Recent News

नंदुरबार में खरीफ बुवाई रुकी

महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले को बारिश का इंतजार; खरीफ की बुआई सिर्फ 90 प्रतिशत पूरीराज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश हुई है, जबकि कुछ इलाकों में अभी भी बारिश का इंतजार है। जोरदार बारिश के कारण शहर के कई इलाके जलमग्न हो गए हैं। कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है, जबकि राज्य के कुछ हिस्सों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश होने की उम्मीद है।नंदुरबार जिला जोरदार बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। पानी का संकट गहराता जा रहा है और कई जगहों पर बुआई का काम रुक गया है। बुआई रुकने से किसान परेशान हैं, क्योंकि बारिश नहीं होने से खरीफ सीजन पर संकट मंडरा रहा है। अभी तक खरीफ की सिर्फ 90 प्रतिशत बुआई ही पूरी हो पाई है।बारिश नहीं होने से कपास, मक्का और सोयाबीन की खेती पर असर पड़ा है, किसानों की चिंताएं बढ़ रही हैं और वे बारिश की उम्मीद लगाए बैठे हैं।और पढ़ें :- CCI ने कपास भाव ₹700 बढ़ाए

CCI ने कपास भाव ₹700 बढ़ाए

CCI ने कपास की कीमतें ₹700 प्रति कैंडी बढ़ाईं; साप्ताहिक नीलामी में बिक्री 1.52 लाख गांठों के पारकॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (CCI) ने 7 अगस्त, 2026 को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान कपास की बिक्री कीमतों में ₹700 प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की। यह बढ़ोतरी मिलों और कपास व्यापारियों की ओर से मजबूत मांग को दर्शाती है।इस सप्ताह के दौरान, CCI ने 2025–26 की फसल से लगभग 1,52,000 गांठ कपास बेची, जिसमें नीलामी की सबसे अधिक मात्रा बुधवार को दर्ज की गई।साप्ताहिक बिक्री रिपोर्ट 3 अगस्त, 2026 (सोमवार)CCI ने सप्ताह की शुरुआत 17,800 गांठों की बिक्री के साथ की। टेक्सटाइल मिलों ने 8,500 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 9,300 गांठें खरीदीं।4 अगस्त, 2026 (मंगलवार)नीलामी की गतिविधि तेज हुई और कुल बिक्री बढ़कर 41,100 गांठें हो गई। मिलों ने 21,600 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 19,500 गांठें खरीदीं।5 अगस्त, 2026 (बुधवार)बुधवार को सप्ताह की सबसे अधिक नीलामी मात्रा देखी गई, जिसमें 48,100 गांठें बेची गईं। खरीद में व्यापारियों का दबदबा रहा, जिन्होंने 37,100 गांठें खरीदीं, जबकि मिलों ने 11,000 गांठें खरीदीं।6 अगस्त, 2026 (गुरुवार)CCI ने गुरुवार की नीलामी के दौरान 21,500 गांठें बेचीं। मिलों ने 7,700 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 13,800 गांठें खरीदीं।7 अगस्त, 2026 (शुक्रवार)सप्ताह की नीलामी 23,500 गांठों की बिक्री के साथ समाप्त हुई। मिलों ने 7,200 गांठें खरीदीं और व्यापारियों ने 16,300 गांठें खरीदीं।हालिया नीलामी के बाद, 2025–26 सीज़न के लिए CCI की कुल कपास बिक्री लगभग 90,36,800 गांठों तक पहुंच गई, जो घरेलू टेक्सटाइल मिलों और कपास व्यापारियों दोनों की ओर से लगातार मजबूत मांग को दर्शाती है।

