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CCI ने कॉटन कीमतें स्थिर रखीं, ऑनलाइन नीलामी जारी

CCI ने कॉटन की कीमतें स्थिर रखीं, इस हफ़्ते ऑनलाइन नीलामी जारी रखीकॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (CCI) ने मौजूदा 2025-26 सीज़न के लिए इस हफ़्ते कुल 2,700 कॉटन बेल्स की बिक्री दर्ज की, जो मिलों और ट्रेडर्स की चुनिंदा खरीदारी में दिलचस्पी को दिखाता है।साप्ताहिक बिक्री रिपोर्ट 16 फरवरी, 2026:मिल्स ही अकेली एक्टिव पार्टिसिपेंट थीं, जिन्होंने 1,500 बेल्स खरीदीं, जबकि ट्रेडर की भागीदारी ज़ीरो थी। दिन की कुल बिक्री 1,500 बेल्स थी।17 फरवरी, 2026:इस दिन मिल या ट्रेडर सेशन में कोई ट्रांज़ैक्शन दर्ज नहीं किया गया।18 फरवरी, 2026:ट्रेडिंग एक्टिविटी ट्रेडर सेगमेंट में शिफ्ट हो गई, जिसने 1,200 बेल्स खरीदीं। मिलों ने इस दिन कुछ भी नहीं खरीदा। कुल बिक्री 1,200 बेल्स थी।19 और 20 फरवरी, 2026:दोनों सेशन में कोई खरीदारी नहीं हुई, जिससे ज़ीरो सेल हुई।टोटल सेल:हाल ही में हुई नीलामी के बाद, CCI की टोटल सेल इस तरह थी:2025–26 सीज़न के लिए 3,93,300 बेल्स, और2024–25 सीज़न के लिए 98,82,400 बेल्स।और पढ़ें:- डॉलर के मुकाबले रुपया 38 पैसे गिरकर 90.98 पर बंद हुआ। 

कॉटन स्पिनिंग इंडस्ट्री का मजबूत भविष्य 2033 तक

कॉटन स्पिनिंग मार्केट 2033 तक तेज़ी से बढ़ने के लिए तैयार हैकोहेरेंट मार्केट इनसाइट्स की लेटेस्ट रिपोर्ट, जिसका टाइटल है “कॉटन स्पिनिंग मार्केट: ट्रेंड्स, शेयर, साइज़, ग्रोथ, मौके, और फोरकास्ट 2026–2033,” ग्लोबल कॉटन स्पिनिंग इंडस्ट्री का गहराई से असेसमेंट पेश करती है। यह पूरी स्टडी मार्केट के मुख्य डायनामिक्स के बारे में कीमती जानकारी देती है, जिसमें ग्रोथ ड्राइवर्स, चुनौतियाँ, रीजनल ट्रेंड्स और कॉम्पिटिटिव माहौल शामिल हैं।रिपोर्ट में टेबल्स, चार्ट्स और आंकड़ों के साथ डिटेल्ड एनालिसिस हैं, जो हाल के सालों में कॉटन स्पिनिंग मार्केट के बड़े विस्तार को हाईलाइट करते हैं। प्रोडक्ट की बढ़ती डिमांड, बढ़ते कंज्यूमर बेस और टेक्सटाइल वैल्यू चेन में लगातार टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन से ग्रोथ को बढ़ावा मिला है।इसमें शामिल मुख्य एरिया में मार्केट का साइज़ और सेगमेंटेशन, इंडस्ट्री ट्रेंड्स, कॉम्पिटिटिव पोजीशनिंग और भविष्य में ग्रोथ की संभावनाएँ शामिल हैं। स्टडी में मर्जर और एक्विजिशन, पार्टनरशिप, प्रोडक्ट इनोवेशन और इंडस्ट्री के बड़े प्लेयर्स द्वारा अपनाई गई मार्केटिंग स्ट्रेटेजी जैसे बड़े डेवलपमेंट का भी मूल्यांकन किया गया है। यह रिपोर्ट नॉर्थ अमेरिका, यूरोप, एशिया-पैसिफिक, साउथ अमेरिका, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका जैसे बड़े इलाकों में मार्केट की परफॉर्मेंस की पूरी जानकारी देती है। इसमें प्रोडक्शन, कंजम्प्शन और रेवेन्यू ट्रेंड्स का एनालिसिस किया गया है। वैल्यू और वॉल्यूम के हिसाब से मार्केट के विकास को पूरी तरह समझने के लिए पुराने डेटा और आगे के अनुमान (2026–2033) दोनों को शामिल किया गया है।इसके अलावा, एनालिसिस में इस सेक्टर को आकार देने वाले खास मैक्रोइकॉनॉमिक असर, रेगुलेटरी फ्रेमवर्क और टेक्नोलॉजिकल तरक्की को भी देखा गया है। टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ती सस्टेनेबिलिटी की चिंताओं और डिजिटल बदलाव के साथ, ग्लोबल कॉटन स्पिनिंग मार्केट में 2033 तक काफी ग्रोथ की उम्मीद है। और पढ़ें:-   रुपया 30 पैसे गिरकर 90.94 पर खुला

