बारिश की कमी से गुजरात के चोटिला में कपास की बुआई पर संकट, दोबारा बुवाई की नौबत
सुरेंद्रनगर (गुजरात): गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले के चोटिला पंथक में बारिश की लंबी कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मॉनसून की शुरुआती बारिश के बाद किसानों ने उम्मीद के साथ कपास समेत खरीफ फसलों की बुआई की थी, लेकिन इसके बाद पर्याप्त वर्षा नहीं होने से कई क्षेत्रों में कपास की फसल प्रभावित होने लगी है। किसानों को आशंका है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो उन्हें दोबारा बुआई करनी पड़ सकती है।
किसानों का कहना है कि शुरुआती बारिश के कारण खेतों में पर्याप्त नमी बनने से उन्होंने महंगे बीज, खाद और मजदूरी पर हजारों रुपये खर्च कर कपास की बुआई की थी। लेकिन लंबे शुष्क दौर के कारण मिट्टी की नमी तेजी से खत्म हो गई। नतीजतन, कई खेतों में कपास के बीज अंकुरित होने से पहले ही खराब हो गए या सूख गए हैं।
फसल खराब होने से किसानों की लागत बढ़ गई है। कई किसान पहले ही कर्ज लेकर खेती कर रहे हैं और अब उन्हें दोबारा बीज खरीदने तथा बुआई कराने की चिंता सता रही है। इससे उनकी आर्थिक मुश्किलें और बढ़ने लगी हैं।
चोटिला तालुका के पूर्व तालुका पंचायत अध्यक्ष एवं किसान नेता अंबाभाई ओलकिया ने कहा कि क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बारिश का पानी लंबे समय तक मिट्टी में नहीं टिक पाता। जल संग्रहण के सीमित साधनों की वजह से बारिश में देरी होने पर सिंचाई की गंभीर समस्या खड़ी हो जाती है।
उन्होंने बताया कि जिन किसानों के पास बोरवेल या कुएं हैं, उन्हें भी भूजल स्तर में गिरावट और कृषि के लिए पर्याप्त बिजली आपूर्ति नहीं मिलने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यदि आने वाले दिनों में भी बारिश नहीं हुई तो इसका असर केवल फसलों पर ही नहीं, बल्कि पशुओं के चारे और पेयजल उपलब्धता पर भी पड़ सकता है।
अंबाभाई ओलकिया ने सरकार से प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल फसल नुकसान का सर्वे कराने, किसानों को मुआवजा अथवा मुफ्त बीज और खाद उपलब्ध कराने, चेक डैम एवं जल संरक्षण परियोजनाओं में तेजी लाने और खेती के लिए नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
फिलहाल चोटिला पंथक के किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि समय पर पर्याप्त वर्षा होने पर ही सूखती फसलों को बचाया जा सकेगा और किसानों को संभावित भारी आर्थिक नुकसान से राहत मिलेगी।