राजस्थान: 1.80 लाख हेक्टेयर में बीटी कपास की बुवाई, पिछले साल से 61 हजार हेक्टेयर ज्यादा; अगले 60 दिन अहम
हनुमानगढ़ जिले में इस बार बीटी कपास की बुवाई 1.80 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले वर्ष के 1.19 लाख हेक्टेयर से करीब 61 हजार हेक्टेयर अधिक है। बढ़े हुए रकबे के साथ बेहतर उत्पादन की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे किसानों की आय और जिले की अर्थव्यवस्था मजबूत हो सकती है।
बारिश के बाद फसल में रोगों का खतरा बढ़ गया है। कृषि विभाग गुलाबी सुंडी समेत अन्य कीटों पर नजर बनाए हुए है और फील्ड स्टाफ को नियमित सर्वे के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल बड़े नुकसान की कोई सूचना नहीं है, लेकिन अधिकारियों ने किसानों को अगले 60 दिनों तक सतर्क रहने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, गुलाबी सुंडी यदि टिंडे में प्रवेश कर जाए तो उसका नियंत्रण मुश्किल हो जाता है। इसलिए किसानों को लगातार निगरानी, फेरोमोन ट्रैप का उपयोग और समय पर नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। यदि ट्रैप में लगातार तीन दिन तक 5–8 पतंगे दिखाई दें, तो तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
फसल इस समय फलन अवस्था में है, जिससे पोषक तत्वों की आवश्यकता अधिक है। भारी बारिश के कारण कई क्षेत्रों में पोषक तत्वों की कमी देखी जा रही है, जिससे फूल और बॉल गिरने की समस्या बढ़ सकती है। ऐसे में किसानों को घुलनशील उर्वरकों का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
कृषि विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रहा है ताकि किसान समय रहते कीट नियंत्रण और पोषण प्रबंधन के उपाय अपनाकर फसल को सुरक्षित रख सकें।