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हरियाणा: कागजों तक सीमित कपास की सरकारी खरीद, ना आढ़तियों को जानकारी...ना किसानों को पता

हरियाणा: सरकार केवल कागज के लिए कपास खरीदती है और न तो किसानों और न ही आढ़तियों को इसकी जानकारी है।चरखी दादरी(पुनीत): जिले में कपास की सरकारी खरीद महज कागजों तक सीमित है। जिले की मंडियों में कपास की सरकार खरीद दिखाई नहीं दे रही है। हालांकि मार्केट कमेटी के अधिकारियों का दावा है कि जिले में कपास की सरकारी खरीद की जा रही है और करीब 1500 क्विंटल की खरीद भी गई है। वहीं दूसरी ओर चरखी दादरी आढ़ती एसोसिएशन के उप प्रधान राधेश्याम मित्तल ने कहा कि जिले में कपास की सरकारी खरीद नहीं हो रही है जिससे आढ़तियों व किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने तो सरकार से चरखी दादरी जिले में कपास की खरीद शुरू करने की मांग भी की है। इसके अलावा किसानों ने भी सरकारी खरीद होने से इंकार किया है।बता दे कि चरखी दादरी जिले में खरीफ सीजन के दौरान मुख्य रूप से बाजरा, ग्वार और कपास की खेती की जाती है। खरीफ सीजन 2024 के दौरान जिले में करीब 45 हजार एकड़ में किसानों द्वारा कपास की बुआई की गई थी। गुलाबी सूंडी व मौसम की मार के चलते किसानों की आशा के अनुरूप कपास का उत्पादन नहीं हुआ। वहीं दूसरी ओर किसानों की फसल भी एमएसपी के तहत नहीं खरीदी जाने के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है और किसान औने-पौने दामों पर अपनी फसल बेचने को मजबूर हैं। हालांकि मार्केट कमेटी के अधिकारियों का दावा है कि कपास की सरकारी खरीद की जा  रही है लेकिन उनके दावे के अनुसार भी महज 1500 क्विंटल कपास ही खरीदी गई है जो ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।आढ़ती एसोसिएशन ने सरकारी खरीद शुरू करने की मांग कीचरखी दादरी आढ़ती एसोसिएशन के उप प्रधान राधेश्याम मित्तल ने कहा कि कई जिलो में कपास की खरीद हुई है लेकिन चरखी दादरी जिले में अभी तक कपास की खरीद शुरू नहीं हो पाई है जिसके चलते आढ़तियों व किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि चरखी दादरी जिले में कपास की अच्छीखासी पैदावर होती है और सीजन के समय प्रतिदिन 10 से 15 हजार क्विंटल और वर्तमान में भी प्रतिदिन करीब 1500 क्विंटल कपास लेकर किसान मंडी पहुंच रहे हैं लेकिन सरकारी खरीद नहीं होने के कारण किसानों को उचित भाव नहीं मिल पा रहा है। जिससे आढ़तियों व किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि  चरखी दादरी जिले में भी कपास की सरकारी खरीद शुरू की जाये।कपास की सरकारी खरीद की जा रही है : सह सचिवचरखी दादरी मार्केट कमेटी के सह सचिव विकास कुमार ने कहा कि चरखी दादरी जिले में कपास की सरकारी खरीद की जा रही है। सीसीआई द्वारा 4 से 5 मिलों को खरीद की परमिशन दी गई है। उन्होंने कहा कि जिले में अभी तक करीब 1500 क्विंटल कपास की खरीद जा चुकी है।किसानों को खरीद की जानकारी नहीं। किसान सतबीर फोगाट व अन्य ने कहा कि जिले में सरकारी खरीद की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। किसानों  से सरकारी खरीद के तहत कोई कपास नहीं खरीदी गई है। किसानों का आरोप है कि बड़े आढ़तियों से कपास खरीदकर सीधी मिलों में भेजी जाती हो तो उन्हें पता नहीं लेकिन मंडी में कपास खरीद अभी तक नहीं हुई है।और पढ़ें :>डॉलर के मुकाबले रुपया 84.85 के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंचा

तेलंगाना में कपास किसानों को खरीद संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है: कांग्रेस सांसद

