बीटी कपास बीज की किस्म ‘नांदेड़-44’ के प्रदर्शन आयोजित करने की मांग
जलगाँव ज़िले में बेहतर कपास उत्पादन के लिए उन्नत किस्मों के प्रदर्शन की तत्काल आवश्यकता महसूस की जा रही है। किसानों ने मांग की है कि परभणी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित ‘नांदेड़-44’ बीटी कपास किस्म के प्रदर्शन इस वर्ष भी पुनः आयोजित किए जाएं, ताकि अधिक से अधिक किसानों को इसका लाभ मिल सके।
वर्ष 2022–23 के दौरान, ज़िले में लगभग 200 एकड़ क्षेत्र में इस किस्म के सफल प्रदर्शन आयोजित किए गए थे। इस पहल के अंतर्गत विभिन्न किसान समूहों को बीज वितरित किए गए और खेती शुष्क भूमि तकनीकों तथा कृत्रिम सिंचाई, दोनों माध्यमों से की गई थी।
क‘नांदेड़-44’ मूल रूप से एक गैर-बीटी कपास किस्म थी, जो वर्ष 2001 से पहले राज्य में अत्यंत लोकप्रिय रही। इसकी उच्च उत्पादकता और विश्वसनीयता के कारण इसने निजी कंपनियों की कई किस्मों को बाज़ार में स्थापित होने से रोका था। हालांकि, 2001 के बाद बीटी कपास के प्रसार और निजी कंपनियों की नई किस्मों के आने से इसका प्रभाव कम हो गया। बाद में, इसी किस्म का बीटी संस्करण विकसित किया गया, जिससे यह पुनः किसानों के बीच प्रासंगि बनी।
पिछले तीन वर्षों से महाबीज और परभणी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा इस किस्म के प्रचार-प्रसार के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत चयनित किसान समूहों को निःशुल्क बीज वितरित कर खेती को बढ़ावा दिया गया। केवल जलगाँव ज़िले में ही लगभग 200 एकड़ क्षेत्र में इसकी खेती की गई।
किसानों ने अब मांग की है कि इस वर्ष भी चालीसगाँव, जामनेर, पारोला, अमलनेर और चोपड़ा जैसे क्षेत्रों में किसान समूहों और व्यक्तिगत किसानों को बीज उपलब्ध कराए जाएं, ताकि इस किस्म का विस्तार किया जा सके।
साथ ही यह भी आवश्यक है कि कृषि सहायकों और स्थानीय कृषि अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि प्रदर्शन कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन मिल सके और उत्पादन व उत्पादकता दोनों में वृद्धि हो।