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गिरदावरी अनिवार्य: 17 दिन में MSP पोर्टल पर शून्य रजिस्ट्रेशन

MSP पर कपास बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन में गिरदावरी अनिवार्य अब तक 50% हुई, नतीजा-17 दिन में पोर्टल पर 1 भी पंजीयन नहींहनुमानगढ़ जंक्शन मंडी में पिड़ पर लगे कपास के ढेर। | हनुमानगढ़ कपास की समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद के लिए सीसीआई की ओर से पहली बार ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का प्रावधान लागू किया गया है। इसके लिए ‘कपास किसान’ एप लांच कर 1 सितम्बर गिरदावरी का कार्य शत-प्रतिशत पूरा होने के बाद रिपोर्ट सर्टिफाइड कर अपलोड की जाएगी। इसके बाद ही किसान पटवारी या ऑनलाइन गिरदावरी रिपोर्ट प्राप्त कर सकेंगे। पूर्ण गिरदावरी 15 अक्टूबर से पहले होने के आसार नहीं है। इस कारण कपास की सरकारी खरीद भी तय समय पर शुरू नहीं हो पाएगी। कृषि विपणन विभाग की ओर से रजिस्ट्रेशन के समय गिरदावरी की अनिवार्यता हटाने के लिए सीसीआई को पत्र भी लिखा गया है। इसके बावजूद सीसीआई ने इस संबंध में कोई आदेश जारी नहीं किए हैं। एफसीआई द्वारा गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीद भी ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के आधार पर की जाती है, लेकिन इसमें पंजीयन के दौरान गिरदावरी जरूरी नहीं होती।जब किसान मंडी में अपनी उपज लेकर आते हैं तब गिरदावरी लेकर खरीद कर ली जाती है। जबकि सीसीआई ने रजिस्ट्रेशन के समय ही गिरदावरी रिपोर्ट अपलोड करना अनिवार्य कर दिया है। इस कारण पंजीयन नहीं हो पाएगी और समय पर खरीद भी प्रारंभ नहीं हो पाएगी। इससे कृषकों को भारी नुकसान होगा। जिले में इस बार लगभग 1 लाख 80 हजार हेक्टेयर में कपास की बिजाई हुई है। बिजाई का क्षेत्र गत वर्ष से करीब 61 हजार हेक्टेयर ज्यादा है। अब तक फसल भी अच्छी स्थिति में है। ऐसे में उत्पादन भी अच्छा होने की संभावना है। अक्टूबर माह में कॉटन मंडियों में आ जाएगी।समय पर समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू नहीं हुआ तो किसानों को परेशानी होगी। जिले में इस बार 9 केंद्रों पर भारतीय कपास निगम (सीसीआई) खरीद करेगी। सीसीआई की ओर से कृषि उपज मंडी समिति हनुमानगढ़ टाउन, जंक्शन, गोलूवाला, पीलीबंगा, रावतसर, भादरा, नोहर, टिब्बी और संगरिया के सचिव को पत्र लिखकर किसानों को रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए जागरूक करने की अपील की है, लेकिन पंजीयन में गिरदावरी रिपोर्ट अपलोड करने की अनिवार्यता के चलते किसान पंजीयन नहीं करवा पा रहे हैं। जबकि सीसीआई के अधिकारियों का दावा है कि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किसानों की सुविधा के लिए शुरू किए गए हैं। पंजीयन के बाद स्लॉट के अनुसार अपनी उपज मंडियों में लेकर आ सकेंगे। किसानों को परेशान करने को गिरदावरी की बाध्यता सरकार कृषि जिंस समर्थन मूल्य पर खरीदना ही नहीं चाहती। सरकार हर दिन नए नियम बना देती है जबकि किसानों के हित के बारे में नहीं सोचती। इसलिए तरह-तरह की अड़चनें लगाई जाती है। कपास खरीदने के लिए पहले ऑनलाइन पंजीयन जरूरी किया गया। अब गिरदावरी की बाध्यता लगा दी। ये किसान बर्दाश्त नहीं करेंगे।