बारिश का इंतज़ार कर रहे किसानों के लिए सूखे के लंबे दौर ने सोयगांव की कपास और सोयाबीन की फ़सलों पर संकट खड़ा कर दिया है।
अगस्त और सितंबर में सूखे के लंबे दौर का असर सोयगांव तालुका की खरीफ़ फ़सलों पर पड़ रहा है, जबकि अब तक कुल बारिश औसत का 109% हो चुकी है। फ़ूल आने और फ़सल के बढ़ने के अहम समय पर समय पर बारिश न होने से फ़सल की पैदावार को लेकर चिंता बढ़ गई है।
किसान कपास की कलियों (फ़्लावर बड्स) के झड़ने, मक्के की बालियों के ठीक से न बनने और सोयाबीन की फलियों के बनने में आ रही दिक्कतों की बात कह रहे हैं।
इस साल तालुका में खरीफ़ की बुआई 42,485 हेक्टेयर में हुई, जिसमें 28,206 हेक्टेयर में कपास, 6,693 हेक्टेयर में मक्का और 4,258 हेक्टेयर में सोयाबीन शामिल है।
बारिश का वितरण बहुत असमान रहा है। जून में सामान्य बारिश का 100% और जुलाई में 197% बारिश हुई, लेकिन अगस्त में यह सामान्य का 55% और सितंबर में सिर्फ़ 34% रह गई। रेवेन्यू सर्कल की बात करें तो जरंडी में सामान्य बारिश का 139% और सोयगांव में 134% बारिश हुई, जबकि बनोटी में 88% और सवलदबारा में 81% बारिश दर्ज की गई।
तालुका कृषि अधिकारी भरत कसार की देखरेख में, कृषि अधिकारी खेतों का दौरा कर रहे हैं ताकि फ़सल की हालत का जायज़ा ले सकें और किसानों को फ़सल को और नुकसान से बचाने के लिए मौके पर ही सलाह दे सकें।
फ़सलें अभी बढ़ने के अहम दौर में हैं, इसलिए किसान अब फ़सल के विकास और पैदावार को बचाने के लिए समय पर बारिश का इंतज़ार कर रहे हैं।
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