नागालैंड में यार्न बैंक योजना शुरू

नागालैंड में 'मुख्यमंत्री यार्न बैंक योजना' का शुभारंभ, बुनकरों को मिलेगा सस्ता और गुणवत्तापूर्ण धागाराष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने 'मुख्यमंत्री यार्न बैंक योजना' का वर्चुअल शुभारंभ किया। इस योजना का उद्देश्य राज्य के हथकरघा क्षेत्र को मजबूत करना और बुनकरों की आजीविका को बेहतर समर्थन प्रदान करना है।कोहिमा में आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री टी.आर. जेलियांग, उद्योग एवं वाणिज्य मामलों की सलाहकार हेकानी जखालू तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। योजना के तहत स्थापित यार्न बैंक दीमापुर के टोलुवी स्थित राज्य औद्योगिक क्षेत्र के जिला उद्योग केंद्र में संचालित किया जाएगा।'मुख्यमंत्री यार्न बैंक योजना' का उद्देश्य बुनकरों के सामने आने वाली लंबे समय से चली आ रही उस समस्या का समाधान करना है, जिसमें उन्हें उचित कीमतों पर गुणवत्तापूर्ण प्राकृतिक धागा उपलब्ध नहीं हो पाता था। इस कारण उत्पादन लागत बढ़ने के साथ-साथ उनकी आय भी प्रभावित होती थी।योजना के तहत राज्य सरकार बुनकरों को 15 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान करेगी। इसके अलावा सूती धागा, एरी सिल्क, मूगा सिल्क, बांस के रेशों और अन्य प्राकृतिक मिश्रित रेशों से बने धागे मिल-गेट कीमतों पर उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे बुनकरों को कम लागत में बेहतर गुणवत्ता वाली सामग्री मिल सकेगी और उनके उत्पादों की बाजार प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से प्रतिवर्ष लगभग 5,000 से 10,000 बुनकर लाभान्वित होंगे। एक पारदर्शी और भरोसेमंद वितरण प्रणाली के माध्यम से पात्र बुनकर सीधे यार्न बैंक से धागा खरीद सकेंगे। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और कारीगरों को अधिक लाभ मिलेगा।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने कहा कि यह पहल राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके तहत हथकरघा क्षेत्र को बढ़ावा देने और कारीगरों की आजीविका को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हथकरघा केवल वस्त्र निर्माण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह नागालैंड की पहचान, संस्कृति और समृद्ध विरासत की अभिव्यक्ति है।मुख्यमंत्री ने राज्य के बुनकरों, विशेषकर महिलाओं, के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि वे पारंपरिक शिल्प को संरक्षित रखने के साथ-साथ हजारों परिवारों की आजीविका में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने पात्र बुनकरों, सरकारी विभागों, सहकारी समितियों, स्वयं सहायता समूहों, ग्राम संस्थाओं और सामुदायिक नेताओं से मिलकर काम करने का आह्वान किया, ताकि योजना का लाभ प्रत्येक पात्र कारीगर तक पहुंच सके।राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने नागालैंड की समृद्ध हथकरघा विरासत के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 'मुख्यमंत्री यार्न बैंक योजना' आने वाले वर्षों में बुनकरों को नई संभावनाएं प्रदान करेगी और राज्य की पारंपरिक हथकरघा कला को नई पहचान दिलाएगी।

भावनगर में कपास बुवाई रिकॉर्ड

भावनगर जिले में कपास और मूंगफली की रिकॉर्ड बुवाई, किसानों को अच्छे भाव की उम्मीदभावनगर: जिले के किसानों के लिए इस साल का खरीफ सीजन काफी उत्साहजनक दिखाई दे रहा है। अच्छी बारिश और अनुकूल मौसम के चलते किसानों ने कपास और मूंगफली की बड़े पैमाने पर बुवाई की है। जुलाई के तीसरे सप्ताह के अंत तक जिले में 3,58,100 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई पूरी हो चुकी है। यह जिले के कुल 4,44,000 हेक्टेयर खरीफ क्षेत्र का 80.65 प्रतिशत है।इस साल जिले में कपास की खेती का रकबा सबसे अधिक रहा है। तलाजा और महुवा सहित ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों ने कपास की बुवाई को प्राथमिकता दी है। वहीं, मूंगफली की खेती भी बड़े क्षेत्र में की गई है। किसानों को उम्मीद है कि पर्याप्त बारिश और बेहतर मौसम के कारण दोनों फसलों का उत्पादन अच्छा रहेगा।कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में अब तक 2,16,000 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हुई है, जो कुल खरीफ बुवाई का करीब 56 प्रतिशत है। इसके अलावा 1,16,000 हेक्टेयर क्षेत्र में मूंगफली की खेती की गई है। दोनों प्रमुख फसलों के बढ़े हुए रकबे से किसानों में बेहतर पैदावार और आय की उम्मीद जगी है।किसानों का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में मानसून सामान्य रहा तो कपास और मूंगफली की फसल बेहतर हो सकती है। खासकर कपास के अच्छे उत्पादन के साथ बाजार में बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद किसानों को है।जिला कृषि अधिकारी ने भी बताया कि इस वर्ष भावनगर जिले में कपास की बुवाई बड़े स्तर पर हुई है। कृषि विभाग लगातार फसलों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।भावनगर जिले में अब तक करीब 51 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई है। समय-समय पर हो रही बारिश से फसलों को आवश्यक नमी मिल रही है। जहां कुछ अन्य जिलों में अत्यधिक बारिश से नुकसान की स्थिति बनी है, वहीं भावनगर में अब तक मौसम खेती के अनुकूल रहा है।किसानों को उम्मीद है कि यदि आने वाले दिनों में बारिश का क्रम अच्छा बना रहा तो कपास और मूंगफली का उत्पादन बढ़ सकता है। बेहतर पैदावार और अच्छे बाजार भाव मिलने से इस खरीफ सीजन में किसानों की आय में सुधार की संभावना है।