सुरेंद्र शर्मा, किसान नेता, हनुमानगढ़ उपनिदेशक बोले-पंजीयन में गिरदावरी की अनिवार्यता हटाने के लिए महाप्रबंधक को पत्र लिखा कपास एप पर पंजीयन के समय गिरदावरी की अनिवार्यता है। इस कारण एक भी पंजीयन नहीं हुआ है। रजिस्ट्रेशन के समय गिरदावरी की बाध्यता हटाने के लिए सीसीआई के महाप्रबंधक को पत्र लिखा गया है। डीएल कालवा, उपनिदेशक कृषि विपणन विभाग, हनुमानगढ़ केंद्र सरकार ने कपास की एमएसपी 589 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाई, कृषकों को लाभ होगा: केंद्र सरकार द्वारा इस बार कपास की एमएसपी 589 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाई गई है। इस बार मध्यम स्टेपल कपास का समर्थन मूल्य 7710 रुपए प्रति क्विंटल और लंबी स्टेपल कपास का एमएसपी 8110 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। हनुमानगढ़ जिले में गत वर्षों के दौरान मध्यम और लंबी के बीच सामान्य स्टेपल कपास का उत्पादन होता है। जब मंडियों में आवक शुरू होती है उस दौरान सीसीआई की ओर से लैंथ जांच कर मूल्य निर्धारित किया जाता है। फिर उसी दर पर खरीद की जाती है। गत वर्ष मध्यम स्टेपल कपास का मूल्य 7121 रुपए प्रति क्विंटल और लंबी स्टेपल का मूल्य 7521 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित था। गत वर्ष उत्पादन कम होने के कारण समर्थन मूल्य पर खरीद नहीं हो पाई थी।व्यापारियों ने ही खुली नीलामी पर उपज खरीदी। सीजन में औसत बाजार भाव 6500 से 7000 रुपए प्रति क्विंटल रहे। गाइडलाइन उच्च स्तर से, पंजीयन में गिरदावरी जरूरी कपास उत्पादक किसान अपनी उपज बेचने के लिए कपास किसान एप पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। पंजीयन के समय गिरदावरी जरूरी है। कपास खरीद के लिए पंजीयन और खरीद संबंधी गाइडलाइन उच्च स्तर से तय होती है। केवलकृष्ण शर्मा, क्वालिटी इंस्पेक्टर सीसीआईऔर पढ़ें :- "GST 2.0: कपड़ा और लॉजिस्टिक्स को नई रफ्तार"

"GST 2.0: कपड़ा और लॉजिस्टिक्स को नई रफ्तार"

जीएसटी 2.0 से कपड़ा और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों को बढ़ावानई दिल्ली : गुरुवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, जीएसटी 2.0 के तहत वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को युक्तिसंगत बनाना एक महत्वपूर्ण सुधार है जिसका उद्देश्य संरचनात्मक विसंगतियों को दूर करना, लागत कम करना और कपड़ा एवं लॉजिस्टिक्स उद्योगों में माँग को बढ़ावा देना है। ये दोनों ही घरेलू विकास, रोज़गार और निर्यात प्रतिस्पर्धा के लिए महत्वपूर्ण हैं।