कांग्रेस सांसद: तेलंगाना कपास उत्पादकों को खरीद में परेशानी हो रही हैहैदराबाद : भोंगीर के सांसद चमाला किरण कुमार रेड्डी ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह को किसानों की शिकायतों को उजागर करने वाले पत्र सौंपते हुए कहा कि भारतीय कपास निगम (सीसीआई) की खरीद प्रथाओं के कारण तेलंगाना में कपास किसानों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।उन्होंने कहा कि ये चिंताएं तेलंगाना कृषि और किसान कल्याण आयोग के अध्यक्ष कोडंडा रेड्डी ने उठाई थीं। सांसद ने कहा कि सीसीआई की कठोर खरीद शर्तों से छोटे और सीमांत किसान विशेष रूप से प्रभावित होते हैं।भोंगीर के सांसद चमाला किरण कुमार रेड्डी ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह को किसानों की शिकायतों को उजागर करने वाले पत्र सौंपते हुए कहा कि ये चिंताएं तेलंगाना कृषि और किसान कल्याण आयोग के अध्यक्ष कोडंडा रेड्डी ने उठाई थीं। सांसद ने कहा कि सीसीआई की सख्त खरीद शर्तों से छोटे और सीमांत किसान खास तौर पर प्रभावित हैं।"गुणवत्ता जांच और आपूर्ति मोड के बहाने सीसीआई द्वारा बनाई गई कुछ बाधाओं से किसान चिंतित हैं। हालांकि वे ग्रेडिंग के महत्व को समझते हैं, लेकिन कुछ मामलों में उनके कपास की खरीद से साफ इनकार करना अस्वीकार्य है," सांसद ने अपने पत्र में कहा।उन्होंने पैकेजिंग और अन्य मापदंडों पर मौखिक निर्देश जारी करने के लिए स्थानीय सीसीआई अधिकारियों की भी आलोचना की, इसे 'बाद में सोचा गया' कहा, जो किसानों की मुश्किलों को बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान परिवहन के दौरान कपास को दूषित होने से बचाने के लिए बैग का उपयोग करते हैं।उन्होंने कहा, "सीसीआई को किसानों द्वारा लाए गए कपास को बिना अनावश्यक आपत्ति उठाए स्वीकार करना चाहिए। यह आश्चर्यजनक है कि सीसीआई किसानों द्वारा बैग का उपयोग करने पर भी आपत्ति कर रहा है।"और पढ़ें :-  तेलंगाना के आदिलाबाद में पहला कपास अनुसंधान केंद्र बनेगा

कपास खरीदी में तेजी, सोयाबीन में गिरावट, खरीदी समाप्ति में बचे सिर्फ 3 सप्ताह

कपास खरीदी बढ़ी, सोयाबीन में मंदी, खरीदी खत्म होने को मात्र 3 हफ्ते शेषजिले में समर्थन मूल्य पर कपास की खरीदी तो बढ़ गई लेकिन सोयाबीन की खरीदी की चाल धीमी ही है। जबकि खरीदी शुरू होने को सात सप्ताह हो गए हैं। अब तक जिले में मात्र 6 हजार क्विंटल ही सोयाबीन खरीदा गया है। इधर सीसीआई की कपास खरीदी में तेजी आई है। सीसीआई द्वारा अब तक खंडवा व मूंदी मंडी में 30 हजार क्विंटल कपास की खरीदी कर ली है।जिले में सोयाबीन व कपास की खरीदी समर्थन मूल्य पर जारी है। सोयाबीन की खरीदी 25 अक्टूबर से जिले के 8 केंद्रों पर तो कपास की खरीदी भारतीय कपास निगम द्वारा खंडवा स्थित उपज मंडी व मूंदी उपज मंडी में की जा रही है। लेकिन किसान मंडी से अधिक दाम मिलने पर कपास की खरीदी को अधिक महत्व दे रहे हैं, जबकि सोयाबीन के सरकारी दाम मंडी से कम होने व नगद भुगतान नहीं मिलने की स्थिति में किसान खरीदी केंद्रों से दूरी बनाए हुए हैं।इसलिए बनी यह नौबत जिले में सोयाबीन खरीदी की स्थिति इसलिए खराब है क्योंकि शासन ने खरीदी के जो सख्त नियम बनाए हैं उन पर किसान उपज बेचने को तैयार नहीं है। उपज बेचने पर उन्हें यहां पर नगद भुगतान भी नहीं मिल रहा। स्थिति यह है कि अब तक 393 किसानों ने 6 हजार 755 क्विंटल कपास ही शासन को सरकारी मूल्य पर बेचा है।पिछले सात सप्ताह में आठ केंद्रों पर खरीदी की स्थिति ठीक नहीं है। किसानों ने इन केंद्रों पर अब तक 6 हजार 755 क्विंटल सोयाबीन ही बेचा है। जिला विपणन संघ के अनुसार 9 दिसंबर तक जिले की तहसील सहकारी कृषि विपणन संघ मार्केटिंग खंडवा के केंद्र सेंट्रल वेयर हाउस में 338 क्विंटल, तहसील सहकारी कृषि विपणन संघ मार्केटिंग खंडवा के केंद्र जय भोले वेयर हाउस गुड़ी खेड़ा में 122.50 क्विंटल, सेवा सहकारी समिति पंधाना के कृष्णा वेयर हाउस में 2724 क्विंटल, हरसूद को-ऑपरेटिव मार्केटिंग सोसायटी, न्यू हरसूद में मंत्री वेयर हाउस में 992 क्विंटल, सेवा सहकारी समिति मूंदी के श्री बालाजी वेयर हाउस केहलारी में 1631 क्विंटल, सेवा सहकारी समिति गंभीर के सिद्धी वेयर हाउस में 265 क्विंटल, कृषक सहकारी विपणन एवं प्रक्रिया समिति खालवा के धीर वेयर हाउस में 117 क्विंटल व सेवा सहकारी समिति रीछफल स्थित अक्षिता एग्रो वेयर हाउस पुनासा में 608 क्विंटल उपज की खरीदी हो चुकी है।और पढ़ें : रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 7 पैसे गिरकर 84.73 पर आया

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