जुलाई में CCI कपास भाव संभले

बिक्री में सुस्ती के बावजूद जुलाई में CCI की कॉटन बेल की कीमतों में सुधारकॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (CCI) ने पिछले तीन महीनों में अपनी कॉटन बेल की बिक्री में मिला-जुला ट्रेंड देखा है। जुलाई में औसत बिक्री कीमतों में सुधार हुआ, जबकि कुल बिक्री की मात्रा में गिरावट जारी रही। कीमतों का यह विश्लेषण अकोला BB SPL मोड (29 MM) बेंचमार्क पर आधारित है, जिसे इस रिपोर्ट के लिए आधार मूल्य माना गया है।CCI के आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में औसत बिक्री कीमत ₹67,170 प्रति कैंडी थी, जब कॉर्पोरेशन ने 10.22 लाख बेल बेचीं और महीने के दौरान कीमतों में छह बार बदलाव किया गया। जून में, औसत बिक्री कीमत 5.95% घटकर ₹63,175 प्रति कैंडी हो गई, जबकि बिक्री गिरकर 9.42 लाख बेल रह गई। कीमतों में पांच बार बदलाव किया गया, जो बाजार के कमजोर सेंटीमेंट और टेक्सटाइल मिलों द्वारा सावधानीपूर्वक खरीदारी को दर्शाता है।जुलाई में बाजार ने फिर से रफ्तार पकड़ी और औसत बिक्री कीमत 2.38% बढ़कर ₹64,675 प्रति कैंडी हो गई। हालांकि CCI ने महीने के दौरान कीमतों में आठ बार बदलाव किया—जो तीन महीने की अवधि में सबसे अधिक था—लेकिन कुल बिक्री और गिरकर 9.09 लाख बेल रह गई, जो बेहतर कीमतों के बावजूद धीमी मांग को दर्शाता है।जुलाई में कीमतों में सुधार से पता चलता है कि स्पिनिंग मिलों की ओर से खरीदारी में फिर से दिलचस्पी और मजबूत मांग देखी गई। हालांकि, बिक्री की मात्रा में लगातार गिरावट बाजार की बदलती स्थितियों और आयातित कपास की बढ़ती उपलब्धता के बीच खरीदारों द्वारा सावधानीपूर्वक खरीद की ओर इशारा करती है।बाजार के जानकारों का मानना है कि जुलाई में CCI द्वारा कीमतों में बार-बार बदलाव करना बाजार के मौजूदा ट्रेंड के अनुसार बिक्री को समायोजित करने के उसके प्रयासों को दर्शाता है। आगे चलकर, CCI की बिक्री और कीमतें घरेलू कपास की आवक, मिलों की मांग, आयात के ट्रेंड और टेक्सटाइल सेक्टर के समग्र सेंटीमेंट पर निर्भर करेंगी।और पढ़ें :- अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 07 पैसे मजबूत हुआ, 95.21 पर बंद हुआ

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 07 पैसे मजबूत हुआ, 95.21 पर बंद हुआ

शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 07 पैसे मजबूत हुआ और 95.21 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।घरेलू करेंसी 95.28 प्रति डॉलर पर खुली और ज़्यादातर समय दबाव में रही, साथ ही एक सीमित दायरे में कारोबार करती रही। हालांकि, इसमें थोड़ी रिकवरी हुई और दिन का कारोबार 95.21 पर खत्म हुआ, जिससे डॉलर के मुकाबले इसमें मामूली बढ़त दर्ज की गई।शेयर बाज़ार के लाइव अपडेट: सेंसेक्स लगभग 456 अंक (0.58%) गिरकर 78,499 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 में सिर्फ़ 65 अंक (0.27%) की गिरावट आई और यह 24,571 पर बंद हुआ। ब्रॉडर मार्केट में मिला-जुला रुख रहा; निफ्टी स्मॉलकैप 100 गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 में 0.2% की बढ़त हुई।और पढ़ें :- नागौर में कपास बुवाई 7 साल के निचले स्तर पर

नागौर में कपास बुवाई 7 साल के निचले स्तर पर

गुलाबी सुंडी और बढ़ती लागत ने छीनी ‘सफेद सोना’ की चमक, नागौर में सात वर्षों के निचले स्तर पर पहुंची कपास की बुवाईनागौर: राजस्थान के नागौर जिले में कभी किसानों की पहली पसंद मानी जाने वाली नकदी फसल कपास अब धीरे-धीरे अपनी चमक खोती जा रही है। ‘सफेद सोना’ कहलाने वाली यह फसल अब किसानों के लिए कम लाभदायक साबित हो रही है। लगातार घटती पैदावार, खेती की बढ़ती लागत, गुलाबी सुंडी का बढ़ता प्रकोप और बाजार में अपेक्षित मूल्य नहीं मिलने के कारण किसानों का रुझान तेजी से वैकल्पिक फसलों की ओर बढ़ रहा है। इसका असर खरीफ 2026 की बुवाई में भी साफ दिखाई दिया है।कृषि विभाग ने खरीफ 2026 के लिए जिले में 62,000 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन सीजन के अंत तक केवल 32,150 हेक्टेयर क्षेत्र में ही बुवाई हो सकी। यह निर्धारित लक्ष्य का लगभग 52 प्रतिशत है और पिछले सात वर्षों में जिले में कपास के सबसे कम रकबे को दर्शाता है।कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नागौर की बलुई दोमट मिट्टी में लंबे समय तक लगातार कपास की खेती किए जाने से मिट्टी की उर्वरता और उत्पादकता प्रभावित हुई है। उनका कहना है कि कपास मुख्य रूप से काली मिट्टी की फसल है। ऐसे में बलुई दोमट क्षेत्रों में लगातार इसकी खेती करने से उत्पादन में लगातार गिरावट आई है। इसी कारण इस वर्ष किसानों ने ग्वार जैसी वैकल्पिक फसलों को प्राथमिकता दी। खरीफ 2026 में जिले में 1,24,250 हेक्टेयर क्षेत्र में ग्वार की बुवाई दर्ज की गई।किसानों के अनुसार वर्तमान में कपास का औसत उत्पादन केवल 1.5 से 2 क्विंटल प्रति बीघा रह गया है। लगभग 10 बीघा में कपास की खेती से कुल आय करीब 1.20 लाख रुपये तक पहुंचती है, लेकिन बीज, उर्वरक, कीटनाशक, सिंचाई, मजदूरी और अन्य कृषि लागत घटाने के बाद शुद्ध लाभ बहुत कम बचता है। ऐसे में कपास की खेती किसानों के लिए पहले जितनी लाभदायक नहीं रह गई है।पिछले सात वर्षों के आंकड़े भी कपास के घटते रकबे की पुष्टि करते हैं। वर्ष 2020 में जिले में 56,143 हेक्टेयर, 2021 में 58,457 हेक्टेयर, 2022 में 74,557 हेक्टेयर, 2023 में 48,500 हेक्टेयर, 2024 में 59,302 हेक्टेयर, 2025 में 37,250 हेक्टेयर तथा 2026 में घटकर केवल 32,150 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई दर्ज की गई, जो सात वर्षों का सबसे निचला स्तर है।शुरुआती वर्षों में बीटी कपास (Bt Cotton) ने गुलाबी सुंडी के प्रकोप को काफी हद तक नियंत्रित किया था, लेकिन अब यह कीट बीटी किस्मों को भी प्रभावित करने लगा है। इसके कारण किसानों का कीटनाशकों पर खर्च लगातार बढ़ रहा है। हालांकि सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए मध्यम रेशा (Medium Staple) कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य 7,710 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, लेकिन कम पैदावार और बढ़ती उत्पादन लागत के कारण किसानों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। यही वजह है कि नागौर के प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्र डेगाना और मेड़ता में भी किसान तेजी से ग्वार तथा अन्य वैकल्पिक फसलों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गुलाबी सुंडी पर प्रभावी नियंत्रण, लागत में कमी और बेहतर बाजार मूल्य सुनिश्चित नहीं किए गए, तो आने वाले वर्षों में जिले में कपास का रकबा और घट सकता है।और पढ़ें :- तेलंगाना में खरीफ बुवाई तेज