गुजरात बजट FY27: टेक्सटाइल सेक्टर को बड़ा बढ़ावा, 38% खर्च वृद्धि

गुजरात बजट FY27: टेक्सटाइल सेक्टर के लिए खर्च में 38% की बढ़ोतरीगांधीनगर: भारत के पश्चिमी राज्य गुजरात ने वित्त वर्ष 2026–27 के बजट में टेक्सटाइल सेक्टर के लिए आवंटन में 38% की बड़ी बढ़ोतरी की घोषणा की है। टेक्सटाइल इंडस्ट्री डेवलपमेंट स्कीम के तहत अब बजट बढ़ाकर ₹2,755 करोड़ (लगभग $302.71 मिलियन) कर दिया गया है।राज्य के वित्त मंत्री कनुभाई देसाई ने बुधवार को गांधीनगर में विधानसभा में बजट पेश करते हुए यह घोषणा की। यह बढ़ोतरी पिछले वर्षों के ₹2,000 करोड़ (2025–26) और ₹2,036.47 करोड़ (2024–25) के मुकाबले एक बड़ा विस्तार दर्शाती है, जो राज्य की औद्योगिक नीति में टेक्सटाइल सेक्टर को प्राथमिकता देने का संकेत है।टेक्सटाइल सेक्टर को मजबूती देने की योजनाइस बढ़े हुए आवंटन का उद्देश्य टेक्सटाइल वैल्यू चेन में क्षमता विस्तार, तकनीकी उन्नयन और निवेश को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही MSME भागीदारी और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।राज्य सरकार कॉटेज, हैंडलूम और छोटे स्तर के टेक्सटाइल इकोसिस्टम को भी सब्सिडी, अनुदान और संस्थागत सहायता के माध्यम से समर्थन दे रही है। इसमें सहकारी उत्पादन, प्रशिक्षण, अनुसंधान सहायता और छोटे उत्पादकों के लिए निर्यात सुविधाएं शामिल हैं।कारीगरों और हस्तशिल्प पर फोकसहस्तशिल्प क्षेत्र के लिए भी बजट में अतिरिक्त प्रावधान किए गए हैं। गुजरात स्टेट हैंडीक्राफ्ट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन को मिलने वाली वित्तीय सहायता को बढ़ाकर ₹48.05 करोड़ (2026–27) कर दिया गया है, जो पिछले वर्ष ₹41.86 करोड़ थी।इसके अलावा, डिजाइन प्रतियोगिताओं, प्रदर्शनियों और प्रचार गतिविधियों के लिए ₹23 करोड़ का अलग प्रावधान किया गया है, जिसका उद्देश्य उत्पाद नवाचार और बाजार पहुंच को बढ़ाना है।निर्यात और डिजिटल पहल को बढ़ावानिर्यात आधारित उद्योगों को समर्थन देने के लिए गुजरात स्टेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के गठन का प्रस्ताव रखा गया है, जिसके लिए ₹5.90 करोड़ का आवंटन किया गया है। यह कदम निर्यात विकास और बाजार विस्तार को आसान बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।इसके साथ ही, हैंडलूम और हस्तशिल्प क्षेत्र के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से डिजिटल मार्केट एक्सेस को बढ़ावा देने की भी योजना है।उद्योग जगत की प्रतिक्रियादक्षिण गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (SGCCI) के पूर्व अध्यक्ष आशीष गुजराती ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि टेक्सटाइल आवंटन में बढ़ोतरी राज्य की लगातार प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल से MSME उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने में मदद मिलेगी।कुल मिलाकर, यह बजट टेक्सटाइल सेक्टर में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के साथ-साथ पारंपरिक और MSME आधारित इकाइयों को मजबूत करने की दोहरी रणनीति को दर्शाता है।और पढ़ें:-  केंद्रीय-राज्य बजट से MSME को बढ़ावा 

