अल नीनो से भारत में कपास की खेती बढ़ने की उम्मीद, टेक्सटाइल उद्योग को अस्थायी राहत
2026-07-22 14:04:23
अल-नीनो के बीच कपास की खेती बढ़ने की उम्मीद, फिलहाल टेक्सटाइल उद्योग को राहत
नई दिल्ली: अल-नीनो के कारण सामान्य से कम बारिश की आशंका भारतीय कपास क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम वर्षा की स्थिति में किसान अधिक पानी की मांग करने वाली फसलों के बजाय कपास की खेती को प्राथमिकता दे सकते हैं, जिससे शुरुआती बुआई में आई कमी की भरपाई संभव है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार, 17 जुलाई तक देश में 92.53 लाख हेक्टेयर में कपास की बुआई हुई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 98.39 लाख हेक्टेयर की तुलना में 5.96% कम है। महाराष्ट्र और गुजरात में बुआई घटी है, जबकि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में वृद्धि दर्ज की गई है।
कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक एल. के. गुप्ता ने कहा कि यदि बारिश सीमित रहती है, तो किसान कपास की खेती की ओर अधिक आकर्षित होंगे, क्योंकि यह फसल अपेक्षाकृत कम पानी में भी अच्छी पैदावार दे सकती है। उन्होंने भरोसा जताया कि घरेलू टेक्सटाइल उद्योग के लिए कच्चे कपास की उपलब्धता पर्याप्त रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि CCI मिलों को सीधे कपास उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है, ताकि कीमतें नियंत्रित रहें और किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके।
सरकार ने अक्टूबर 2026 तक कच्चे कपास के आयात पर लगने वाले लगभग 11% आयात शुल्क में छूट दी है। इससे नई घरेलू फसल आने तक कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित रहने और टेक्सटाइल उत्पादों की कीमतों पर दबाव कम रहने की उम्मीद है।
हालांकि, उद्योग विशेषज्ञों ने वैश्विक जोखिमों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। तिरुपुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राजा एम. षणमुगम के अनुसार, अल-नीनो का असर केवल भारत तक सीमित नहीं है। यदि प्रमुख कपास उत्पादक देशों में उत्पादन घटता है, तो वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और कच्चे माल की कीमतें बढ़ सकती हैं। ऐसे में CCI का बफर स्टॉक और समय पर आपूर्ति उद्योग के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में भारत का कच्चे कपास का आयात 54.9% बढ़कर 1.89 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि निर्यात 33.9% घटकर 436.37 मिलियन डॉलर रह गया। फिलहाल घरेलू बाजार में स्थिति स्थिर है, लेकिन वैश्विक कपास आपूर्ति पर अल-नीनो का प्रभाव आगे भी नजर बनाए रखने वाला प्रमुख कारक रहेगा।