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संखेड़ा में अच्छी बारिश से कपास बुवाई शुरू

सांखेड़ा (गुजरात) में अच्छी बारिश से किसानों में खुशी, कपास की बुआई शुरूगुजरात के सांखेड़ा क्षेत्र में गुरुवार रात हुई अच्छी बारिश किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे किसानों के चेहरे पर अब खुशी दिखाई दे रही है। खरीफ सीजन की बुआई के लिए अनुकूल मानी जा रही इस वर्षा के बाद किसानों ने कपास सहित विभिन्न फसलों की बुआई का कार्य तेज़ी से शुरू कर दिया है।जानकारी के अनुसार, यह मानसून की दूसरी महत्वपूर्ण बारिश है, जिसने खेतों में पर्याप्त नमी उपलब्ध कराई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, कपास की बुआई के लिए मिट्टी में उचित नमी का होना बेहद आवश्यक होता है और वर्तमान बारिश ने इसके लिए अनुकूल परिस्थितियाँ तैयार कर दी हैं। यही कारण है कि आज सुबह से ही बड़ी संख्या में किसान अपने खेतों में सक्रिय नजर आए। कई स्थानों पर किसान और खेत मज़दूर कपास के बीज बोने में जुटे हुए दिखाई दिए।बारिश के कारण क्षेत्र के तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। पिछले कई दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी और उमस से लोगों को राहत मिली है। मौसम सुहावना होने से किसानों के साथ-साथ आम नागरिकों में भी उत्साह का माहौल देखने को मिला। ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश के बाद हरियाली की उम्मीद बढ़ गई है और किसान बेहतर उत्पादन की आशा कर रहे हैं।कई किसानों ने बताया कि समय पर हुई इस बारिश से खेती की तैयारियों को गति मिली है। खेतों में ट्रैक्टर चलाकर भूमि को समतल करने, जुताई करने और खरपतवार साफ करने का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है। कुछ किसान अन्य खरीफ फसलों की बुआई की तैयारी में भी लगे हुए हैं।कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में भी मानसून सामान्य बना रहता है और नियमित बारिश होती है, तो इस वर्ष फसल उत्पादन बेहतर रहने की संभावना है। फिलहाल सांखेड़ा क्षेत्र में किसानों के बीच उत्साह और उम्मीद का माहौल है तथा खेती-किसानी की गतिविधियां पूरे जोर-शोर से जारी हैं।और पढ़ें :- रुपया डॉलर के मुकाबले 02 पैसे बढ़कर 94.32 पर बंद हुआ।

टेक्सास में देरी के बावजूद अमेरिकी कपास बुवाई आगे बढ़ी

टेक्सास में देरी के बावजूद अमेरिकी कॉटन फसल की प्रगति जारीअमेरिका में कॉटन की बुआई अधिकांश राज्यों में लगातार आगे बढ़ रही है, हालांकि कुछ प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों में मौसम संबंधी चुनौतियों के कारण प्रगति प्रभावित हुई है। USDA की नवीनतम फसल प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, 14 जून तक देश के निर्धारित कॉटन क्षेत्र का 86% हिस्सा बोया जा चुका था। यह आंकड़ा पांच वर्षीय औसत से दो प्रतिशत अंक कम है, लेकिन पिछले वर्ष के इसी समय दर्ज 84% से बेहतर है।USDA के मौसम विज्ञानी ब्रैड रिप्पी ने बताया कि एरिज़ोना, कैलिफ़ोर्निया और मिसौरी जैसे राज्यों में बुआई पूरी हो चुकी है और वहां 100% निर्धारित क्षेत्र में फसल लगाई जा चुकी है। हालांकि, देश का सबसे बड़ा कॉटन उत्पादक राज्य टेक्सास अभी भी सामान्य गति से पीछे चल रहा है।रिप्पी के अनुसार, टेक्सास ऐसा प्रमुख राज्य है जो अपने पांच वर्षीय औसत से कम से कम पांच प्रतिशत अंक पीछे है। राज्य में अब तक 80% बुआई पूरी हुई है, जबकि सामान्य औसत 85% है। हाल के सप्ताहों में हुई भारी बारिश ने खेतों में कामकाज को प्रभावित किया है, जिससे देर से होने वाली बुआई की रफ्तार धीमी पड़ गई है। हालांकि पर्याप्त नमी आगे चलकर फसल की स्थापना और शुरुआती विकास के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।बुआई के साथ-साथ फसल का विकास भी आगे बढ़ रहा है। 14 जून तक राष्ट्रीय स्तर पर 19% कॉटन फसल स्क्वेरिंग अवस्था में पहुंच चुकी थी, जो पांच वर्षीय औसत से दो प्रतिशत अंक और पिछले वर्ष की तुलना में एक प्रतिशत अंक अधिक है। स्क्वेरिंग वह महत्वपूर्ण चरण है जब पौधों पर फूलों की कलियां विकसित होना शुरू होती हैं।एरिज़ोना इस मामले में सबसे आगे है, जहां 44% फसल स्क्वेरिंग अवस्था में पहुंच चुकी है। वहीं, देशभर में लगभग 2% कॉटन फसल में बॉल बनने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह आंकड़ा पांच वर्षीय औसत और पिछले वर्ष दोनों से एक प्रतिशत अंक कम है।विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में मौसम की स्थिति अमेरिकी कॉटन उत्पादन की दिशा तय करेगी। किसान और बाजार विश्लेषक फसल की प्रगति तथा पैदावार क्षमता पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।और पढ़ें :- चोपटा में ओलावृष्टि से नरमा और कपास फसल पर खतरा

