खरीफ बुवाई में तेजी, कपास और तिलहन का रकबा अब भी पिछले साल से कम

2026-07-15 13:16:15
First slide


खरीफ़ बुआई में तेजी, लेकिन कपास और तिलहन का रकबा अब भी पिछले साल से काफी कम

दक्षिण-पश्चिम मानसून के सक्रिय होने से देशभर में खरीफ़ फसलों की बुआई में तेजी आई है, लेकिन कपास और तिलहन की बुआई अभी भी पिछले वर्ष की तुलना में पीछे चल रही है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा 10 जुलाई 2026 तक जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, हाल के सप्ताह में बारिश बढ़ने से बुआई की रफ्तार में सुधार हुआ है, फिर भी इन दोनों प्रमुख नकदी फसलों का रकबा पिछले साल के स्तर तक नहीं पहुंच पाया है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, तिलहन की बुआई 117.83 लाख हेक्टेयर (11.78 मिलियन हेक्टेयर) में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 149.18 लाख हेक्टेयर थी। यानी तिलहन का कुल रकबा 31.35 लाख हेक्टेयर या लगभग 21 प्रतिशत कम है। तिलहन फसलों में सोयाबीन की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही, जिसकी बुआई 90.51 लाख हेक्टेयर में दर्ज की गई। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 107.72 लाख हेक्टेयर थी, यानी सोयाबीन का रकबा 17.21 लाख हेक्टेयर घटा है। वहीं मूंगफली का रकबा भी 35.45 लाख हेक्टेयर से घटकर 23.40 लाख हेक्टेयर रह गया है।

कपास की बुआई 79.54 लाख हेक्टेयर (7.95 मिलियन हेक्टेयर) में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 93.95 लाख हेक्टेयर थी। इस प्रकार कपास का रकबा 14.41 लाख हेक्टेयर, यानी लगभग 15.3 प्रतिशत, कम दर्ज किया गया है। हालांकि महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और तेलंगाना जैसे प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में हाल की बारिश से बुआई में तेजी आई है, लेकिन कुल क्षेत्रफल अब भी पिछले वर्ष से पीछे बना हुआ है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, अगले छह से सात दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों, पश्चिम-मध्य भारत और दक्षिण प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में वर्षा की गतिविधियां अपेक्षाकृत कमजोर रहने की संभावना है। ऐसे में वर्षा पर निर्भर इलाकों में कपास और तिलहन की बुआई की गति प्रभावित हो सकती है।

दूसरी ओर, जल संसाधनों की स्थिति में सुधार हुआ है। सरकार की निगरानी वाले 166 प्रमुख जलाशयों में 9 जुलाई तक जल भंडारण बढ़कर उनकी लाइव स्टोरेज क्षमता के 32.38 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो एक सप्ताह पहले 26 प्रतिशत था। बेहतर जल उपलब्धता से सिंचाई वाले क्षेत्रों में फसलों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई के दूसरे पखवाड़े में मानसून की सक्रियता कपास और तिलहन की बुआई और संभावित उत्पादन के लिए निर्णायक रहेगी। यदि बारिश सामान्य रहती है तो बुआई का अंतर और कम हो सकता है, जबकि लंबे समय तक कमजोर मानसून इन दोनों फसलों के उत्पादन पर दबाव बढ़ा सकता है।


और पढ़ें :- राजस्थान ने 2030 तक वस्त्र निर्यात चार गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा, विशेष एक्शन प्लान तैयार







Regards
Team Sis
Any query plz call 9111677775

https://wa.me/919111677775

Application Download
Whatsapp Contact