मूल्य श्रृंखला में कर दरों को एक समान करके, जीएसटी सुधार उपभोक्ताओं के लिए सामर्थ्य सुनिश्चित करता है, श्रम-प्रधान क्षेत्रों में रोज़गार को बनाए रखता है और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की भारत की क्षमता को बढ़ाता है। बयान में बताया गया है कि कपड़ा क्षेत्र में, यह युक्तिसंगतीकरण विकृतियों को कम करके, परिधान की सामर्थ्य में सुधार करके, खुदरा माँग को पुनर्जीवित करके और निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देकर - रेशे से लेकर परिधान तक - पूरी मूल्य श्रृंखला को मज़बूत करता है।जीएसटी में कमी से मध्यम और निम्न आय वाले परिवारों के लिए परिधान अधिक किफायती हो जाएँगे, जिससे घरेलू माँग बढ़ेगी और छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में इसका महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा।2,500 रुपये तक के रेडीमेड कपड़ों पर जीएसटी अब 5 प्रतिशत है, जिससे परिधान अधिक किफायती हो रहे हैं और घरेलू मांग को बढ़ावा मिल रहा है।मानव निर्मित रेशों और धागों पर जीएसटी को 12 प्रतिशत और 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने से उल्टे शुल्क ढांचे को हटाया गया है और लघु एवं मध्यम उद्यमों को मजबूती मिली है, जबकि कालीनों और अन्य कपड़ा फर्श कवरिंग पर जीएसटी को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने से वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी, जैसा कि बयान में कहा गया है।इसी प्रकार, वाणिज्यिक माल वाहनों पर जीएसटी को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने से रसद लागत में कमी आएगी और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।जीएसटी सुधार परिवहन क्षेत्र तक भी विस्तारित हैं, जो रसद लागत को कम करने और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ट्रक और डिलीवरी वैन, जो भारत के लगभग 65-70 प्रतिशत माल यातायात का वहन करते हैं, कर युक्तिकरण से काफी लाभान्वित होते हैं। सस्ता माल परिवहन - प्रति टन-किमी कम लागत से कपड़ा, एफएमसीजी और ई-कॉमर्स डिलीवरी के परिवहन को लाभ होता है।कम लॉजिस्टिक्स लागत का व्यापक प्रभाव समग्र मूल्य दबाव को कम करने और मुद्रास्फीति को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा, कम लॉजिस्टिक्स लागत भारतीय वस्त्र उद्योग को विदेशों में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाती है।कपड़ा और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों में जीएसटी को युक्तिसंगत बनाना भारत के विनिर्माण आधार को मजबूत करने, सामर्थ्य में सुधार लाने और निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। संरचनात्मक विसंगतियों को कम करके और लागत दबाव को कम करके, ये सुधार उपभोक्ताओं, छोटे व्यवसायों और निर्यातकों, सभी को समान रूप से लाभान्वित करते हैं। बयान में आगे कहा गया है कि ये सुधार लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं और एक फलते-फूलते कपड़ा क्षेत्र द्वारा संचालित एक वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी भारत के दृष्टिकोण को सुदृढ़ करते हैं।और पढ़ें :- तमिलनाडु: करूर में मिनी टेक्सटाइल पार्क का उद्घाटन

