आंध्र प्रदेश में सूखे का संकट: 21 जिलों के 388 मंडल प्रभावित
आंध्र प्रदेश सरकार ने खरीफ 2026 के लिए राज्य के 21 जिलों के 388 मंडलों को सूखा-प्रभावित घोषित किया है। जून से अगस्त के दौरान राज्य में सामान्य से 53.4% कम बारिश दर्ज की गई। प्रभावित मंडलों में 283 को गंभीर और 105 को मध्यम सूखा-प्रभावित श्रेणी में रखा गया है।
राज्य के कुल 28 जिलों में 688 मंडल हैं। इनमें से 388 मंडलों को सूखा-प्रभावित घोषित किया गया है, जो कुल मंडलों का लगभग 56.4% है। यह निर्णय बारिश की कमी और सूखे से जुड़े विभिन्न संकेतकों के आकलन के बाद लिया गया।
राजस्व (आपदा प्रबंधन) विभाग के विशेष मुख्य सचिव (FAC) जी. साई प्रसाद ने 1 अक्टूबर 2026 को सरकारी आदेश G.O. Ms. No. 4 जारी कर सूखे की घोषणा की। यह फैसला जिला कलेक्टरों से प्राप्त प्रस्तावों और राज्य सूखा समिति की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया। समिति ने 30 सितंबर को बैठक कर भारत सरकार के *सूखा प्रबंधन मैनुअल, 2016* के दिशानिर्देशों के अनुसार प्रस्तावों का मूल्यांकन किया।
सामान्य से 53.4% कम बारिश
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 31 अगस्त 2026 के बीच आंध्र प्रदेश में औसतन 197.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 424.3 मिलीमीटर होती है। इस प्रकार, बारिश में लगभग 53.4% की कमी दर्ज की गई। बारिश की स्थिति और सूखे से जुड़े अन्य संकेतकों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सामान्य समयसीमा से पहले सूखे की घोषणा की।
तीन चरणों में किया गया सूखे का आकलन
सूखे का आकलन तीन चरणों में किया गया। पहले चरण में बारिश की कमी और लगातार सूखे की अवधि जैसे अनिवार्य संकेतकों की जांच की गई। दूसरे चरण में बोए गए क्षेत्र, वनस्पति की स्थिति, मिट्टी में नमी, जलाशयों में पानी के भंडारण और भूजल स्तर जैसे प्रभाव संकेतकों का विश्लेषण किया गया। तीसरे चरण में जमीनी स्तर पर स्थिति का सत्यापन किया गया।
इस प्रक्रिया में अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय, कृषि एवं बागवानी विभाग, आंध्र प्रदेश स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (APSAC), सिंचाई विभाग, भूजल ऑडिट विभाग और आचार्य एन.जी. रंगा कृषि विश्वविद्यालय (ANGRAU) से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग किया गया।
सरकार ने जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया है कि वे प्रभावित मंडलों की सूची और संबंधित विवरण अंग्रेजी तथा तेलुगु में जिला राजपत्रों में प्रकाशित करें।
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