नंदुरबार में बारिश की कमी से कपास की फसल पर संकट, किसानों की बढ़ी चिंता
नंदुरबार जिले में इस वर्ष मानसून की कमजोर शुरुआत ने कपास उत्पादक किसानों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। खरीफ सीजन शुरू होने के बाद भी जिले में पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेतों में नमी की भारी कमी देखी जा रही है। इसका सीधा असर कपास की फसल पर पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में पौधों की वृद्धि रुक गई है, जबकि कुछ स्थानों पर फसल मुरझाने लगी है। ऐसे में किसानों को आशंका है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो इस वर्ष उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।
किसानों ने कपास की बुवाई के लिए बीज, उर्वरक, कीटनाशक और अन्य कृषि कार्यों पर हजारों रुपये का निवेश किया है। लेकिन अपेक्षित वर्षा नहीं होने के कारण यह निवेश जोखिम में दिखाई दे रहा है। मिट्टी में लगातार घटती नमी से पौधों का विकास प्रभावित हो रहा है, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों पर नकारात्मक असर पड़ने की संभावना बढ़ गई है।
बारिश की कमी के कारण किसानों को फसल बचाने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़ रहे हैं। वे निराई-गुड़ाई, कीट नियंत्रण और अन्य कृषि प्रबंधन कार्यों पर अतिरिक्त खर्च कर रहे हैं। इससे उनकी आर्थिक परेशानियां और बढ़ गई हैं। वहीं, कम नमी के कारण कपास की फसल में रोगों और कीटों के प्रकोप का खतरा भी बढ़ रहा है, जिससे नुकसान की आशंका और गहरा गई है।
नंदुरबार जिले में खरीफ मौसम के दौरान बड़े पैमाने पर कपास की खेती की जाती है और हजारों परिवारों की आजीविका इसी फसल पर निर्भर है। जिन किसानों ने पहले ही बुवाई कर दी है, वे फसल को बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं, जबकि जिन किसानों ने अभी तक बुवाई नहीं की है, वे बारिश का इंतजार करते हुए आगे की रणनीति तय करने में जुटे हैं।
फिलहाल जिले के किसानों की उम्मीदें आने वाले दिनों में अच्छी बारिश पर टिकी हैं। यदि समय रहते पर्याप्त वर्षा होती है, तो फसल को राहत मिल सकती है और उत्पादन में सुधार की संभावना बनेगी। लेकिन यदि बारिश में और देरी होती है, तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में इस वर्ष कपास की खेती का भविष्य पूरी तरह मानसून की स्थिति पर निर्भर नजर आ रहा है।