तमिलनाडु: करूर में मिनी टेक्सटाइल पार्क का उद्घाटन

तमिलनाडु: करूर को मिला नया टेक्सटाइल पार्ककपड़ा एवं हथकरघा मंत्री आर. गांधी ने गुरुवार को कोडंगीपट्टी में एक मिनी टेक्सटाइल पार्क का उद्घाटन किया। यह पार्क तमिलनाडु मिनी टेक्सटाइल पार्क योजना के तहत स्थापित किया गया है।इस योजना के तहत, राज्य सरकार साझा सुविधाओं, बुनियादी ढाँचे और कारखाना भवनों की स्थापना पर होने वाले खर्च का 50% वहन करेगी। प्रत्येक पार्क के लिए अधिकतम अनुदान ₹2.5 करोड़ होगा। पार्क की स्थापना पर ₹11.87 करोड़ खर्च किए गए थे। इस व्यय में से, राज्य सरकार ने ₹2.5 करोड़ अनुदान के रूप में दिए थे। शेष राशि ओएसिस टेक्सपार्क प्राइवेट लिमिटेड ने खर्च की है।कपड़ा एवं हथकरघा मंत्री आर. गांधी ने गुरुवार को कोडंगीपट्टी में एक मिनी टेक्सटाइल पार्क का उद्घाटन किया।यह पार्क तमिलनाडु मिनी टेक्सटाइल पार्क योजना के तहत स्थापित किया गया है। इस योजना के तहत, राज्य सरकार साझा सुविधाओं, बुनियादी ढाँचे और कारखाना भवनों की स्थापना पर होने वाले खर्च का 50% वहन करेगी। प्रत्येक पार्क के लिए अधिकतम अनुदान ₹2.5 करोड़ होगा। पार्क की स्थापना पर ₹11.87 करोड़ खर्च किए गए हैं। इस व्यय में से, राज्य सरकार ने ₹2.5 करोड़ अनुदान के रूप में दिए हैं। शेष राशि ओएसिस टेक्सपार्क प्राइवेट लिमिटेड ने खर्च की है।एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि टेक्सटाइल पार्क में तीन कंपनियाँ काम करेंगी। लगभग 400 लोगों को रोजगार मिलेगा।श्री गांधी ने कहा कि करूर जिले में नौ मिनी टेक्सटाइल पार्कों को मंजूरी दी गई है। इनमें से दो पार्कों ने काम करना शुरू कर दिया है। अन्य पार्क निर्माणाधीन हैं।इससे पहले, श्री गांधी और श्री सेंथिलबालाजी ने यहाँ त्यागी कुमारन हथकरघा बुनकर सहकारी समिति में ₹35 लाख की लागत से स्थापित एक रजाई मशीन का उद्घाटन किया।और पढ़ें :- रुपया 09 पैसे गिरकर 88.22/USD पर खुला

रकबा घटा, फिर भी 2025-26 में कपास उत्पादन बढ़ने के आसार

प्रमुख राज्यों में रकबा घटने के बावजूद 2025-26 में भारत का कपास उत्पादन बढ़ने की उम्मीदअक्टूबर से शुरू होने वाले 2025-26 सीज़न में भारत का कपास उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ने का अनुमान है। हालांकि महाराष्ट्र और गुजरात जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में रकबा कम हुआ है और अगस्त की भारी बारिश से कुछ क्षेत्रों में फसल को नुकसान पहुंचा है।राज्यवार स्थितिगुजरात में कपास का रकबा 23.66 लाख हेक्टेयर से घटकर 20.82 लाख हेक्टेयर रह गया है, जबकि महाराष्ट्र में यह 40.81 से घटकर 38.44 लाख हेक्टेयर हुआ है। दूसरी ओर, तेलंगाना में रकबा 18.11 से बढ़कर 18.51 लाख हेक्टेयर और कर्नाटक में 7.79 से बढ़कर 8.08 लाख हेक्टेयर हो गया है। आंध्र प्रदेश में मामूली गिरावट के साथ रकबा 4.13 से घटकर 3.77 लाख हेक्टेयर रहा।