केंद्रीय-राज्य बजट से MSME को बढ़ावा

'केंद्रीय-राज्य बजट से भीलवाड़ा की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को मिलेगी ताकत': रिजु झुनझुनवाला बोले- मैन्युफैक्चरि एक्सपोर्ट और MSME को बढ़ावा मिलेगाकेंद्रीय बजट 2026–27 को लेकर आरएसडब्ल्यूएम भीलवाड़ा ग्रुप के रिजु झुनझुनवाला ने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बजट को विकासोन्मुख, विनिर्माण को प्रोत्साहित करने वाला, लघु एवं मध्यम उद्योगों को सशक्त बनाने वाला और निर्यात बढ़ाने के साथ कारझुनझुनवाला ने कहा कि देश के प्रमुख वस्त्र केंद्र के रूप में पहचाने जाने वाले भीलवाड़ा को इस बजट से सीधा लाभ मिलेगा। प्रौद्योगिकी उन्नयन, आधुनिक मशीनरी के उपयोग, आधारभूत ढांचे के विस्तार, परिवहन सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण और कौशल विकास पर विशेष जोर से यहां की वस्त्र इकाइयां और अधिक मजबूत होंगी। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सुधार होगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।उन्होंने कहा कि बजट के प्रावधानों से भीलवाड़ा में नए निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। मूल्य संवर्धन, हरित ऊर्जा के उपयोग और निर्यात विस्तार के अवसर बढ़ने से स्थानीय उद्योग को नई दिशा और गति मिलेगी।राजस्थान बजट की भी सराहनारिजु झुनझुनवाला ने उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दिया कुमारी द्वारा प्रस्तुत राजस्थान बजट की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि राज्य बजट में आधारभूत ढांचे, औद्योगिक विकास और संपर्क मार्गों के सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे भीलवाड़ा सहित पूरे प्रदेश के औद्योगिक तंत्र को मजबूती मिलेगी।मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेश नेतृत्व के प्रति आभार जताते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के प्रयासों से प्रदेश में सकारात्मक औद्योगिक माहौल बना है।उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से भीलवाड़ा का वस्त्र क्षेत्र राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी और अधिक सशक्त एवं प्रतिस्पर्धी बनेगा।और पढ़ें:-   MSP पर लीगल गारंटी नहीं, बीच का रास्ता तलाशेगी कमेटी

