महाराष्ट्र में बारिश की कमी से कपास की फसल प्रभावित, उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका
महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ के कई कपास उत्पादक क्षेत्रों में बारिश की कमी और अधिक तापमान के कारण फसल प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं। मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं होने से कपास के पौधों की बढ़वार प्रभावित हुई है। कई स्थानों पर कपास के टिंडे समय से पहले फटने की जानकारी भी मिली है। इससे किसानों को उत्पादन में गिरावट और आर्थिक नुकसान की आशंका सता रही है।
बारिश की कमी से फसल की बढ़वार प्रभावित
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अगस्त और सितंबर के दौरान कुछ कपास उत्पादक क्षेत्रों में लंबे समय तक पर्याप्त बारिश नहीं हुई। इसके कारण मिट्टी में नमी की कमी हो गई और कपास के टिंडों का विकास प्रभावित हुआ। अक्टूबर में अधिक तापमान के बीच कुछ क्षेत्रों में सामान्य समय से पहले ही कपास की तुड़ाई शुरू होने की खबरें हैं।
किसानों के अनुसार, पर्याप्त पानी नहीं मिलने से कई खेतों में कपास के पौधे सूखने लगे हैं। इससे आगामी तुड़ाई में भी उत्पादन कम रहने की आशंका जताई जा रही है।
प्रति एकड़ उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका
मराठवाड़ा के जालना जिले के मंथा तालुका स्थित अंभोरा जहागीर गांव के किसान नारायण अटोले के अनुसार, उनके खेत में सामान्य वर्षों में प्रति एकड़ आठ से नौ क्विंटल कपास का उत्पादन होता था। हालांकि, इस वर्ष बारिश की कमी के कारण केवल दो से तीन क्विंटल उत्पादन होने का अनुमान है।
वहीं, कुछ अन्य प्रभावित क्षेत्रों के किसानों ने पहली तुड़ाई में प्रति एकड़ एक से डेढ़ क्विंटल कपास मिलने की बात कही है। हालांकि, पहली तुड़ाई में प्राप्त कपास की मात्रा पूरे सीजन के अंतिम उत्पादन को नहीं दर्शाती है।
खेती की लागत निकालना मुश्किल
कपास उत्पादन घटने की आशंका से किसानों की आर्थिक चिंता बढ़ गई है। बीज, खाद, कीटनाशक, छिड़काव और मजदूरी पर खर्च करने के बावजूद अपेक्षित पैदावार नहीं मिलने से खेती की लागत निकालना मुश्किल हो सकता है।
प्रभावित किसानों ने राज्य सरकार से खेतों का सर्वेक्षण कराने, फसल नुकसान का उचित आकलन करने और पात्र किसानों को जल्द आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
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