उत्पादन अनुमानव्यापार संगठनों के अनुसार, 2025-26 में भारत का कपास उत्पादन 325 से 340 लाख गांठ (प्रत्येक 170 किलोग्राम) तक पहुंच सकता है, जो चालू सीज़न के लगभग 312 लाख गांठ से अधिक होगा। कर्नाटक में उत्पादन 24 से बढ़कर 30 लाख गांठ, आंध्र प्रदेश में 12.5 से बढ़कर 17 लाख गांठ और तेलंगाना में 50 से बढ़कर 53–55 लाख गांठ तक पहुंचने की संभावना है। दक्षिण भारत का कुल उत्पादन 105 लाख गांठ तक पहुंच सकता है, जो पिछले साल के 88 लाख गांठ से काफी अधिक है।बाज़ार पर असरदशहरा तक कपास की दैनिक आवक 30–35 हजार गांठ तक पहुंचने की उम्मीद है, जो वर्तमान स्तर से काफी अधिक है। हालांकि बढ़ते उत्पादन और आयात के कारण कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। कच्चे कपास के दाम अभी MSP (₹5,500–7,000 प्रति क्विंटल) से नीचे चल रहे हैं, जबकि उत्तर भारत में बारिश से गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है।केंद्र सरकार ने कपड़ा उद्योग को राहत देने के लिए वर्ष के अंत तक कपास पर 11% आयात शुल्क हटा दिया है, जिससे 2024-25 में आयात बढ़कर 41 लाख गांठ तक पहुंच गया। अक्टूबर–दिसंबर तिमाही में ही 20 लाख गांठ से अधिक आयात होने की संभावना है।CCI की तैयारीCotton Corporation of India MSP पर बड़े पैमाने पर खरीद के लिए तैयार है और 1 अक्टूबर से उत्तर भारत में 550 केंद्रों के माध्यम से खरीद शुरू करेगी। पिछले वर्ष करीब 1 करोड़ गांठ खरीदने वाली CCI के पास इस बार लगभग 12 लाख गांठ का स्टॉक मौजूद है।वैश्विक परिदृश्यUnited States Department of Agriculture के अनुसार, भारत का उत्पादन बढ़ने के साथ आयात घटकर 35.8 लाख गांठ और निर्यात बढ़कर 16.64 लाख गांठ हो सकता है। वहीं International Cotton Advisory Committee का अनुमान है कि वैश्विक कपास उत्पादन 25.9 मिलियन टन से घटकर 25.5 मिलियन टन रह सकता है, क्योंकि अमेरिका, पाकिस्तान और सूडान में मौसम और कीटों का असर पड़ा है।और पढ़ें:-  रुपया 17 पैसे गिरकर 88.13 प्रति डॉलर पर बंद हुआ

पीएम मित्रा पार्क: किसानों को बेहतर दाम, युवाओं को रोजगार, निवेश 5एफ मॉडल पर

किसान बोले-पीएम मित्र पार्क से कपास के अच्छे रेट मिलेंगे:युवाओं और महिलाओं को रोजगार की उम्मीद; निवेशकों ने कहा- फैक्ट्री 5F पर काम करेगीधार के भैंसाला में करीब 2158 एकड़ जमीन पर बनने वाले देश के सबसे बडे़ पीएम मित्रा पार्क का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को शिलान्यास किया। दो साल में इस पार्क में टेक्सटाइल सेक्टर से जुड़े उद्योगों में उत्पादन शुरू होने का अनुमान है।इस पार्क से मालवा-निमाड़ के कपास उत्पादक किसान और टेक्सटाइल सेक्टर के उद्यमियों को बड़ी उम्मीदें हैं। बल्कि इस पूरे इलाके के युवा भी नौकरियों की संभावना को लेकर उत्साहित हैं। दैनिक भास्कर ने इसे लेकर किसानों, युवाओं, महिलाओं और उद्योगपति- श्रमिकों से बात की। जानिए किसे-कितनी हैं उम्मीदें...सबसे पहले जानिए...किसानों को क्या उम्मीदछायन गांव से आए कपास उत्पादक किसान मन्ना लाल भूरिया कहते हैं, काफी मात्रा में हम कपास उगाते हैं। अभी हमारा कपास छोटा है। हमें ऐसा लगता है कि अब कपास गांव में ही अच्छे दामों पर खरीदा जाएगा।