MSP पर लीगल गारंटी नहीं, बीच का रास्ता तलाशेगी कमेटी

*MSP की लीगल गारंटी नहीं बल्कि बीच का रास्ता निकालने की तैयारी में कमेटी, सदस्यों ने बनाया दबाव*केंद्र सरकार की बनाई गई एमएसपी कमेटी के कई सदस्यों ने ऐसी व्यवस्था करने की वकालत की है, जिसमें मंडी के अंदर और बाहर दोनों जगह किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) मिले. अभी अगर फसल की गुणवत्ता तय मानकों पर खरी उतरती है तब सरकारी और सहकारी खरीद एजेंसियां मंडियों में फसलों की एमएसपी पर खरीद करती हैं, लेकिन मंडी के बाहर यानी निजी क्षेत्र के लिए यह व्यवस्था लागू नहीं है. कमेटी के सदस्य एमएसपी की लीगल गारंटी जैसी किसी व्यवस्था की बजाय बीच का रास्ता निकालने की कोशिश में जुटे हुए हैं, ताकि किसानों के बीच उनकी इमेज खराब न हो. बुधवार को नई दिल्ली में हुई कमेटी की बैठक में यह बात निकल कर सामने आई है.*अब तक बेनतीजा रही सभी बैठकें*कमेटी के गठन 22 जुलाई 2022 से अब तक 7 बैठकें हो चुकी हैं. इसके अतिरिक्त, कमेटी की उप-समितियों की 35 बैठकें हुई हैं. लेकिन अभी इसके सदस्य किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं. साल 2024 में केंद्र में नई सरकार के गठन के बाद कमेटी ने पहली बार बैठक की है. अगली बैठक मार्च में होगी.किसान संगठनों की ओर से बनाए गए इसके सदस्य जल्द से जल्द रिपोर्ट तैयार करके सरकार को सौंपना चाहते हैं. क्योंकि कमेटी को बने काफी वक्त हो चुका है. उधर, एमएसपी की लीगल गारंटी की मांग को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा-गैर राजनीतिक की किसान जागृति यात्रा चल रही है.*एमएसपी पर बढ़ा दबाव*बहरहाल, लंबे समय बाद हुई कमेटी की बैठक हंगामेदार रही. क्योंकि इसमें शामिल ज्यादातर नौकरशाह नहीं चाहते कि मंडी के बाहर भी एमएसपी की व्यवस्था कायम की जाए. दरअसल अधिकारियों को तो किसानों के बीच जाकर जवाब नहीं देना है, लेकिन किसान नेताओं को किसानों के बीच में जाना है. जनता के बीच में जाना है.इसलिए वह कोई ऐसा काम नहीं करना चाहते जिससे किसानों में या आम लोगों में उनकी आलोचना हो. इसलिए वह एमएसपी के मुद्दे पर बहुत सतर्क हैं. क्योंकि यह किसानों के लिए बेहद संवेदनशील मुद्दा है. दिन भर चली इस मीटिंग में नेचुरल फार्मिंग और क्रॉप डायवर्सिफिकेशन पर भी चर्चा हुई लेकिन एमएसपी का मुद्दा छाया रहा. कमेटी के जिन पांच सदस्यों ने पिछले दिनों फसलों का रिजर्व प्राइस घोषित करने के लिए अध्यक्ष पर दबाव बनाया था, वह इस बार भी इसी मुद्दे पर कायम रहे. सदस्यों ने कहा कि सरकार जो एमएसपी खुद तय करती है वह किसानों को मंडी के अंदर भी मिले और बाहर भी. देखना यह है कि कमेटी के अध्यक्ष सदस्यों की बात को मानते हैं या फिर वह कोई और रुख अपनाते हैं.*कब और क्यों बनी थी कमेटी*एमएसपी को लेकर कमेटी बनाने की घोषणा 19 नवंबर, 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को रद्द करने के साथ ही हो गई थी. लेक‍िन  दिल्ली बॉर्डर पर बैठे आंदोलनकारी कुछ ल‍िख‍ित चाहते थे. इसके बाद 9 द‍िसंबर 2021 को तत्कालीन कृष‍ि सच‍िव संजय अग्रवाल ने क‍िसान संगठनों को एक पत्र जारी क‍िया, तब जाकर आंदोलनकारी क‍िसान द‍िल्ली बॉर्डर से वापस अपने घरों को गए थे. इस घोषणा के करीब आठ महीने बाद 12 जुलाई, 2022 को कमेटी के गठन का नोट‍िफ‍िकेशन आया. हालांक‍ि, सरकार ने इस कमेटी का चेयरमैन उन्हीं संजय अग्रवाल को बना द‍िया, ज‍िनके केंद्रीय कृष‍ि सच‍िव रहते तीन कृषि कानून लाए गए थे और 13 महीने लंबा क‍िसान आंदोलन चला था.और पढ़ें :-   कपास संकट पर महाराष्ट्र CM ने केंद्र को लिखा पत्र

