कपड़ा निर्यातकों ने राहत योजना का स्वागत किया, MSME क्षेत्र को मिलेगा सहारा
भारतीय कपड़ा उद्योग परिसंघ (CITI) ने कहा है कि निर्यात संवर्धन मिशन के तहत शुरू की गई राहत योजना (RELIEF) निर्यात सुविधा में लचीलापन और लॉजिस्टिक हस्तक्षेप के जरिए MSME-प्रधान कपड़ा और परिधान क्षेत्र को महत्वपूर्ण राहत प्रदान करेगी। वित्त वर्ष 2025-26 इस क्षेत्र के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा है।
CITI के अध्यक्ष अश्विन चंद्रन ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण निर्यातकों के सामने आने वाली चुनौतियों को कम करना है। उन्होंने अपील की कि RELIEF के तहत घोषित पैकेज को जल्द से जल्द लागू किया जाए।
भारत के कपड़ा और परिधान निर्यात का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया पर निर्भर है, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात (UAE) प्रमुख बाजारों में से एक है। वर्ष 2024 में UAE, अमेरिका, यूरोपीय संघ और बांग्लादेश के बाद भारत के लिए चौथा सबसे बड़ा कपड़ा निर्यात बाजार रहा।
CITI के अनुसार, लॉजिस्टिक्स और बीमा लागत में वृद्धि से निर्यातकों की परिचालन लागत बढ़ रही है, जिससे उनकी चुनौतियां और अधिक गंभीर हो रही हैं। इसके अलावा, भारतीय वस्तुओं पर 50% अमेरिकी टैरिफ के कारण 2025 की दूसरी छमाही में निर्यात प्रभावित हुआ, जो अगस्त 2025 से फरवरी 2026 तक लागू रहा।
विश्लेषण के अनुसार, फरवरी 2026 में कपड़ा निर्यात में पिछले वर्ष की तुलना में 0.31% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि परिधान निर्यात में 8.60% की कमी आई।