धुले: जिले में खरीफ बुवाई का लक्ष्य 3.75 लाख हेक्टेयर के करीब, कपास घटा; मक्का और सोयाबीन की ओर बढ़ा रुझान
कृषि विभाग ने इस वर्ष जिले में खरीफ मौसम के लिए कुल 376,669 हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य तय किया है। यह लक्ष्य पिछले वर्ष के लगभग समान है। जिले का कुल कृषि योग्य क्षेत्र 378,432 हेक्टेयर है, जिसमें से अधिकांश हिस्से को खरीफ फसलों की बुवाई के लिए निर्धारित किया गया है।
इस खरीफ मौसम में अनाज (चावल, ज्वार, बाजरा, रागी और मक्का), दालें (अरहर, मूंग, उड़द), तिलहन (मूंगफली, तिल, सूरजमुखी, सोयाबीन) के साथ कपास और गन्ना जैसी फसलों को शामिल किया गया है। मौसम विभाग द्वारा सामान्य से अच्छी वर्षा के अनुमान के चलते कृषि विभाग ने बीज और उर्वरकों की उपलब्धता की तैयारी भी शुरू कर दी है।
कृषि अधिकारियों के अनुसार, यदि वर्षा समय पर होती है तो बुवाई कार्य तेजी से आगे बढ़ने की संभावना है।
*कपास के क्षेत्र में कमी, वैकल्पिक फसलों की ओर झुकाव*
पिछले कुछ वर्षों में जिले में कपास की खेती के क्षेत्र में लगातार गिरावट देखी जा रही है। पहले खरीफ क्षेत्र का बड़ा हिस्सा कपास के लिए उपयोग होता था, लेकिन अब इसमें कमी दर्ज की गई है।
कपास की खेती में कमी के पीछे कीट प्रकोप, कीटनाशकों की बढ़ती लागत, मजदूरी खर्च और बाजार भाव में अनिश्चितता जैसे कारण प्रमुख बताए जा रहे हैं। इसी वजह से किसान अब वैकल्पिक फसलों की ओर रुख कर रहे हैं।
मक्का और सोयाबीन बन रहे पसंदीदा विकल्प
जिले में किसानों का रुझान मक्का और सोयाबीन की खेती की ओर तेजी से बढ़ा है। किसान इन फसलों को अपेक्षाकृत कम खर्चीला और कम मेहनत वाला मान रहे हैं, क्योंकि इनमें कीटनाशक और छिड़काव की आवश्यकता कपास की तुलना में कम होती है।
इसी कारण खरीफ सीजन में कपास की जगह मक्का और सोयाबीन की खेती का क्षेत्र बढ़ता जा रहा है।
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