महाराष्ट्र CM की केंद्र से मांग, कपास खरीद अवधि बढ़ाने पर जोर

Cotton Procurement: महाराष्ट्र CM ने कपास खरीद अवधि बढ़ाने की मांग की, किसानों को राहत की उम्मीदमुंबई: महाराष्ट्र के कपास किसानों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह को पत्र लिखकर कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) द्वारा की जा रही खरीद की समयसीमा बढ़ाने का अनुरोध किया है।मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि CCI ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर कपास खरीद की अंतिम तिथि 27 फरवरी 2026 तय की है, जबकि राज्य में अभी भी बड़ी मात्रा में किसानों का कपास बिना बिके पड़ा हुआ है।खरीद बंद होने से कीमतों पर दबावसीएम ने चेतावनी दी कि यदि तय समय पर सरकारी खरीद बंद होती है, तो खुले बाजार में कपास के दामों में गिरावट आ सकती है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होगा। उन्होंने मांग की कि खरीद अवधि को बढ़ाकर 30 अप्रैल 2026 तक किया जाए, ताकि किसानों को अपनी उपज उचित दाम पर बेचने का अवसर मिल सके।अप्रैल तक जारी रहे खरीद प्रक्रियामुख्यमंत्री ने केंद्र से आग्रह किया है कि CCI को निर्देश देकर कपास खरीद प्रक्रिया अप्रैल के अंत तक जारी रखी जाए। उनका कहना है कि यह कदम राज्य के लाखों कपास किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।MSP और आयात का प्रभावखरीफ मार्केटिंग सीजन 2025-26 के लिए केंद्र सरकार ने मध्यम रेशे वाली कपास का MSP ₹7,710 प्रति क्विंटल और लंबी रेशे वाली कपास का MSP ₹8,110 प्रति क्विंटल तय किया है।हालांकि, सितंबर से दिसंबर 2025 तक कपास के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति के कारण घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ा। बड़ी मात्रा में विदेशी कपास आने से किसानों को नुकसान हुआ।किसानों की चिंता बरकरारसरकारी खरीद से किसानों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन यदि खरीद अवधि नहीं बढ़ाई गई, तो उन्हें कम दाम पर कपास बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।और पढ़ें :- भारत-अमेरिका समझौते के बावजूद निर्यात सुस्त

भारत-अमेरिका समझौते के बावजूद निर्यात सुस्त

भारत–अमेरिका व्यापार समझौता: सहमति के बाद भी निर्यात में गिरावटभारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर सहमति बनने के बावजूद जनवरी में अमेरिका को भारत के निर्यात में 21.77% की गिरावट दर्ज की गई, जो घटकर 6.6 अरब डॉलर रह गया। कुल निर्यात में मामूली वृद्धि बाजार विविधीकरण के कारण संभव हो सकी।जनवरी में भारत का कुल निर्यात 0.61% बढ़कर 36.56 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 19.2% बढ़कर 71.24 अरब डॉलर हो गया। आयात में तेज बढ़ोतरी से व्यापार घाटा बढ़कर 34.68 अरब डॉलर पहुंच गया।अमेरिका ने अगस्त 2025 से भारतीय उत्पादों पर 50% टैरिफ लगाया था, जिसमें अतिरिक्त 25% शुल्क भी शामिल था। बाद में समझौते के तहत अतिरिक्त शुल्क हटा लिया गया और पारस्परिक टैरिफ घटाकर 18% कर दिया गया, जिससे भारतीय निर्यातकों को राहत मिली।अप्रैल–जनवरी अवधि में अमेरिका को भारत का निर्यात 5.85% बढ़कर 72.46 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 13.87% बढ़कर 43.92 अरब डॉलर हो गया। हालांकि कुछ महीनों में गिरावट भी देखी गई।अमेरिकी बाजार में कमजोरी के बीच भारत ने चीन और अन्य देशों की ओर रुख किया। चीन को निर्यात में तेज वृद्धि हुई, लेकिन आयात भी अधिक रहा, जिससे व्यापार घाटा बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार विविधीकरण से आगे चलकर स्थिति बेहतर हो सकती है।और पढ़ें :- जलगांव में कपास बाजार सुस्त, उत्पादन लक्ष्य से कम

