अलवर में कपास बुवाई की तैयारी, बम्पर पैदावार की उम्मीद
2026-04-20 16:54:31
अलवर में कपास बुवाई की तैयारी तेज, वैज्ञानिक तकनीक से बम्पर पैदावार की उम्मीद
अलवर और खैरथल-तिजारा में रबी फसलों की कटाई के बाद अब किसानों ने कपास की बुवाई की तैयारियां तेज कर दी हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस बार अप्रैल के अंतिम सप्ताह से लेकर मई के पहले सप्ताह तक कपास की बुवाई का प्रमुख समय रहेगा। खेतों में ‘सफेद सोना’ बोने की गतिविधियां तेजी से शुरू हो चुकी हैं।
किसान सरसों और गेहूं की कटाई के बाद खेतों की गहरी जुताई कर रहे हैं और पलेवा (सिंचाई) के माध्यम से मिट्टी में नमी बनाए रखने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। कृषि जानकारों का कहना है कि नमी का सही स्तर कपास के अंकुरण और शुरुआती वृद्धि के लिए बेहद जरूरी है।
इस बार किसान देसी खाद के उपयोग को प्राथमिकता दे रहे हैं ताकि मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहे और उत्पादन क्षमता बढ़े।
रोग नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक सुझाव
कृषि वैज्ञानिकों ने जड़ गलन (रूट रॉट) रोग से बचाव के लिए विशेष प्रबंधन की सलाह दी है। जिन क्षेत्रों में यह समस्या अधिक है, वहां बुवाई से पहले 6 किलोग्राम जिंक सल्फेट प्रति बीघा मिट्टी में मिलाने की सिफारिश की गई है।
इसके अलावा जैविक नियंत्रण के लिए ट्राइकोडर्मा के उपयोग पर जोर दिया गया है—
2.5 किलोग्राम ट्राइकोडर्मा हरजेनियम सड़ी हुई गोबर खाद के साथ मिट्टी में डालना लाभकारी
10 ग्राम ट्राइकोडर्मा प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से बीज उपचार आवश्यक
उन्नत किस्मों से बढ़ेगा उत्पादन
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को उन्नत और प्रमाणित किस्में अपनाने की सलाह दी है, जिनमें आरजी-8, आरजी-18, एच.डी. 123 और राज शामिल हैं। ये किस्में कीटों के प्रति अधिक सहनशील होने के साथ बेहतर उत्पादन देने में सक्षम हैं।
फसल अवशेष प्रबंधन पर जोर
किसानों को पराली जलाने के बजाय फसल अवशेषों को रोटावेटर या कल्टीवेटर से मिट्टी में मिलाने की सलाह दी गई है। इससे मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ता है और जलधारण क्षमता में सुधार होता है।
कुल मिलाकर वैज्ञानिक तकनीक और बेहतर कृषि प्रबंधन के साथ इस बार अलवर क्षेत्र में कपास की अच्छी पैदावार की उम्मीद जताई जा रही है।