ग्लोबल संकेतों और मजबूत मांग से भारत में कपास की कीमतों में तेजी
वैश्विक बाजारों में मजबूती और घरेलू स्तर पर बढ़ती मांग के चलते भारत में कपास की कीमतों में तेजी जारी है। सोमवार को सीमित स्टॉक और कताई मिलों की मजबूत खरीदारी को देखते हुए कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने कपास की कीमतों में ₹700 प्रति कैंडी (356 किलोग्राम) की बढ़ोतरी की। पिछले दो हफ्तों में CCI की कीमतों में कुल मिलाकर करीब ₹1,400 प्रति कैंडी की वृद्धि हुई है।
रायचूर के सोर्सिंग एजेंट रामानुज दास बूब के अनुसार, मॉनसून में देरी के कारण बुवाई प्रभावित हुई है, जिससे नई फसल की आवक में भी देरी की आशंका है। इससे मौजूदा स्टॉक पर दबाव बढ़ रहा है। मजबूत मांग के चलते रीसेल बाजार में भी गतिविधियां तेज हैं। प्रेस्ड बेल कॉटन की कीमतें करीब ₹67,500-68,500 प्रति कैंडी हैं, जबकि रीसेलर्स और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के भाव CCI की कीमतों से लगभग ₹1,000 अधिक चल रहे हैं।
CCI की बिक्री भी मजबूत बनी हुई है। पिछले सप्ताह करीब 2 लाख गांठों की बिक्री हुई, जबकि सोमवार को बिक्री लगभग 70,000 गांठ रहने का अनुमान था। अब तक CCI की कुल बिक्री करीब 91.5 लाख गांठ आंकी गई है और बिना बिका स्टॉक लगभग 14 लाख गांठ है।
देश में कपास का रकबा पिछले शुक्रवार तक 106 लाख हेक्टेयर से अधिक पहुंच गया। गुजरात, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और ओडिशा में रकबे में बढ़ोतरी हुई है, जबकि महाराष्ट्र, कर्नाटक और राजस्थान में कमी दर्ज की गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार से भी भारतीय कपास को समर्थन मिल रहा है। ICE पर दिसंबर कॉटन फ्यूचर्स करीब 84 सेंट प्रति पाउंड के आसपास हैं। कमजोर डॉलर, अमेरिका के प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्रों में मौसम संबंधी चिंताओं, वैश्विक स्टॉक में संभावित कमी और बेहतर मांग ने बाजार को सहारा दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू और निर्यात बाजारों में यार्न की बढ़ती मांग तथा मोटे काउंट वाले यार्न के उत्पादन में वृद्धि से कपास की खपत मजबूत हुई है। सितंबर के अंत तक भारत का क्लोजिंग स्टॉक घटकर करीब 75-80 लाख गांठ रह सकता है।
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