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उत्तर भारत में कपास खेती बढ़ाने पर जोर

2026-09-04 13:28:12
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सिरसा डायलॉग में उत्तर भारत में कपास की खेती फिर शुरू करने की अपील

बठिंडा: सिरसा में आयोजित दो दिवसीय फार्म-टू-फाइबर कॉटन डायलॉग 2026 में राजनेताओं, किसानों, जिनर्स, वैज्ञानिकों और कॉटन वैल्यू चेन से जुड़े हितधारकों ने पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में घटते कपास रकबे को बढ़ाने और कपास आधारित ग्रामीण तथा टेक्सटाइल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के रोडमैप पर चर्चा की।

साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (SABC) की ओर से आयोजित इस डायलॉग में लगातार घटते कपास रकबे, स्थिर उत्पादकता और उत्तर भारत की कॉटन आधारित ग्रामीण एवं टेक्सटाइल अर्थव्यवस्था के सामने बढ़ती चुनौतियों पर चर्चा हुई। कपास की खेती में गिरावट रोकने के लिए बेहतर जेनेटिक्स, अगली पीढ़ी की कॉटन टेक्नोलॉजी और बेहतर उत्पादन प्रणालियों की जरूरत पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम में शामिल BJP के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनप्रीत सिंह बादल ने उत्तर भारत में Bt कॉटन को तेजी से अपनाने और इससे क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था में आए बदलाव को याद किया। उन्होंने कहा, “अधिक पॉलिसी फोकस, किसानों पर ध्यान और आधुनिक तकनीक तक बेहतर पहुंच के साथ हम कपास में किसानों का भरोसा वापस ला सकते हैं और उत्तर भारत को एक बार फिर कपास उत्पादन का फलता-फूलता क्षेत्र बना सकते हैं।”

SABC के फाउंडर डायरेक्टर भागीरथ चौधरी ने खरीफ सीजन 2026-27 को कॉटन इकोनॉमी के लिए “वेक-अप कॉल” बताया। उन्होंने ‘नॉर्थ इंडिया कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन’ के तहत पर्याप्त आवंटन की मांग की, जिसमें अगली पीढ़ी की पिंक बॉलवर्म (PBW) रेजिस्टेंट और हर्बिसाइड-टॉलरेंट Bt कॉटन टेक्नोलॉजी तथा HDPS और CSPS के लिए उपयुक्त बेहतर जेनेटिक्स तक किसानों की पहुंच शामिल हो।

ICAL के पूर्व अध्यक्ष महेश शारदा ने बेहतर उत्पादकता और फाइबर रिकवरी के लिए सही कॉटन किस्म और हाइब्रिड के चयन को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने गांव स्तर पर समितियां बनाने का सुझाव दिया, जो स्थानीय परिस्थितियों में किस्मों के फील्ड प्रदर्शन का मूल्यांकन कर किसानों को बेहतर बीज चयन में मदद करें।

डायलॉग का आयोजन SABC, ICAL, NITMA और हरियाणा कॉटन जिनर्स एसोसिएशन ने संयुक्त रूप से किया।


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