सूखे जैसे हालात से महाराष्ट्र में बढ़ी चिंता, किसानों के लिए तुरंत राहत का ऐलान
महाराष्ट्र के कई हिस्सों में कमजोर मानसून और लंबे समय तक बारिश में कमी के कारण सूखे जैसे हालात बन गए हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि राज्य सरकार केंद्र से आर्थिक सहायता मिलने का इंतजार किए बिना प्रभावित किसानों को तत्काल राहत देगी। उन्होंने बताया कि सूखा-निवारण से जुड़े उपायों की पहली अधिसूचना शनिवार तक जारी की जाएगी।
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि फसल नुकसान का आकलन करने के लिए 23 सितंबर से पंचनामे शुरू किए जाएंगे। पहले यह प्रक्रिया 5 अक्टूबर से शुरू होने वाली थी, लेकिन नुकसान की गंभीरता को देखते हुए इसे आगे कर दिया गया है। मौजूदा स्थिति में सोयाबीन, मक्का और कपास की फसलों को बड़ा नुकसान हुआ है। इसके अलावा कोंकण क्षेत्र में धान की फसल भी प्रभावित हुई है।
राहत के लिए कैबिनेट उपसमिति गठित
किसानों को राहत देने और स्थिति के आधार पर तेजी से फैसले लेने के लिए सरकार ने राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे की अध्यक्षता में कैबिनेट उपसमिति गठित की है। समिति को कैबिनेट के समान अधिकार दिए गए हैं और मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल इसके सचिव होंगे। समिति हर सप्ताह प्रभावित क्षेत्रों से मिलने वाली रिपोर्ट की समीक्षा करेगी। हालांकि, बड़े नीतिगत फैसले राज्य मंत्रिमंडल के स्तर पर ही लिए जाएंगे।
प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे मुख्यमंत्री और मंत्री
फडणवीस ने कहा कि वह 23 सितंबर से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे। मंत्री और जनप्रतिनिधि भी प्रभावित इलाकों में जाकर किसानों से बातचीत करेंगे और जमीनी स्थिति का जायजा लेंगे। पंचनामों और फसल नुकसान के सर्वेक्षण के आधार पर आगे की राहत प्रक्रिया तय की जाएगी।
राज्य सरकार केंद्र से आर्थिक सहायता लेने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के नियमों के तहत अलग प्रस्ताव तैयार करेगी। इसका मतलब है कि केंद्र से सहायता अभी मंजूर नहीं हुई है। सरकार ने पीने के पानी और पशुओं के चारे को प्राथमिकता देने की बात कही है। स्थानीय निकायों के साथ समन्वय कर अगले 7 से 8 महीनों के लिए पानी और चारे की व्यवस्था की योजना बनाई जाएगी।
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