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अहमदपुर में कपास बुवाई तेज

2026-06-29 16:40:01
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दो दिन की बारिश से अहमदपुर में कपास की बुवाई ने पकड़ी रफ्तार, 10 हजार हेक्टेयर में होगी खेती


अहमदपुर: लंबे इंतजार के बाद पिछले दो दिनों में हुई अच्छी बारिश ने अहमदपुर तालुका के किसानों को राहत दी है। मानसून के मृग नक्षत्र का आधा समय बीत जाने के बावजूद बारिश नहीं होने से किसान चिंतित थे, लेकिन अब पर्याप्त नमी मिलने के बाद कपास की बुवाई का काम तेजी से शुरू हो गया है। सोयाबीन के बाद कपास तालुका की दूसरी सबसे प्रमुख खरीफ फसल है और इस वर्ष लगभग 10,000 हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती किए जाने का लक्ष्य है।


मौसम विभाग की ओर से आगे भी बारिश की संभावना जताई गई है, जिससे किसानों ने बुवाई की गति बढ़ा दी है। शनिवार को तालुका के कई हिस्सों में मध्यम बारिश दर्ज की गई। इसके बाद शिरूर ताजबंद, अहमदपुर, नंदुरा, ढलेगांव, हाडोलती और थोडगा समेत कई गांवों में किसान खेतों में उतर गए हैं।


इस खरीफ सीजन में अहमदपुर तालुका का कुल बोया जाने वाला क्षेत्र 66,587 हेक्टेयर है, जबकि कुल कृषि योग्य भूमि 71,482 हेक्टेयर है। इसमें सबसे अधिक 44,622 हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की खेती होगी। इसके बाद 10,000 हेक्टेयर में कपास और 9,797 हेक्टेयर में अरहर (तूर) की बुवाई प्रस्तावित है।


बारिश के आंकड़ों के अनुसार, 27 जून 2026 तक अहमदपुर सर्कल में 23 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जिससे कुल बारिश 112 मिमी पहुंच गई। शिरूर ताजबंद सर्कल में भी 23 मिमी बारिश हुई और कुल वर्षा 94 मिमी रही। वहीं खंडली क्षेत्र में केवल 9 मिमी (कुल 49 मिमी) और अंधोरी क्षेत्र में 7 मिमी (कुल 23 मिमी) बारिश दर्ज की गई। किंगगांव और हाडोलती सर्कल में उस दिन बारिश नहीं हुई। किंगगांव में अब तक केवल 28 मिमी वर्षा हुई है, इसलिए वहां के किसान अभी भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।


जिन क्षेत्रों में मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं है, वहां बुवाई अभी भी रुकी हुई है। हालांकि हाडोलती क्षेत्र में लगातार दो दिन हुई बारिश के बाद किसानों ने कपास के साथ-साथ सोयाबीन की बुवाई भी शुरू कर दी है। किसानों को उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में और अच्छी बारिश होगी, जिससे बुवाई का कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो सकेगा।


हाडोलती के किसान विश्वनाथ हेंगने ने बताया, "पिछले साल जून में अच्छी बारिश हुई थी। इस बार भी अब बारिश का सिलसिला शुरू हुआ है। यदि अगले एक-दो दिनों में अच्छी वर्षा होती है तो कपास की बुवाई पूरी तरह सफल रहेगी।"


तालुका कृषि अधिकारी सचिन बावगे ने किसानों को सलाह दी है कि जल्दबाजी में बुवाई न करें। उनके अनुसार, कम से कम 100 मिमी बारिश होने और मिट्टी में पर्याप्त नमी बनने के बाद ही बुवाई करना उचित है। उन्होंने कहा कि बुवाई से पहले बीजों की अंकुरण क्षमता की जांच अवश्य करें तथा बीजोपचार (सीड ट्रीटमेंट) करें। साथ ही ब्रॉड बेड फरो (BBF) या डिबलिंग पद्धति अपनाने से बीज और उर्वरक की बचत होती है तथा फसल अनियमित बारिश का बेहतर सामना कर सकती है। उन्होंने किसानों से मौसम पूर्वानुमान, कीट प्रबंधन और आधुनिक कृषि सलाह के लिए महाविस्तार AI ऐप का उपयोग करने की भी अपील की।


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