गंधवानी से आए किसान नरसिंह भाबर ने कहा, यहां फैक्ट्रियां लगने से रोजगार मिलेगा। बच्चों को अभी कोई काम नहीं मिलता लेकिन ये काम चालू हो जाएगा तो रोजगार मिलेगा। महिलाओं को अच्छा काम मिलेगा। हम कपास उगाते हैं अभी 60-70 रुपए किलो बिकता है। हमें लगता है कि फैक्ट्रियां खुल जाने से हमारा कपास कम से कम 100 रुपए किलो तक खरीदा जाएगा।महिलाओं, युवाओं, श्रमिकों ने क्या कहादोत्रिया गांव से आए दंपति पूजा ने कहा, यहां फैक्ट्रियां बनने से हमारी मजदूरी बढ़ जाएगी। हम लोगों को बहुत फायदा होगा। स्थानीय युवा शोभाराम वास्केल कहते हैं कि अभी हमें सरकारी नौकरी की उम्मीद है। लेकिन, अगर नहीं भी लगी तो यहां इस पार्क में जॉब मिल जाएगा। हमें नौकरी की तलाश में बाहर नहीं जाना पड़ेगा।अब पढ़िए पार्क में निवेश करने वाले उद्योगपतियों ने क्या कहा... पेंट, बैग की चेन बनाने वाली जिपर इंडस्ट्री 2.70 करोड़ खर्च करेगी पीएम मित्रा पार्क में जिपर मेन्युफैक्चरिंग कंपनी के लिए एलओआई लेने आए कंपनी के मैनेजर आदित्य जाट ने बताया हमारी कंपनी चौधरी इन्फ्रा प्रोजेक्ट यहीं बदनावर की कंपनी है। हमारी कंपनी यहां 2 करोड़ 70 लाख रुपए का निवेश करने जा रही है। हमें 10 हजार स्क्वायर फिट जमीन अलॉट हुई है। हमारी कंपनी पेंट, बैग, रेनकोट की चेन बनाएंगे। कपड़ों में डिजाइनिंग के लिए जो चेन लगाई जाती है उसे जिपर कहा जाता है। हमारी कंपनी यहां जिपर(चेन) बनाने का काम करेगी।पार्क की 5F थीम पर काम करेगी इंदौर की कंपनी पीएम मित्रा पार्क में जिन उद्योगपतियों को जमीन अलॉट हुई है, उनमें से एक इंदौर के टेक्सटाइल उद्योगपति संजय अग्रवाल ने बताया 'हमारी कंपनी टेक्सटाइल सेक्टर में काम करती है। यहां पर नासा फाइबर टू फैशन के नाम से 4 करोड़ 72 लाख के इन्वेस्टमेंट का हमारा कमिटमेंट है। हमने यहां डाइंग, निटिंग और गारमेंटिंग का प्रोजेक्ट फाइल किया है। पीएम मित्रा पार्क की जो 5F की थीम है हमारी कंपनी उस पर काम करेगी।----------------------यह है 5F--------------------* कृषि - कपास उत्पादक किसान सीधे खेतों से कपास लाकर कंपनियों को बेच सकेंगे।* रेशा - कपास को ओटाया जाएगा, यानी साफ़ किया जाएगा और धागा बनाया जाएगा ।* कारखाना - कारखाने में कपास काता जाएगा, बुना जाएगा, कपास से कपास अलग किया जाएगा।* फ़ैशन: कपड़ों की डिज़ाइनिंग, गारमेंटिंग आदि से जुड़े काम होंगे, जैसे बटन लगाना।* विदेश: कारखाने में तैयार कपड़ों की पैकेजिंग के बाद, उन्हें यहाँ से सीधे विदेशों में निर्यात किया जाएगा।उद्योगपति बोले- कॉम्पिटिटिव रेट्स पर कपास खरीदी होगी तो किसानों को फायदा होगा TDN फाइबर्स लिमिटेड कुक्षी के डायरेक्टर लक्ष्मी नारायण गुप्ता ने बताया हमारा कॉटन फाइबर्स का काम है। हमें लगता तो है कि हमें कुछ और रियायतें बढ़ेंगी। पार्क में भी हम पार्टिशिपेंट कर रहे हैं। यहां भी प्रोडक्शन की प्लानिंग कर रहे हैं।यहां प्लांट्स लगने से लोकल के लोगों को प्रॉफिट होगा। कपास उत्पादक किसानों को ज्यादा मुनाफा होगा। एक आम किसान से जब कॉम्पिटिटिव रेट्स में व्यापारी कपास लेंगे तो उसको ज्यादा पैसा मिलेगा और उसकी आमदनी ज्यादा बढ़ेगी।और पढ़ें:- रुपया 16 पैसे गिरकर 87.96 पर खुला