तेलंगाना में खरीफ बुवाई तेज

देर से हुई बारिश से तेलंगाना में खरीफ बुआई बढ़ी, लेकिन कम जल भंडारण ने बढ़ाई चिंताहैदराबाद: तेलंगाना में मानसून की सक्रियता बढ़ने के बाद खरीफ (वानकालम) सीजन की बुआई में उल्लेखनीय तेजी आई है। 5 अगस्त तक राज्य में 96.74 लाख एकड़ क्षेत्र में बुआई हो चुकी है, जो सामान्य खरीफ रकबे 132.38 लाख एकड़ का लगभग 73 प्रतिशत है। हालांकि, प्रमुख जलाशयों में पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम जल भंडारण सिंचाई की उपलब्धता और फसलों की उत्पादकता को लेकर चिंता का कारण बना हुआ है।22 जुलाई तक राज्य में केवल 68.43 लाख एकड़ (51.69 प्रतिशत) क्षेत्र में बुआई हुई थी। जुलाई के दूसरे पखवाड़े में मानसून के सक्रिय होने तथा महाराष्ट्र, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ में हुई भारी बारिश से कृष्णा और गोदावरी नदी बेसिन में जल प्रवाह बढ़ा, जिससे किसानों को बुआई तेज करने का अवसर मिला।सिंचाई को लेकर अनिश्चितता के कारण जिन किसानों ने बुआई टाल दी थी, उन्होंने हालिया बारिश के बाद तेजी से खेतों में काम शुरू किया। वर्षा आधारित फसलों, जिनमें कपास, मक्का, ज्वार, बाजरा, रागी, दालें, मूंगफली और सोयाबीन शामिल हैं, की बुआई में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, सिंचित क्षेत्रों में धान की नर्सरी तैयार की जा रही है।इसके बावजूद जल उपलब्धता चिंता का विषय बनी हुई है। 5 अगस्त तक राज्य के प्रमुख जलाशयों में 438.90 टीएमसी फीट पानी दर्ज किया गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 725.36 टीएमसी फीट था। हालांकि, दो सप्ताह पहले के 321.24 टीएमसी फीट की तुलना में जल भंडारण में सुधार हुआ है, लेकिन पिछले वर्ष के मुकाबले बड़ी कमी भविष्य में सिंचाई की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ा रही है।फसलवार आंकड़े भी मिश्रित तस्वीर पेश करते हैं। धान की बुआई 26.16 लाख एकड़ तक पहुंची है, जबकि इसका सामान्य रकबा 65.96 लाख एकड़ है। पिछले वर्ष इसी अवधि में धान की बुआई 28.74 लाख एकड़ में हुई थी। इसके विपरीत, कपास की बुआई 46.80 लाख एकड़ तक पहुंच गई, जो सामान्य रकबे 47.41 लाख एकड़ के लगभग बराबर है और पिछले वर्ष के 43.56 लाख एकड़ से अधिक है। वहीं, दालों की बुआई भी पिछले वर्ष की तुलना में बढ़कर 5.48 लाख एकड़ हो गई है।प्रोफेसर के. जयशंकर तेलंगाना राज्य कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, इस वर्ष कई किसानों ने धान की बजाय वैकल्पिक फसलों को प्राथमिकता दी है। हालांकि, यदि आने वाले सप्ताहों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई और जलाशयों का जल स्तर अपेक्षित रूप से नहीं बढ़ा, तो खरीफ फसलों की उत्पादकता और पैदावार प्रभावित हो सकती है।और पढ़ें :- जुलाई में कपास बाजार में सुधार