चोपटा में ओलावृष्टि से नरमा और कपास फसल पर खतरा

हरियाणा : चोपटा क्षेत्र में बारिश के साथ ओलावृष्टि, नरमा-कपास की फसल को नुकसान की आशंकाचोपटा। नाथूसरी चोपटा क्षेत्र में वीरवार दोपहर मौसम ने अचानक करवट ली। कई गांवों में बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। बारिश से किसानों को राहत मिली, लेकिन ओलों के कारण नरमा और कपास की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।क्षेत्र के कुम्हारिया, खेड़ी, रामपुरा ढिल्लों, जोड़किया, कुतियाना और बरासरी समेत कई गांवों में हल्की से तेज बारिश दर्ज की गई। बारिश के बाद मौसम सुहावना हो गया तथा खेतों में नमी बढ़ने से ग्वार और बाजरे की बुवाई करने वाले किसानों को लाभ मिला है। लंबे समय से वर्षा का इंतजार कर रहे किसानों का कहना है कि इससे बंजर भूमि में भी बुवाई कार्य को गति मिलेगी।वहीं, गांव जमाल में करीब पांच मिनट तक ओलावृष्टि होने से नरमा और कपास की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि मौजूदा समय में बारिश फसलों के लिए लाभदायक है, लेकिन ओलावृष्टि और तेज हवाएं नुकसान का कारण बन सकती हैं।किसान ओमप्रकाश, सुदेश कुमार, जगदीश और मोहनलाल ने बताया कि क्षेत्र में लगभग 22 हजार हेक्टेयर भूमि में नरमे की बुवाई की गई है। ऐसे में ओलावृष्टि का असर बड़ी संख्या में किसानों की फसलों पर पड़ सकता है। किसानों ने प्रशासन से फसलों की स्थिति का सर्वे कर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।और पढ़ें :- एमपी में 72 घंटे बाद तेज हो सकता है मानसून

एमपी में 72 घंटे बाद तेज हो सकता है मानसून

MP Monsoon Update: 72 घंटे बाद सक्रिय हो सकता है मानसून, भोपाल से 550 किमी दूर अटका मानसूनभोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है और इसकी उत्तरी सीमा भोपाल से करीब 550 किलोमीटर दूर बनी हुई है। इसके चलते प्रदेश में मानसून के आगमन में लगभग 5 दिन की अतिरिक्त देरी होने की संभावना जताई गई है।मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में सक्रिय मौसम प्रणालियों के कमजोर पड़ने से मानसून की प्रगति प्रभावित हुई है। हवाओं की दिशा में बदलाव और वातावरण में नमी की कमी के कारण मानसून फिलहाल आगे नहीं बढ़ पा रहा है। हालांकि, अगले 72 घंटों में मौसम की स्थिति अनुकूल होने की उम्मीद है, जिससे मानसून की चाल दोबारा तेज हो सकती है।वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ. वेद प्रकाश सिंह ने बताया कि अगले 48 घंटों में एक नया कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके बाद मानसून को आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां मिल सकती हैं।मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, मानसून मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से से प्रवेश करेगा। डिंडोरी, मंडला या अमरकंटक के रास्ते इसके प्रदेश में पहुंचने की संभावना है। मानसून के प्रवेश के बाद अगले 72 से 96 घंटों के भीतर जबलपुर, शहडोल और रीवा संभाग में अच्छी बारिश शुरू हो सकती है।वहीं, राजधानी भोपाल और इंदौर सहित प्रदेश के मध्य एवं पश्चिमी हिस्सों में जून के अंतिम सप्ताह तक मानसून सक्रिय होने की संभावना जताई गई है। तब तक कई जिलों में उमस और गर्मी का असर बना रह सकता है।कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे खरीफ फसलों की बुवाई पहली अच्छी और पर्याप्त बारिश के बाद ही करें, ताकि बीजों को नुकसान से बचाया जा सके।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 1 पैसे की गिरावट के साथ 94.34 पर खुला.

