रुपये की कमजोरी और बढ़ती मांग से कपास कीमतों में तेजी
नई दिल्ली: घरेलू और वैश्विक मांग में मजबूती के बीच भारत में कपास की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। रुपये के डॉलर के मुकाबले कमजोर होने से आयात महंगा हो गया है, जिससे घरेलू बाजार में कीमतों को और समर्थन मिला है।
कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने शुक्रवार को कपास के दाम में 300 रुपये प्रति कैंडी (356 किलोग्राम) की बढ़ोतरी की। इस संशोधन के साथ ही महीने की शुरुआत से अब तक CCI ने कुल 1,900 रुपये प्रति कैंडी तक कीमतें बढ़ाई हैं।
CCI के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ललित गुप्ता के अनुसार, यह बढ़ोतरी वैश्विक बाजार के रुझानों के अनुरूप है। उन्होंने बताया कि कपास और धागे दोनों की मांग मजबूत बनी हुई है। CCI ने कुल 1.05 करोड़ गांठों की खरीद में से मार्च महीने में ही 39 लाख गांठों की बिक्री की, जो बाजार में अच्छी मांग का संकेत है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी तेजी का माहौल है। आईसीई (ICE) कॉटन वायदा मार्च की शुरुआत से 14% से अधिक बढ़ चुका है। मई 2026 डिलीवरी के लिए कीमतें 69 सेंट प्रति पाउंड से ऊपर और जुलाई के लिए 71 सेंट प्रति पाउंड के आसपास बनी हुई हैं।
कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) के पूर्व अध्यक्ष अतुल गनात्रा का मानना है कि रुपये की कमजोरी और वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी के चलते आने वाले समय में अच्छी गुणवत्ता वाले कपास के दाम और बढ़ सकते हैं।
उद्योग सूत्रों के मुताबिक, मजबूत डॉलर के कारण आयात महंगा होने से घरेलू कपास की मांग बढ़ी है। इसके अलावा, चीन, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों से भारतीय कपास और धागे की मांग में भी इजाफा हुआ है, जिससे बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिल रहा है।