उत्तर भारत में कपास रकबा 22% घटा, धान की ओर बढ़ा रुझान
2026-06-18 11:54:15
उत्तर भारत में कपास का रकबा घटा, किसानों का झुकाव धान की ओर
उत्तर भारत में इस खरीफ सीजन के दौरान कपास की खेती का रकबा करीब 22 प्रतिशत घट गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसानों का रुझान अब धान की खेती की ओर बढ़ रहा है, क्योंकि इसमें सरकारी खरीद की गारंटी और अपेक्षाकृत बेहतर आय की संभावना है।
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में इस वर्ष लगभग 9 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल यह रकबा 11.56 लाख हेक्टेयर था। 12 जून तक देशभर में कपास का कुल रकबा 9.53 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया, जो एक वर्ष पहले 13.19 लाख हेक्टेयर था। हालांकि गुजरात, कर्नाटक और राजस्थान के कुछ हिस्सों में अभी भी बुवाई जारी है।
राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो पंजाब में कपास का रकबा 1.19 लाख हेक्टेयर से घटकर 0.80 लाख हेक्टेयर रह गया है। हरियाणा में यह 3.94 लाख हेक्टेयर से घटकर 2.92 लाख हेक्टेयर और राजस्थान में 6.43 लाख हेक्टेयर से घटकर 5.28 लाख हेक्टेयर हो गया है। हालांकि कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) की क्रॉप कमेटी के चेयरमैन अतुल गनात्रा का मानना है कि राजस्थान के कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश के कारण कपास का रकबा स्थिर रह सकता है या इसमें 3-4 प्रतिशत की वृद्धि भी हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कपास की खेती किसानों के लिए लगातार जोखिमपूर्ण होती जा रही है। साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर के संस्थापक निदेशक भागीरथ चौधरी के अनुसार, पिंक बॉलवर्म का बढ़ता प्रकोप, मौसम की अनिश्चितताएं और लंबे समय तक एमएसपी से नीचे रहने वाली बाजार कीमतें किसानों का भरोसा कमजोर कर रही हैं। इसके विपरीत, धान की खेती में खरीद की गारंटी और बेहतर मुनाफे की संभावना किसानों को आकर्षित कर रही है।
सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ कॉटन रिसर्च के पूर्व प्रमुख दिलीप मोंगा के अनुसार, उत्तर भारत में कपास का रकबा पिछले कई वर्षों से लगातार घट रहा है। मौसम की मार, कीटों का दबाव और अन्य फसलों से मिलने वाले बेहतर आर्थिक लाभ किसानों को कपास से दूर कर रहे हैं। यही वजह है कि इस सीजन में भी धान ने कपास पर बढ़त बना ली है।