ब्राज़ीलियाई कपास की कीमतें गिरावट के करीब (2024-25)

2024-25 की कटाई पूरी होने के करीब, ब्राज़ीलियाई कपास की कीमतों में गिरावट2024-25 सीज़न की कटाई और प्रसंस्करण गतिविधियों की प्रगति के कारण ब्राज़ील में कपास की कीमतों में सितंबर की शुरुआत में गिरावट आई, जिससे बैचों की उपलब्धता बढ़ी और विक्रेताओं को कोटेशन के बारे में अधिक लचीला होने के लिए प्रोत्साहित किया गया। सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज़ ऑन एप्लाइड इकोनॉमिक्स (CEPEA) के अनुसार, विदेशों में डॉलर के मूल्यों में गिरावट ने भी घरेलू बाजार में गिरावट के रुझान को मजबूत किया।लगातार कीमतों में गिरावट के कारण, कई विक्रेता हाजिर बाजार में सौदे बंद करने से दूर रहे और टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स को पूरा करना पसंद किया, जो मौजूदा सौदों की तुलना में अधिक आकर्षक मूल्यों पर बंद हुए। बदले में, खरीदार केवल कुछ ही सौदे कर रहे थे।सीईपीईए/ईएसएएलक्यू सूचकांक (8 दिनों में भुगतान) 29 अगस्त और 15 सितंबर के बीच 6.05 प्रतिशत घटकर 15 सितंबर को बीआरएल 3.6703 (लगभग 0.69 डॉलर) प्रति पाउंड पर बंद हुआ। सीईपीईए ने ब्राज़ीलियाई कपास बाज़ार पर अपनी नवीनतम पाक्षिक रिपोर्ट में कहा कि 12 सितंबर को यह बीआरएल 3.6590 प्रति पाउंड पर बंद हुआ, जो जुलाई 2023 की शुरुआत के बाद से नाममात्र मूल्य (बीआरएल 3.7047 प्रति पाउंड) के हिसाब से सबसे कम मूल्य है।ब्राज़ीलियन कॉटन ग्रोअर्स एसोसिएशन (एबीआरएपीए) के आंकड़ों के अनुसार, 4 सितंबर तक 2024-25 की 90.83 प्रतिशत फसलों की कटाई हो चुकी थी और 30.65 प्रतिशत का प्रसंस्करण हो चुका था।अंतर्राष्ट्रीय कपास सलाहकार समिति (आईसीएसी) का अनुमान है कि 2025-26 में वैश्विक क्षेत्रफल 30.8 मिलियन हेक्टेयर होगा, जो पिछली फसल की तुलना में 0.76 प्रतिशत कम है। उत्पादकता 1.4 प्रतिशत बढ़कर 829.18 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर होने की उम्मीद है, जिसके परिणामस्वरूप उत्पादन 25.55 मिलियन टन होगा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 0.63 प्रतिशत अधिक है। वैश्विक खपत 25.519 मिलियन टन तक पहुँचने की संभावना है।ब्राज़ील में, उत्पादन 2025-26 में 7.19 प्रतिशत बढ़कर 3.92 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच सकता है, जो अधिक क्षेत्रफल के कारण बना रहेगा। घरेलू खपत 752 हज़ार टन तक पहुँचने की संभावना है, जो पिछले सीज़न की तुलना में 0.27 प्रतिशत अधिक है, जो 2014-15 (801 हज़ार टन) के बाद से सबसे अधिक है।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 02 पैसे बढ़कर 87.80 पर बंद हुआ

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