भारत-यूके व्यापार समझौता 15 जुलाई से लागू

भारत-UK ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई 2026 से होगा लागूप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुशी जताते हुए कहा है कि भारत-UK कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) 15 जुलाई 2026 से लागू हो जाएगा।प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, "यह जानकर प्रसन्नता हुई कि भारत-UK कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई 2026 से प्रभावी होगा। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को नई गति प्रदान करेगा।"फ्रांस के एवियन में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer के बीच हुई बैठक में दोनों नेताओं ने भारत-UK व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह समझौता भारतीय किसानों, श्रमिकों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs), स्टार्ट-अप्स और नवोन्मेषकों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा।प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, दोनों नेताओं ने पिछले वर्ष हुई पारस्परिक यात्राओं के बाद भारत-UK संबंधों में आई प्रगति की समीक्षा की। साथ ही, 'विजन 2035' के तहत व्यापार एवं आर्थिक विकास, रक्षा और सुरक्षा, जलवायु कार्रवाई एवं हरित ऊर्जा, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार, शिक्षा तथा लोगों के बीच संबंधों जैसे प्रमुख क्षेत्रों में हुई प्रगति का स्वागत किया।और पढ़ें :- रुपया डॉलर के मुकाबले 36 पैसे मजबूत होकर 94.33 पर बंद हुआ।

कमजोर रुपये से टेक्सटाइल निर्यातकों को राहत, चुनौतियां बरकरार

FY26 में रुपये की कमजोरी से टेक्सटाइल निर्यातकों को राहत, लेकिन चुनौतियां बरकरारअमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में पिछले एक दशक के दौरान करीब 46% की गिरावट दर्ज की गई है। आमतौर पर कमजोर रुपया निर्यातकों के लिए लाभकारी माना जाता है क्योंकि इससे भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अपेक्षाकृत सस्ते हो जाते हैं। हालांकि, इस अवधि में भारत के टेक्सटाइल और परिधान (गारमेंट) निर्यात में केवल सीमित बढ़ोतरी हुई है, जो वैश्विक प्रतिस्पर्धा, कमजोर मांग और बाजार की अनिश्चितताओं को उजागर करती है।वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2014-15 में जब रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग 65 रुपये पर था, तब भारत का टेक्सटाइल और परिधान निर्यात करीब 29.47 अरब डॉलर था। इसके बाद रुपये में लगातार कमजोरी आई और 31 मार्च 2026 को यह 94.83 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। इसके बावजूद, वित्त वर्ष 2025-26 में टेक्सटाइल और परिधान निर्यात घटकर 35.80 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले वित्त वर्ष के 36.61 अरब डॉलर की तुलना में 2% कम है।विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये की कमजोरी का लाभ निर्यातकों को मिला, लेकिन यह वैश्विक मांग में सुस्ती और प्रतिस्पर्धी देशों की बढ़ती मौजूदगी की भरपाई नहीं कर सका। खासकर परिधान निर्यात पिछले कुछ वर्षों से दबाव में बना हुआ है। उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि निर्यात मूल्य में मामूली बढ़ोतरी के बावजूद निर्यात मात्रा (वॉल्यूम) के स्तर पर गिरावट आई है। कुछ अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2014-15 और 2025-26 के बीच शिपमेंट में लगभग एक-तिहाई तक कमी आई हो सकती है।कॉटन टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के कार्यकारी निदेशक सिद्धार्थ राजगोपाल ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में अमेरिका से ऑर्डर घटने के बावजूद चीन, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे बाजारों से मांग में सुधार हुआ, जिससे निर्यात को कुछ सहारा मिला। वहीं, पावरलूम डेवलपमेंट एंड एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन के. शक्तिवेल ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में अफ्रीकी देशों को निर्यात में कुछ समय के लिए तेजी आई, लेकिन कुल मिलाकर यह उद्योग के लिए बेहद अनिश्चित दौर रहा।उद्योग का मानना है कि आने वाले वर्षों में निर्यात वृद्धि केवल रुपये की कमजोरी पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने, नए बाजारों में पहुंच बनाने और वैश्विक मांग में सुधार पर भी निर्भर करेगी।और पढ़ें :- उत्तर भारत में कपास रकबा 22% घटा, धान की ओर बढ़ा रुझान

