महाराष्ट्र में सूखा: फसल नुकसान के बीच सरकार ने रोजगार और पलायन रोकने के उपाय तेज किए
महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति के बीच कई इलाकों में फसलों को नुकसान की खबरें सामने आ रही हैं। राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने, पलायन रोकने और महिलाओं तथा बच्चों की सुरक्षा के लिए नए उपायों की घोषणा की है।
सरकार ने सोमवार, 5 अक्टूबर को बताया कि वह रोजगार गारंटी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक टास्क फोर्स बनाएगी। इसका उद्देश्य योजना के तहत अधिक मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना और सूखे से प्रभावित परिवारों के पलायन को रोकना है।
महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने सूखे के दौरान बाल विवाह के मामलों में बढ़ोतरी की आशंका जताई। राज्य सरकार ने स्थानीय प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों में जागरूकता अभियान और आउटरीच कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि महिलाओं और परिवारों, विशेष रूप से पलायन करने वाले परिवारों तक पहुंच बनाई जा सके।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि आंगनवाड़ी केंद्रों में पर्याप्त पानी और भोजन की नियमित आपूर्ति बनी रहे। सरकार के अनुसार, सूखे के कारण पलायन करने वाले परिवारों के बच्चों को सरकारी हॉस्टल और चाइल्ड केयर होम में आश्रय दिया जाएगा।
विदर्भ में कपास और धान की फसल को नुकसान
मराठवाड़ा और सोलापुर के अलावा विदर्भ के कई हिस्सों में भी फसलों को नुकसान की खबर है। विदर्भ के कपास उत्पादक जिलों में कपास की फसल प्रभावित हुई है। किसान केंद्र सरकार से मांग कर रहे हैं कि 31 अक्टूबर के बाद कपास के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति आगे नहीं बढ़ाई जाए।
किसानों को आशंका है कि सस्ता आयातित कपास घरेलू कीमतों पर दबाव बढ़ा सकता है। विदर्भ के भंडारा जिले में भी धान की फसल को भारी नुकसान की खबर है। जिले में उगाई जाने वाली फसलों में धान की हिस्सेदारी लगभग 90% है।
पिछले साल की तुलना में जल भंडारण कम
5 अक्टूबर तक महाराष्ट्र में जल भंडारण 74.29% था, जबकि पिछले साल इसी तारीख को यह 89.22% था। मराठवाड़ा और विदर्भ सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं।
कम जल भंडारण और फसल नुकसान के बीच राज्य के किसान सूखे के प्रभाव का सामना कर रहे हैं। राज्य सरकार रोजगार बढ़ाने, पलायन रोकने और प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए कदम उठा रही है।
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