कॉटन की कीमतों में बेवजह बढ़ोतरी, टेक्सटाइल इंडस्ट्री मुश्किल में
केंद्र सरकार द्वारा कॉटन के आयात पर ड्यूटी माफ किए जाने के बावजूद कॉटन की कीमतों में हो रही बेवजह बढ़ोतरी से टेक्सटाइल इंडस्ट्री मुश्किल में है। वीटा यंत्रमग इंडस्ट्रियल कोऑपरेटिव यूनियन के अध्यक्ष किरण तरलेकर ने सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और कीमतों में हो रही बढ़ोतरी पर रोक लगाने की मांग की है। कॉटन की कीमतें फिलहाल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचकर 70,000 रुपये प्रति कैंडी हो गई हैं।
तरलेकर ने कहा कि ऑल इंडिया कॉटन एसोसिएशन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सीजन में कॉटन का क्लोजिंग स्टॉक पिछले साल की तुलना में 68 प्रतिशत अधिक यानी 93 लाख बेल से ज्यादा रहने का अनुमान है। वहीं, केंद्र सरकार ने 26 अक्टूबर तक कॉटन के आयात पर ड्यूटी माफ की है। इसके चलते इस साल रिकॉर्ड 63 लाख बेल कॉटन के आयात का अनुमान है, जबकि पिछले साल करीब 41 लाख बेल कॉटन का आयात हुआ था।
26 अक्टूबर से बाजार में नई फसल का कॉटन बिक्री के लिए उपलब्ध होने की वजह से उम्मीद थी कि घरेलू कॉटन की कीमतों में गिरावट आएगी या कम से कम कीमतें स्थिर रहेंगी। इसके विपरीत, पिछले कुछ दिनों में 56,000 रुपये प्रति कैंडी के स्तर पर चल रहा कॉटन बढ़कर रिकॉर्ड 70,000 रुपये प्रति कैंडी पर पहुंच गया है।
एक तरफ बाजार में कॉटन का पर्याप्त स्टॉक है, आयात भी बढ़ा है और नई फसल की आवक की उम्मीद है। इसके बावजूद कीमतों में इस तरह की एकतरफा बढ़ोतरी ने पूरी टेक्सटाइल चेन को असमंजस और परेशानी में डाल दिया है। उद्योग से जुड़े लोगों ने आशंका जताई है कि देश में उपलब्ध कॉटन के बड़े स्टॉक को कुछ बड़े कारोबारी गोदामों में रोककर कृत्रिम कमी पैदा कर रहे हैं, जिसके चलते कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है।
दूसरी ओर, राजस्थान की डाइंग इंडस्ट्री पिछले दो महीनों से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण बंद है। इससे सिंपल मशीन लूम उद्योग के सामने कपड़े के बड़े स्टॉक की समस्या खड़ी हो गई है। वहीं, ऑटोमैटिक मशीन लूम उद्योग भी कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसके चलते वीटा, इचलकरंजी, मालेगांव, सोलापुर और भिवंडी में डीसेंट्रलाइज्ड मशीन लूम सीमित स्तर पर चल रहे हैं और कॉटन यार्न की मांग भी प्रभावित हुई है।
कॉटन की कीमतों में इस तरह की एकतरफा बढ़ोतरी जारी रही तो मशीन लूम उद्योग के बाद राज्य की यार्न मिलों के सामने भी उत्पादन बंद करने की स्थिति पैदा हो सकती है। उद्योग से जुड़े लोगों ने सरकार से कॉटन की कीमतों और स्टॉक की स्थिति की जांच कर आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
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