पंजाब में कॉटन बीज पर 33% सब्सिडी का सीमित असर, किसानों का रुझान लगातार घटा
चंडीगढ़: पंजाब सरकार द्वारा कॉटन बीज पर 33% सब्सिडी देने की योजना के बावजूद राज्य में किसानों का कपास की खेती से मोहभंग जारी है। कृषि विभाग के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष केवल 19,000 किसानों ने सब्सिडी योजना के तहत पंजीकरण कराया, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 52,000 थी। यानी योजना में पंजीकरण करीब 63 प्रतिशत घट गया है।
सरकार ने वर्ष 2023 में पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (PAU) द्वारा अनुशंसित प्रमाणित बीटी कॉटन हाइब्रिड और देसी कपास की किस्मों पर 33% सब्सिडी शुरू की थी। यह सहायता प्रति किसान अधिकतम पांच एकड़ तक सीमित है। इसके बावजूद योजना के चौथे वर्ष में भी दक्षिणी मालवा क्षेत्र के किसान कपास की खेती से दूरी बनाए हुए हैं, जबकि यह क्षेत्र कभी राज्य का प्रमुख कपास उत्पादक इलाका माना जाता था।
कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर (कॉटन) चरणजीत सिंह ने बताया कि इस वर्ष राज्य में लगभग 80,000 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 1.19 लाख हेक्टेयर था। उनका कहना है कि अप्रैल में बुवाई के बाद हुई बेमौसम बारिश से खेतों की सतह पर मिट्टी की सख्त परत बन गई, जिससे बीजों का अंकुरण प्रभावित हुआ और कई पौधे नष्ट हो गए। दोबारा बुवाई में अधिक खर्च आने के कारण अधिकांश किसानों ने पुनः बुवाई नहीं की।
उन्होंने यह भी बताया कि नहरों में समय पर सिंचाई जल उपलब्ध नहीं होने से किसानों की मुश्किलें और बढ़ीं। सफाई कार्यों के कारण पानी की आपूर्ति में देरी हुई, जबकि बठिंडा, मानसा और श्री मुक्तसर साहिब जिलों में छोटी नहरों के क्षतिग्रस्त होने से सिंचाई व्यवस्था प्रभावित रही।
राज्य के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुडियन ने कहा कि विभाग देसी कपास की किस्म PBD-88 के प्रचार-प्रसार में अपेक्षित सफलता नहीं हासिल कर सका। उनके अनुसार, यह किस्म कई प्रमुख कीटों के प्रति अपेक्षाकृत अधिक सहनशील है, कम लागत में उगाई जा सकती है और बेहतर उत्पादन देने की क्षमता रखती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब में कपास की खेती को फिर से गति देने के लिए पिंक बॉलवर्म-रोधी अगली पीढ़ी की बोलगार्ड-III (Bollgard-III) जीएम कपास किस्मों की आवश्यकता होगी। फिलहाल PAU सहित कई संस्थान इसके परीक्षण कर रहे हैं और अंतिम निर्णय केंद्र सरकार द्वारा परीक्षण परिणामों के मूल्यांकन के बाद लिया जाएगा।