जुलाई में कपास बाजार में सुधार

जून में गिरावट के बाद जुलाई में भारत के कॉटन मार्केट में सुधार हुआपिछले तीन महीनों में भारत में 29 MM कॉटन कैंडी की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया। मई 2026 में कीमतें ₹65,700 प्रति कैंडी थीं, जो जून में 5.1% घटकर ₹62,350 हो गईं। ऐसा बेहतर सप्लाई की उम्मीद, स्पिनिंग मिलों की सतर्क खरीदारी और बाजार के कमजोर सेंटीमेंट के कारण हुआ।जुलाई में बाजार ने फिर से रफ्तार पकड़ी और मिलों की नई मांग और खरीदारी में दिलचस्पी बढ़ने से कीमतें 3.7% बढ़कर ₹64,650 प्रति कैंडी हो गईं। इस सुधार के बावजूद, कीमतें मई के स्तर से ₹1,050 प्रति कैंडी कम रहीं, जिससे पता चलता है कि बाजार जून की गिरावट से पूरी तरह उबर नहीं पाया है।आगे की बात करें तो, इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि निकट भविष्य में कॉटन की कीमतें काफी हद तक स्थिर रहेंगी। हालांकि, मार्केटिंग सीजन आगे बढ़ने के साथ घरेलू कॉटन की आवक धीरे-धीरे कम हो रही है, जबकि सप्लाई की कमी को पूरा करने और टेक्सटाइल इंडस्ट्री की जरूरतों को पूरा करने के लिए कॉटन का आयात बढ़ रहा है। भविष्य में, बाजार की दिशा घरेलू आवक की गति, मॉनसून पर निर्भर फसल की संभावनाओं, टेक्सटाइल सेक्टर की मांग, निर्यात ऑर्डर, कॉटन आयात की मात्रा और वैश्विक कॉटन कीमतों के ट्रेंड पर निर्भर करेगी। कुल मिलाकर, जुलाई में आई तेजी से पता चलता है कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद बुनियादी मांग बनी हुई है, हालांकि अधिक आयात कीमतों में किसी भी तेज उछाल को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।

Related News

Youtube Videos

Cotton Rate Today 😱 | आज के कपास के भाव | 13 October 2026 #cotton
Cotton Rate Today 😱 | आज के कपास के भाव | 13 October 2026 #...
कपास की कीमतों में उछाल 😱 CCI ने बढ़ाए ₹500 प्रति कैंडी | Cotton Market Rate Today 12 Oct 2026
कपास की कीमतों में उछाल 😱 CCI ने बढ़ाए ₹500 प्रति कैंडी | C...
साप्ताहिक कपास बाज़ार में तेज़ी 😱 | CCI रुई गठानें बिक्री रिपोर्ट | Weekly Cotton Market 10 Oct 2026
साप्ताहिक कपास बाज़ार में तेज़ी 😱 | CCI रुई गठानें बिक्री र...

Circular

title Created At Action
नंदुरबार में खरीफ बुवाई रुकी 08-08-2026 12:32:42 view
CCI ने कपास भाव ₹700 बढ़ाए 07-08-2026 18:40:14 view
नागालैंड में यार्न बैंक योजना शुरू 07-08-2026 18:36:42 view
भावनगर में कपास बुवाई रिकॉर्ड 07-08-2026 18:32:52 view
जुलाई में CCI कपास भाव संभले 07-08-2026 17:36:09 view
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 07 पैसे मजबूत हुआ, 95.21 पर बंद हुआ 07-08-2026 15:50:17 view
नागौर में कपास बुवाई 7 साल के निचले स्तर पर 07-08-2026 13:47:34 view
तेलंगाना में खरीफ बुवाई तेज 07-08-2026 12:25:04 view
जुलाई में कपास बाजार में सुधार 07-08-2026 11:02:18 view
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 6 पैसे गिरकर 95.28 पर खुला। 07-08-2026 10:53:58 view
डॉलर के मुकाबले रुपया 09 पैसे कमजोर हुआ, 95.22 पर बंद हुआ 06-08-2026 15:47:46 view
Application Download
Whatsapp Contact