टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए 3 महीने में नई योजना लाएगी केंद्र सरकार, GST राहत की मांग तेज
सूरत: केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने घोषणा की है कि केंद्र सरकार अगले तीन महीनों में टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए एक व्यापक योजना शुरू करेगी। सूरत दौरे के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात कर GST, लंबित इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) रिफंड और धागे की बढ़ती कीमतों से जुड़ी समस्याएं उठाईं।
GST कटौती के बावजूद ज़री निर्माताओं को नुकसान
मेटैलिक ज़री निर्माताओं ने मंत्री को बताया कि उनके उत्पादों पर GST की दर 12% से घटाकर 5% कर दी गई है। हालांकि, इनपुट टैक्स क्रेडिट का रिफंड नहीं मिलने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
निर्माताओं के अनुसार, कच्चे माल की खरीद पर अधिक GST चुकाना पड़ता है, जबकि तैयार उत्पाद पर कम दर लागू होती है। रिफंड नहीं मिलने के कारण उन्हें लगभग ₹7 प्रति किलोग्राम का नुकसान हो रहा है। यह आंकड़ा उद्योग प्रतिनिधियों द्वारा बताया गया है।
प्रतिनिधियों ने कहा कि स्थानीय अधिकारियों और राज्य सचिवालय के समक्ष कई बार यह मुद्दा उठाने के बावजूद समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने GST काउंसिल से हस्तक्षेप करने की मांग की।
धागे की कीमतों पर निगरानी की मांग
टेक्सटाइल कारोबारियों ने स्पिनर्स द्वारा धागे की कीमतों में बार-बार बढ़ोतरी पर चिंता जताई। उनका कहना है कि इससे बुनकरों और टेक्सटाइल प्रोसेसर्स की उत्पादन लागत बढ़ रही है और कारोबार पर आर्थिक दबाव पड़ रहा है।
उद्योग प्रतिनिधियों ने सरकार से धागे की कीमतों की नियमित निगरानी करने का आग्रह किया, ताकि निर्माताओं को उचित दरों पर कच्चा माल मिल सके। गिरिराज सिंह ने उनकी चिंताओं के समाधान के लिए जल्द कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
₹10,000 तक के कपड़ों पर GST सीमा बढ़ाने की मांग
फेडरेशन ऑफ सूरत टेक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन (FOSTTA) के कार्यालय में आयोजित बैठक में रेडीमेड कपड़ों पर GST का मुद्दा भी उठाया गया।
उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार, ₹2,500 से अधिक कीमत वाले कपड़ों पर 18% GST लागू होता है। उन्होंने इस सीमा को बढ़ाकर ₹10,000 करने की मांग की, ताकि कपड़ा कारोबार को राहत मिल सके। यह उद्योग की मांग है, न कि घोषित नीतिगत बदलाव।
टेक्सटाइल इंडस्ट्री को उम्मीद है कि केंद्र सरकार की प्रस्तावित योजना से GST संबंधी समस्याओं, लंबित रिफंड और बढ़ती उत्पादन लागत के समाधान में मदद मिलेगी। हालांकि, योजना का विस्तृत स्वरूप और राहत का दायरा सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।
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