‘फार्म टू फॉरेन’ पहल से वैश्विक बाजारों तक पहुंचेगी महाराष्ट्र की कपास
महाराष्ट्र में उत्पादित कपास और उससे बने उत्पादों को सीधे विदेशी बाजारों तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ‘फार्म टू फॉरेन’ पहल को बढ़ावा दे रही है। सरकार का लक्ष्य महाराष्ट्र को वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करना है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि ‘फार्म टू फॉरेन’ अवधारणा के तहत कपास उत्पादन से लेकर वैश्विक फैशन बाजार तक की पूरी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया जाएगा।
एसोचैम (ASSOCHAM) की ओर से जियो वर्ल्ड सेंटर में आयोजित ‘फार्म टू फॉरेन कॉन्क्लेव 2026’ में शिंदे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ‘5F’ अवधारणा पर काम कर रही है। इसके तहत ‘फार्म टू फाइबर’ (खेत से रेशा), ‘फाइबर टू फैक्ट्री’ (रेशे से कारखाना), ‘फैक्ट्री टू फैशन’ (कारखाने से फैशन) और ‘फैशन टू फॉरेन’ (फैशन से विदेश) जैसे चरणों के माध्यम से कृषि और कपड़ा क्षेत्र को वैश्विक बाजार से जोड़ा जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य महाराष्ट्र की कपास, रेशम, जूट और फलों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय ब्रांड के रूप में स्थापित करना है।
नागपुर में पीएम मित्रा (PM MITRA) पार्क और अमरावती टेक्सटाइल क्लस्टर महाराष्ट्र को देश के प्रमुख टेक्सटाइल हब के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा इचलकरंजी, सोलापुर और भिवंडी जैसे प्रमुख कपड़ा केंद्रों में रेडीमेड गारमेंट क्लस्टर स्थापित किए जा रहे हैं।
शिंदे ने कहा कि सरकार का जोर केवल उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि उद्योग को ‘हरित, डिजिटल और पारदर्शी’ बनाने पर भी है। इसके जरिए उत्पादन, प्रसंस्करण, विनिर्माण और निर्यात को एकीकृत करते हुए महाराष्ट्र के कृषि और कपड़ा उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
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