जलगांव में कपास बाजार सुस्त, उत्पादन लक्ष्य से कम

जलगांव कपास बाजार में मंदी, लक्ष्य का आधा उत्पादन ही हुआजलगांव: इस वर्ष खारीपत में भारी बारिश के कारण कपास का उत्पादन कम होने, व्यापारियों से कम कीमत मिलने आदि के कारण बाजार में कपास कम मात्रा में बिकी. पिछले आठ दिनों से बाजार में कपास की बिक्री बंद होने से परोक्ष रूप से यह पता चल रहा है कि कपास का सीजन खत्म हो गया है. निजी व्यापारियों के पास कपास की कीमत 7,200 रुपये प्रति क्विंटल है। सीसीआई ने केंद्रों से कपास की खरीदी भी बंद कर दी है. बाजार में कपास नहीं होने से जिनर्स द्वारा गांठों का उत्पादन भी बंद हो गया है।अब तक सीसीआई तीन लाख गांठ कपास खरीद चुकी है। व्यापारियों ने तीन से साढ़े तीन लाख गांठ पैदा करने के लिए पर्याप्त कपास खरीदी। अब तक कुल 6 लाख 50 हज़ार गांठ का उत्पादन हो चुका है. कुछ ही दिनों में गांठें बन जाएंगी. वह एक लाख होगा. इस सीजन में जिनिंग चालकों ने 15 लाख गांठ का लक्ष्य रखा है। साढ़े छह लाख गांठ का ही उत्पादन हो सका है।अनुमान है कि जिनर्स के पास जो कपास है, उससे एक लाख गांठ कपास निकलेगी। कुल मिलाकर स्थिति देखें तो 15 लाख में से साढ़े सात लाख गांठ का ही उत्पादन हो पाएगा। व्यापारियों द्वारा पिछले माह से कपास के भाव में 500 से 600 रुपए की गिरावट होने से किसान कपास नहीं ला रहे हैं, सीसीआई के केंद्रों पर कपास की आवक भी कम हो गई है। आने वाली कपास की गुणवत्ता खराब होने से खरीद बंद हो गई है और जिनर्स संकट में हैं।भारत में 4 मिलियन गांठ कपास का आयात किया गया क्योंकि केंद्र सरकार ने देश की कपड़ा मिलों और उद्योगों पर संभावित कपास संकट से बचने के लिए कपास आयात नीति अपनाई थी। आयात केवल 10 लाख गांठ प्रति वर्ष था। हालाँकि, दूसरी ओर, जिनिंग संचालक देश में गांठों का उत्पादन भी करेंगे। जिनिंग चालकों को उम्मीद थी कि खानदेश में 20 लाख गांठ का उत्पादन होगा। हालाँकि, इस साल कपास आयात नीति का भारतीय कपास पर कोई असर नहीं पड़ा है। किसानों ने उतना कपास नहीं बेचा जितना वे चाहते थे, इस उम्मीद में कि कीमत बढ़ेगी।सीसीआई द्वारा केंद्र सरकार की गारंटी मूल्य के अनुसार 8 हजार 100 रु. कपास की खरीदी की गई. हालाँकि, जिस कपास में नमी की मात्रा अधिक थी, उसे कम कीमत पर खरीदा गया, व्यापारियों ने कपास की गुणवत्ता के आधार पर 7,600 से 7,700 रुपये की दर की पेशकश की। यह भी अब 7,200 से 7,400 है और किसान कम कपास बेच रहे हैं।निर्यात के लिए कोई उचित मूल्य नहीं हैकपास आयात नीति से पहले, कपास को 55,000 से 56,000 रुपये प्रति खंडी (दो गांठ) की कीमत मिलती थी। इसकी दरें घटकर 52 से 53 हजार प्रति खांदी हो गईं। इसलिए, चूंकि कपास का निर्यात नहीं होगा, इसलिए भारतीय कपास की कीमत कम रहेगी।इस वर्ष कपास की कम आवक के कारण जिनर्स को घाटा हुआ। व्यापारियों के पास कपास का भाव 7200 से 7500 रुपए रहा। हालाँकि, उनमें गुणवत्ता का भी अभाव था। भाव न मिलने से व्यापारियों से खरीदारी बंद हो गई। ऐसे में गांठें बनना बंद होने से जिनिंग उद्योग संकट में है। अब तक साढ़े छह लाख गांठें बन चुकी हैं, एक लाख गांठें और तैयार हो जाएंगी।- प्रदीप जैन, अध्यक्ष, खानदेश जिनिंग प्रेसिंग मिल ओनर्स एसोसिएशन।

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