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खानदेश में कपास उत्पादन में भारी गिरावट, किसानों की बढ़ी चिंता

2026-03-09 11:33:57
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खानदेश में ‘सफेद सोना’ फीका, कपास उत्पादन में 40% गिरावट


जलगांव/खानदेश: इस वर्ष खानदेश क्षेत्र में कपास उत्पादन में करीब 40% की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे कपास का सीजन समय से पहले ही समाप्त होता नजर आ रहा है। सामान्यतः अप्रैल–मई तक चलने वाला सीजन इस बार मार्च की शुरुआत में ही थम गया है।


हालांकि कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने खरीद की समयसीमा 15 मार्च तक बढ़ाई है, लेकिन मंडियों में कपास की आवक लगभग खत्म हो चुकी है। खानदेश, विदर्भ और मराठवाड़ा जैसे प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्रों में इस बार प्रतिकूल मौसम और भारी बारिश ने उत्पादन पर बड़ा असर डाला है।


कीमतों में गिरावट से बढ़ी चिंता
पिछले दो हफ्तों में जलगांव और खानदेश की निजी मंडियों में कपास के दाम ₹300–₹400 प्रति क्विंटल तक गिर गए हैं। वर्तमान में कीमतें ₹6,500 से ₹7,000 प्रति क्विंटल के बीच बनी हुई हैं। बेहतर भाव की उम्मीद में कपास रोककर बैठे किसानों को अब गिरते दामों से निराशा हो रही है।


कम कीमतों के चलते कई किसान अपनी उपज बाजार में लाने से बच रहे हैं, जिससे निजी जिनिंग और प्रेसिंग इकाइयों पर भी असर पड़ा है और कई फैक्ट्रियां लगभग ठप पड़ी हैं।

किसानों के पास बड़ा स्टॉक
खानदेश क्षेत्र में करीब एक लाख गांठ के बराबर कपास अभी भी किसानों के पास जमा है। यह स्टॉक मुख्य रूप से बड़े किसानों के पास है, जिन्होंने बेहतर कीमत की उम्मीद में बिक्री टाल दी थी। उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि मौजूदा हालात में यह कपास अब अगले सीजन में ही बाजार में आ सकता है।

सरकारी खरीद से दूरी
सीजन के अंतिम चरण में सरकारी खरीद केंद्रों पर नमी और गुणवत्ता के आधार पर कपास अस्वीकार किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। इससे किसान निराश हैं और कई लोग सरकारी केंद्रों पर जाने से बच रहे हैं, जिससे बाजार में आपूर्ति और भी प्रभावित हो रही है।



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