महाराष्ट्र में खरीफ बुवाई 2026 का 74% क्षेत्र पूरा, सोयाबीन और कपास किसानों की पहली पसंद
2026-07-27 11:43:40
महाराष्ट्र खरीफ बुवाई 2026: 74% रकबे में बुवाई पूरी, सोयाबीन और कपास किसानों की पहली पसंद, दालों की खेती घटी
महाराष्ट्र में खरीफ सीजन 2026 की बुवाई ने जुलाई के दूसरे पखवाड़े में हुई अच्छी बारिश के बाद रफ्तार पकड़ ली है। कृषि विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य के औसत 1.44 करोड़ हेक्टेयर खरीफ क्षेत्र में से 1.06 करोड़ हेक्टेयर यानी करीब 74 प्रतिशत रकबे में बुवाई पूरी हो चुकी है। शुरुआती दौर में कमजोर मानसून के कारण किसानों में अनिश्चितता थी, लेकिन समय पर हुई बारिश से अधिकांश क्षेत्रों में बुवाई अंतिम चरण में पहुंच गई है।
क्षेत्रवार स्थिति पर नजर डालें तो अमरावती संभाग 89 प्रतिशत बुवाई के साथ सबसे आगे है। इसके बाद छत्रपति संभाजीनगर (79%), नासिक (78%), लातूर (77%), कोल्हापुर (63%), नागपुर और पुणे (61-61%) का स्थान है। वहीं, कम बारिश और धान पर अधिक निर्भरता के कारण कोंकण संभाग में अब तक केवल 15 प्रतिशत बुवाई ही हो सकी है।
इस वर्ष किसानों का झुकाव नकदी फसलों की ओर अधिक दिखाई दिया है। सोयाबीन की बुवाई 88 प्रतिशत और कपास की 82 प्रतिशत पूरी हो चुकी है। राज्य में करीब 41.64 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की खेती की गई है, जबकि कपास के बेहतर बाजार भाव और सोयाबीन की अच्छी कीमतों की उम्मीद ने किसानों को इन फसलों की ओर आकर्षित किया है। इसके विपरीत दलहनों की बुवाई अपेक्षा से कम रही है। तूर, मूंग और उड़द की बुवाई क्रमशः 77, 56 और 59 प्रतिशत तक पहुंची है, लेकिन कुल दलहन क्षेत्र केवल 64 प्रतिशत ही कवर हो पाया है।
धान की बुवाई भी अभी धीमी है। कोंकण और पूर्वी विदर्भ में बारिश की कमी के कारण पुनर्बुवाई का कार्य केवल 24 प्रतिशत तक ही पहुंच सका है। वहीं, कुछ जिलों में दोबारा बुवाई, बीज और उर्वरकों की कमी तथा मौसम की अनिश्चितता किसानों के लिए चुनौती बनी हुई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि देर से बोई गई फसलों की कटाई अक्टूबर-नवंबर में होगी, ऐसे में वापसी की बारिश उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को प्रभावित कर सकती है। विभाग ने उम्मीद जताई है कि जुलाई के अंत तक शेष क्षेत्र में भी बुवाई पूरी हो जाएगी।