उत्तर भारत में कपास रकबा 22% घटा, धान की ओर बढ़ा रुझान

उत्तर भारत में कपास का रकबा घटा, किसानों का झुकाव धान की ओरउत्तर भारत में इस खरीफ सीजन के दौरान कपास की खेती का रकबा करीब 22 प्रतिशत घट गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसानों का रुझान अब धान की खेती की ओर बढ़ रहा है, क्योंकि इसमें सरकारी खरीद की गारंटी और अपेक्षाकृत बेहतर आय की संभावना है।कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में इस वर्ष लगभग 9 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल यह रकबा 11.56 लाख हेक्टेयर था। 12 जून तक देशभर में कपास का कुल रकबा 9.53 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया, जो एक वर्ष पहले 13.19 लाख हेक्टेयर था। हालांकि गुजरात, कर्नाटक और राजस्थान के कुछ हिस्सों में अभी भी बुवाई जारी है।राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो पंजाब में कपास का रकबा 1.19 लाख हेक्टेयर से घटकर 0.80 लाख हेक्टेयर रह गया है। हरियाणा में यह 3.94 लाख हेक्टेयर से घटकर 2.92 लाख हेक्टेयर और राजस्थान में 6.43 लाख हेक्टेयर से घटकर 5.28 लाख हेक्टेयर हो गया है। हालांकि कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) की क्रॉप कमेटी के चेयरमैन अतुल गनात्रा का मानना है कि राजस्थान के कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश के कारण कपास का रकबा स्थिर रह सकता है या इसमें 3-4 प्रतिशत की वृद्धि भी हो सकती है।विशेषज्ञों का कहना है कि कपास की खेती किसानों के लिए लगातार जोखिमपूर्ण होती जा रही है। साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर के संस्थापक निदेशक भागीरथ चौधरी के अनुसार, पिंक बॉलवर्म का बढ़ता प्रकोप, मौसम की अनिश्चितताएं और लंबे समय तक एमएसपी से नीचे रहने वाली बाजार कीमतें किसानों का भरोसा कमजोर कर रही हैं। इसके विपरीत, धान की खेती में खरीद की गारंटी और बेहतर मुनाफे की संभावना किसानों को आकर्षित कर रही है।सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ कॉटन रिसर्च के पूर्व प्रमुख दिलीप मोंगा के अनुसार, उत्तर भारत में कपास का रकबा पिछले कई वर्षों से लगातार घट रहा है। मौसम की मार, कीटों का दबाव और अन्य फसलों से मिलने वाले बेहतर आर्थिक लाभ किसानों को कपास से दूर कर रहे हैं। यही वजह है कि इस सीजन में भी धान ने कपास पर बढ़त बना ली है।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 16 पैसे गिरकर 94.69 पर खुला

रायसिंहनगर में बारिश से नरमा फसल में लौटी हरियाली

राजस्थान - रायसिंहनगर (मुकलावा) : बारिश से नरमा फसल को मिली संजीवनी, खेतों में लौटी हरियालीरायसिंहनगर क्षेत्र के मुकलावा और आसपास के गांवों में हाल ही में हुई बारिश ने नरमा (कपास) की फसल को नई ऊर्जा प्रदान की है। लंबे समय से तेज गर्मी और नमी की कमी से प्रभावित फसल को वर्षा के बाद बड़ी राहत मिली है, जिससे किसानों के चेहरों पर भी संतोष नजर आने लगा है।बारिश के चलते मिट्टी में पर्याप्त नमी पहुंची है, जिसका सकारात्मक असर नरमा की फसल पर दिखाई दे रहा है। खेतों में खड़े पौधे पहले की तुलना में अधिक हरे-भरे और स्वस्थ नजर आ रहे हैं। कई स्थानों पर पौधों में नए पत्तों की वृद्धि भी देखी जा रही है, जिससे फसल की बढ़वार में सुधार के संकेत मिले हैं।ग्रामीण इलाकों में इन दिनों नरमा के खेत हरियाली से लहलहा रहे हैं। वर्षा के बाद फसल में आई ताजगी ने खेतों की तस्वीर बदल दी है और किसानों में बेहतर उत्पादन की उम्मीद जगा दी है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में मौसम अनुकूल बना रहा और समय-समय पर आवश्यक नमी मिलती रही, तो फसल का विकास और बेहतर हो सकता है।किसानों का कहना है कि बारिश ने फसल को नया जीवन दिया है। सूखे जैसी परिस्थितियों के कारण जहां फसल की स्थिति चिंताजनक हो रही थी, वहीं अब पौधों में सुधार स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। नरमा के खेतों में लौटती हरियाली को क्षेत्र के कृषि परिदृश्य के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 16 पैसे गिरकर 94.69 पर खुला

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