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पाकिस्तान में कपास बाजार स्थिर, व्हाइटफ्लाई का बढ़ता खतरा

2023-09-18 18:07:34
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पाकिस्तान साप्ताहिक कपास समीक्षा: व्हाइटफ्लाई के खतरे के बीच हाजिर दर में उछाल


पिछले सप्ताह कपास की कीमतें कुल मिलाकर स्थिर रहीं, लेकिन हाजिर दर में 1,000 रुपये प्रति मन की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस बीच कपास की फसल पर सफेद मक्खी (व्हाइटफ्लाई) के बढ़ते हमले को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है, जिससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। हालात से निपटने के लिए सरकारी अधिकारी और कृषि विशेषज्ञ सक्रिय हैं, और स्प्रे के लिए हेलिकॉप्टर व ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है।


कपड़ा क्षेत्र के निर्यात में गिरावट देखी जा रही है, जबकि कपास उत्पादन में लगभग 70% वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।


स्थानीय बाजार में पिछले सप्ताह रूई की आवक कम रही। इसकी एक वजह किसानों द्वारा ऊंचे दाम की मांग है, वहीं सफेद मक्खी के हमले और अधिक तापमान के कारण फसल की तुड़ाई भी प्रभावित हुई है। इन परिस्थितियों के चलते कपास की कीमतों में स्थिरता बनी रही, और मिल मालिक सावधानी से खरीदारी कर रहे हैं।

कपास उत्पादक क्षेत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सफेद मक्खी का प्रकोप काफी गंभीर है, जिससे उत्पादन अनुमान से कम रह सकता है। हर साल की तरह इस बार भी सितंबर महीना फसल के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।

हालांकि, अगले सप्ताह बारिश की संभावना जताई गई है, जिससे मौसम में सुधार होने पर सफेद मक्खी के प्रभाव में कुछ कमी आ सकती है।

फसल को बचाने के लिए पंजाब के अंतरिम मुख्यमंत्री मोहसिन नकवी, प्रांतीय मंत्री एस.एम. तनवीर, एपीटीएमए और अन्य संबंधित संस्थाएं मिलकर प्रयास कर रही हैं।


कीमतों की बात करें तो सिंध में कपास 18,500 से 19,000 रुपये प्रति मन, जबकि फूटी 8,000 से 9,000 रुपये प्रति 40 किलो के बीच रही। पंजाब में कपास 19,000 से 19,500 रुपये प्रति मन और फूटी 8,500 से 9,300 रुपये प्रति 40 किलो रही। बलूचिस्तान में कपास 18,500 से 18,800 रुपये प्रति मन और फूटी 8,500 से 9,300 रुपये प्रति 40 किलो के बीच दर्ज की गई। वहीं खल, बनौला और तेल की कीमतों में नरमी का रुख देखा गया।


कराची कॉटन एसोसिएशन की स्पॉट रेट कमेटी ने हाजिर दर में 1,000 रुपये की बढ़ोतरी कर इसे 19,000 रुपये प्रति मन पर तय किया।


विशेषज्ञों ने मौसम विभाग की सटीक और समय पर पूर्वानुमान देने में विफलता को कृषि नुकसान का एक बड़ा कारण बताया। उनका कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग के चलते दुनिया भर में मौसम पूर्वानुमान तकनीक को उन्नत किया गया है, लेकिन पाकिस्तान में इस दिशा में पर्याप्त सुधार नहीं हुआ।


सरकार ने 2023-24 को ‘कपास वर्ष’ घोषित किया था और इस साल 10 मिलियन गांठ उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। 15 सितंबर तक उत्पादन 3.8 मिलियन गांठ रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 2.2 मिलियन गांठ से काफी अधिक है।


रिपोर्ट्स के अनुसार, कई क्षेत्रों में बारिश शुरू हो चुकी है, जिससे उम्मीद है कि सफेद मक्खी के प्रकोप को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।





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