भी सामान्य से कम वर्षा रहती है, तो खरीफ उत्पादन, किसानों की आय तथा दालों, खाद्य तेलों और कपास से जुड़े बाजारों पर दबाव बढ़ सकता है।