भारत का टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग बाजार 2030 तक 3.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान
2026-03-11 11:27:50
भारत का टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग बाजार 2030 तक 3.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान, 1 लाख नई नौकरियां संभव: रिपोर्ट
“भारत में टेक्सटाइल वेस्ट वैल्यू चेन का मानचित्रण” नामक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सतत और सर्कुलर टेक्सटाइल उत्पादन की दिशा में वैश्विक बदलाव का नेतृत्व करने की मजबूत क्षमता है। अनुमान है कि 2030 तक देश का टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग बाजार 3.5 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जिससे लगभग 1 लाख नई नौकरियां उत्पन्न हो सकती हैं।
भारत में हर साल लगभग 70.73 लाख टन टेक्सटाइल कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें 42% पूर्व-उपभोक्ता (निर्माण प्रक्रिया से) और 58% उपभोक्ता-पश्चात कचरा शामिल है। कुल कचरे का 70% से अधिक हिस्सा पुनर्प्राप्त कर रीसाइक्लिंग, पुन: उपयोग, अपसाइक्लिंग या डाउनसाइक्लिंग के लिए उपयोग किया जाता है।
रिपोर्ट में पानीपत को मैकेनिकल टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग का प्रमुख केंद्र बताया गया है, जहां कई टेक्सटाइल हब से कचरा प्रोसेसिंग के लिए लाया जाता है। उत्पादन केंद्रों के पास रीसाइक्लिंग सुविधाएं विकसित करने से दक्षता बढ़ सकती है और सर्कुलर टेक्सटाइल इकोसिस्टम मजबूत हो सकता है।
अध्ययन के अनुसार, पूर्व-उपभोक्ता कचरे का लगभग 95% पुनर्प्राप्त कर लिया जाता है, जबकि स्पिनिंग सेक्टर अपने लगभग 100% कचरे को क्लोज्ड-लूप सिस्टम के जरिए पुन: उपयोग करता है। इसके अलावा, उपभोक्ता-पश्चात टेक्सटाइल कचरे का लगभग 55% हिस्सा अनौपचारिक संग्रह और छंटाई नेटवर्क के माध्यम से लैंडफिल से बचाया जाता है।
यह अनौपचारिक प्रणाली लगभग 40–45 लाख लोगों की आजीविका को सहारा देती है, जिनमें बड़ी संख्या में हाशिए पर रहने वाले समुदायों की महिलाएं शामिल हैं, जो पुराने कपड़ों के संग्रह, छंटाई और पुनर्वितरण में कार्यरत हैं।